Poor Man Found to be Rich

फटे कपड़ों में एयरपोर्ट पहुंचा आदमी, 10 मिनट में रोक दिया पूरा कारोबार

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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

क्या होगा जब आप किसी को उसकी औकात देखकर आंक लेते हैं…
और बाद में पता चलता है कि वही इंसान आपकी पूरी दुनिया बदल सकता है?

यह कहानी है शिवम की — एक ऐसा आदमी जिसे सबने गरीब समझकर ठुकरा दिया,
एयरपोर्ट पर उसका मजाक उड़ाया गया, उसे रोका गया, अपमानित किया गया।

लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि वही इंसान कुछ ही मिनटों में एक पूरी एयरलाइन बंद कर सकता है…
और एक डूबती हुई कंपनी को फिर से खड़ा कर सकता है।

इस कहानी में आपको मिलेगा
इमोशन, धोखा, पावर, बदला और एक ऐसा सच जो आखिरी तक आपको बांधे रखेगा।

अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जो दिल और दिमाग दोनों को छू जाएं,
तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें।

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आप भाग 2 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 22 मिनट

शिवम ने कमरे में मौजूद सभी लोगों की तरफ देखा। फिर बोला कंपनी को बचाया जा सकता है। सभी लोग एक दूसरे की तरफ देखने लगे। ऋषभ हंस पड़ा। तुम बचाओगे। तुम जानते भी हो यह कंपनी किस हालत में है? शिवम ने उसकी तरफ देखा। लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। उसने सिर्फ इतना कहा मुझे कंपनी के निवेशकों की सूची और हिसाब देखना होगा। कमरे में फिर से शोर मच गया। यह पागल हो गया है। किसी ने कहा इसे बाहर निकालो। ऋषभ ने गुस्से में कहा। लेकिन इस बार दृष्टि ने उसे रोका। शांत रहो। उसने सख्त आवाज में कहा। सब चुप हो गए। दृष्टि ने शिवम की आंखों में देखा। वहां कुछ ऐसा था जो उसने पहले कभी नहीं देखा था। अगर मैं तुम्हें यह सब दिखाऊं तो तुम क्या करोगे? उसने पूछा। शिवम ने बिना झिझक जवाब दिया। मैं इस कंपनी को डूबने से बचा दूंगा। कमरे में बैठे लोग फिर से हंस पड़े। लेकिन पृष्टि ने इस बार हंसी नहीं उड़ाई। उसने लैपटॉप उसकी तरफ बढ़ा दिया। देखो उसने कहा शिवम ने कुछ मिनट तक चुपचाप सब देखा।

उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। लेकिन उसकी आंखें तेजी से हर जानकारी को पड़ रही थी। फिर उसने सिर उठाया। समस्या यहां है। उसने एक जगह इशारा करते हुए कहा। सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे। निवेशक एक पैटर्न में पैसा निकाल रहे हैं। यह सामान्य नहीं है। किसी ने जानबूझकर यह खेल शुरू किया है। कमरे में सन्नाटा छा गया। तुम कहना क्या चाहते हो? दृष्टि ने पूछा। शिवम ने धीरे से कहा। किसी अंदर के आदमी का हाथ है। इसमें ऋषभ का चेहरा एक पल के लिए बदल गया। लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाल लिया। यह बेवकूफ ही है। उसने कहा, तुम्हें कुछ नहीं पता। शिवम ने उसकी तरफ देखा। फिर नजरें हटा ली। कंपनी को बचाने का सिर्फ एक तरीका है। उसने कहा, सभी शेयर वापस खरीदने होंगे।

कमरे में बैठे सभी लोग फिर से हंस पड़े। इतना पैसा कहां से आएगा? मोहित ने पूछा। शिवम ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने सिर्फ फोन निकाला और एक नंबर मिलाया। 500 करोड़ तुरंत ट्रांसफर करो। उसने शांत आवाज में कहा। कमरे में बैठे लोगों के चेहरे जम गए। कुछ ही सेकंड बाद मोहित के लैपटॉप पर नोटिफिकेशन आया। उसने कांपते हुए कहा, “पैसा आ गया है। अब किसी के पास हंसने की हिम्मत नहीं थी। दृष्टि खड़ी रह गई। उसकी आंखों में अब सिर्फ एक सवाल था। तुम हो कौन? शिवम ने उसकी तरफ देखा। लेकिन इस बार भी उसने जवाब नहीं दिया।

उसी रात शिवम अपने कमरे में अकेला बैठा था। उसने अपनी जेब से एक छोटा सहारा पत्थर निकाला। उस पत्थर में हल्की सी चमक थी। उसने उसे अपनी मुट्ठी में बंद किया और आंखें बंद कर ली। कुछ ही सेकंड में पत्थर उसके हाथ में राख बन गया। उसने धीरे से अपनी आंखें खोली। अब समय आ गया है। उसने खुद से कहा लेकिन उसी समय उसका फोन बजा। तुरंत अस्पताल आओ। उधर से आवाज आई। दृष्टि के पिता घायल है और स्थिति बहुत खराब है। शिवम तुरंत उठ खड़ा हुआ। उसकी आंखों में अब शांति नहीं थी। इस बार वहां सिर्फ एक चीज थी। क्रोध और उसे अब रोकना किसी के बस में नहीं था और सब कुछ बदल गया।

रात का समय था। लेकिन शहर के सबसे बड़े अस्पताल के बाहर असामान्य भीड़ लगी हुई थी। एंबुलेंस की आवाजें, भागते हुए लोग और तनाव से भरा माहौल साफ बता रहा था कि अंदर कुछ गंभीर हुआ है। शिवम तेजी से अंदर दाखिल हुआ। उसके कदमों में अब कोई हड़बड़ी नहीं थी। लेकिन हर कदम में एक ठहराव और एक दबा हुआ गुस्सा साफ महसूस हो रहा था। वह सीधे उस कमरे की तरफ बढ़ा जहां दृष्टि के पिता को भर्ती किया गया था। जैसे ही उसने दरवाजा खोला, अंदर का दृश्य देखकर कुछ पल के लिए वह भी शांत खड़ा रह गया। दृष्टि कुर्सी पर बैठी थी। उसकी आंखें सूझी हुई थी। उसकी मां बार-बार रोते हुए कुछ कह रही थी और बिस्तर पर लेटे हुए उसके पिता दर्द से कराह रहे थे। कमरे में एक और व्यक्ति खड़ा था। कर उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। जैसे उसे इस पूरे हालात में भी मजा आ रहा हो। जैसे ही उसने शिवम को अंदर आते देखा, वह हल्का सा हंसा। आ गए तुम भी। उसने तंज कसते हुए कहा, “अब क्या कर लोगे?” शिवम ने कोई जवाब नहीं दिया। वह सीधे बिस्तर के पास गया और दृष्टि के पिता को ध्यान से देखा। चोट कहां लगी है? उसने शांत आवाज में पूछा। दृष्टि ने पहली बार उसकी तरफ देखा। उसके अंदर डर और भरोसा दोनों एक साथ थे। फैक्ट्री में झगड़ा हो गया था। उसने धीमे से कहा, मजदूरों को भड़का दिया गया था।

शिवम ने बिना कुछ कहे सिर हिलाया। वह समझ चुका था कि यह सब किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं था। बल्कि एक सोची समझी चाल थी और यह सब किसने किया। उसने सीधे करण की तरफ देखते हुए पूछा। करण ने ताली बजाई और हंस पड़ा। अब समझ में आ रहा है तुम्हें? उसने कहा, लेकिन थोड़ा देर हो चुकी है। कमरे में खामोशी छा गई। करण आगे बढ़ा और बोला, फैक्ट्री अब खत्म हो चुकी है। मशीनें तोड़ दी गई हैं। काम रुक चुका है और तुम्हारा घर भी अब ज्यादा दिन नहीं बचेगा। दृष्टि की मां घबरा गई। तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? उन्होंने रोते हुए पूछा। करण ने बिना किसी भाव के जवाब दिया क्योंकि अब सब कुछ मेरा होगा। एक ही शर्त है। दृष्टि इस आदमी को छोड़ दे। कमरे में सन्नाटा छा गया। दृष्टि ने शिवम की तरफ देखा। उसकी आंखों में सवाल था, डर था और कहीं ना कहीं एक उम्मीद भी थी। शिवम कुछ सेकंड तक चुप रहा। फिर उसने बहुत शांत आवाज में कहा, “अगर मैं मना कर दूं तो” करण मुस्कुराया तो तुम्हारा पूरा परिवार सड़क पर आ जाएगा। तुम्हारे पिता जीत जाएंगे और तुम लोग कहीं के नहीं रहोगे। उसने आगे बढ़कर शिवम के कंधे पर हाथ रखा। तुम्हारी औकात यही है। उसने धीरे से कहा और इसे स्वीकार कर लो।

अगले ही पल शिवम ने उसका हाथ पकड़ लिया। कमरे में मौजूद सभी लोग सन्न रह गए। करण ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं छुड़ा पाया। शिवम की पकड़ इतनी मजबूत थी कि करण के चेहरे पर दर्द साफ दिखाई देने लगा। तुमने बहुत कुछ कह लिया। शिवम ने शांत लेकिन ठंडी आवाज में कहा। फिर उसने एक झटके में उसका हाथ मोड़ दिया। करण दर्द से चिल्ला उठा। अब मेरी सुनो। शिवम ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, आज के बाद तुम या तुम्हारे परिवार का कोई भी व्यक्ति इस परिवार के पास नहीं आएगा। करण ने गुस्से में उसे धक्का देने की कोशिश की। लेकिन इस बार शिवम ने उसे सीधे जमीन पर गिरा दिया। कमरे में मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया। करण ने जमीन से उठते हुए गुस्से में कहा, तुमने मुझे हाथ लगाया है। अब मैं तुम्हें बर्बाद करके ही छोडूंगा। वह दरवाजा पटकते हुए बाहर निकल गया। कमरे में कुछ पल के लिए कोई कुछ नहीं बोला। दृष्टि की मां ने डरते हुए कहा, “तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी है। अब वह हमें खत्म कर देगा। शिवम ने उनकी तरफ देखा और पहली बार उसकी आवाज में भरोसा साफ सुनाई दिया। अब कुछ भी बुरा नहीं होगा। उसने कहा, दृष्टि ने उसकी आंखों में देखा। इस बार उसे डर नहीं लगा। इस बार उसे भरोसा महसूस हुआ।

अगले दिन सुबह शहर के हर बड़े व्यापारी के पास एक ही खबर थी। नारंग समूह के सभी बड़े ग्राहक एक-एक करके अपने सौदे खत्म कर रहे थे। कंपनी के शेयर तेजी से गिर रहे थे। बैठक कक्ष में अफरातफरी मची हुई थी। यह सब अचानक कैसे हो गया? एक निदेशक चिल्लाया। कोई बहुत बड़ा आदमी हमारे खिलाफ काम कर रहा है। दूसरे ने कहा अमिताभ नारंग जो अब तक खुद को संभाले हुए थे। पहली बार कमजोर दिखाई दिए। पता लगाओ कौन है वह। उन्होंने सख्त आवाज में कहा लेकिन किसी के पास जवाब नहीं था। उसी समय एक फोन आया। रायजादा समूह की तरफ से बात करनी है। सचिव ने कहा कमरे में खामोशी छा गई। फोन को स्पीकर पर रखा गया। एक घंटे में बैठक होगी। उधर से आवाज आई। आपकी कंपनी के अधिग्रह के बारे में बात करनी है। सभी लोग एक दूसरे की तरफ देखने लगे। अमिताभ का चेहरा पीला पड़ गया।

एक घंटे बाद बैठक कक्ष में एक युवक दाखिल हुआ। उसके साथ वकीलों और अधिकारियों की टीम थी। वह सीधे जाकर कुर्सी पर बैठ गया। अब से इस कंपनी का संचालन मैं करूंगा। उसने साफ आवाज में कहा। सब लोग चौंक गए क्योंकि अब इस कंपनी के अधिकतर शेयर हमारे पास है। कमरे में बैठे लोगों के चेहरों से रंग उड़ गया। यह कैसे हो सकता है? किसी ने कहा सब कुछ कागजों में साफ है। उसने जवाब दिया फाइलें सबके सामने रख दी गई। सभी ने देखा कंपनी अब उनके हाथ से निकल चुकी थी। तभी दरवाजा खुला और अंदर आया शिवम कमरे में मौजूद हर व्यक्ति उसकी तरफ देखने लगा। करण जो अब तक गुस्से में था उसे देखकर ठिठक गया। तम उसने कहा, शिवम धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसकी चाल में अब कोई झिझक नहीं थी। उसने सीधे सामने खड़े व्यक्ति से कहा, बाकी काम हो गया। उस व्यक्ति ने तुरंत खड़े होकर सिर झुका दिया। जैसा आपने कहा था, सब वैसा ही हुआ है। कमरे में मौजूद हर व्यक्ति यह देखकर स्तब्ध रह गया। करण के चेहरे पर डर साफ दिखाई देने लगा। यह सब तुमने किया। उसने कांपते हुए पूछा। शिवम उसके सामने जाकर खड़ा हो गया। तुमने सोचा था कि तुम सब कुछ छीन लोगे। उसने शांत आवाज में कहा। लेकिन तुम यह भूल गए कि हर खेल में एक खिलाड़ी ऐसा होता है जो अंत में चाल चलता है। करण कुछ बोल नहीं पाया। शिवम ने कमरे में मौजूद सभी लोगों की तरफ देखा। आज के बाद यह कंपनी उसी तरह चलेगी जैसे चली चाहिए। उसने कहा और कोई भी गलत काम यहां नहीं होगा। उसकी आवाज में ऐसा विश्वास था कि किसी ने विरोध करने की हिम्मत नहीं की।

बैठक खत्म होने के बाद दृष्टि बाहर खड़ी थी। शिवम उसके सामने आकर रुका। कुछ पल दोनों चुप रहे। फिर दृष्टि ने धीरे से पूछा, “तुम हो कौन?” इस बार शिवम ने नजरें नहीं हटाई। मैं वही हूं। उसने कहा जिसे तुमने कभी पहचाना था लेकिन मानने से इंकार कर दिया। दृष्टि की आंखों में आंसू आ गए। उसे अब समझ आ रहा था कि उसने क्या खो दिया था।

कुछ दिन बाद सब कुछ बदल चुका था। नारंग परिवार सुरक्षित था। कंपनी फिर से संभल चुकी थी। करण और उसका परिवार शहर छोड़कर जा चुका था। शाम का समय था। दृष्टि छत पर खड़ी थी। शिवम उसके पास आया। अब क्या सोच रही हो? उसने पूछा। दृष्टि ने हल्की मुस्कान के साथ कहा। सोच रही हूं कि मैं तुम्हें कभी समझ ही नहीं पाई। शिवम ने कुछ नहीं कहा। दृष्टि ने उसकी तरफ देखा। अब समझना चाहती हूं। उसने धीरे से कहा। शिवम ने उसकी आंखों में देखा। अब समय है। उसने कहा और पहली बार दोनों के बीच खामोशी में भी एक सुकून था। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। लेकिन अब से जो भी होगा वह साथ होगा और यही असली जीत थी।

तो दोस्तों, आपको यह कहानी कैसी लगी? क्या आपको इसमें छिपा सच महसूस हुआ? या आपको भी कहीं ना कहीं लगा कि ऐसे फैसले हम अपनी जिंदगी में भी ले बैठते हैं। अपने विचार और सुझाव मुझे कमेंट्स में जरूर बताइए। मैं हर एक कमेंट पढ़ता हूं और आपकी राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है। अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद आती हैं जो सिर्फ सुनने के लिए नहीं बल्कि सोचने पर मजबूर कर दे तो इस चैनल को जरूर सब्सक्राइब करें। आगे भी मैं आपके लिए ऐसी ही दिल को छू जाने वाली और सोच बदल देने वाली कहानियां लेकर आता रहूंगा। मिलते हैं अगली कहानी में। तब तक अपना ख्याल रखिए।

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