Poor Man Found to be Rich

बारिश में मिली अमीर लड़की ने गरीब मैकेनिक को बताया अपना होने वाला पति

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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

तूफानी रात में निखिल एक अनजान लड़की की मदद करके उसे उसकी हवेली तक छोड़ने जाता है। लेकिन वहां पहुंचते ही लड़की सबके सामने उसे अपना होने वाला पति घोषित कर देती है। निखिल कुछ समझ पाता, उससे पहले एक टूटा हुआ लॉकेट उसकी असली पहचान और चौहान परिवार के 25 साल पुराने खौफनाक राज का पर्दाफाश कर देता है। आखिर एक गरीब मैकेनिक का इस अरबपति परिवार से क्या संबंध था?

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आप भाग 1 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 24 मिनट

भाग 1

बरसात उस रात कुछ ज्यादा ही बेरहम थी। आसमान में बादल ऐसे गरज रहे थे मानो वर्षों का गुस्सा एक ही रात में निकाल देना चाहते हो। बिजली की चमक हर कुछ मिनट में पूरे शहर को सफेद रोशनी से भर देती और अगले ही पल चारों तरफ फिर गहरा अंधेरा छा जाता। मध्य प्रदेश के छोटे से शहर देवगढ़ की सड़कें लगभग खाली हो चुकी थी। लोग अपने घरों में दुबक चुके थे। लेकिन शहर की एक पुरानी सड़क पर एक युवक अभी भी अपनी पुरानी मोटरसाइकिल लेकर घूम रहा था। उसका नाम था निखिल। उम्र करीब 27 साल। वह दिन में एक छोटे से गैराज में काम करता था और रात को जरूरत पड़ने पर लोगों की गाड़ियां ठीक करने चला जाता था। उसकी जिंदगी बहुत साधारण थी। एक छोटा सा घर, बीमार मां और ढेर सारी जिम्मेदारियां।

उस रात भी वह एक ग्राहक की गाड़ी ठीक करके लौट रहा था। जेब में सिर्फ ₹700 थे। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष था क्योंकि अगले दिन मां की दवाइयां खरीदनी थी। वह घर की तरफ मुड़ने ही वाला था कि अचानक सड़क किनारे उसे एक लड़की दिखाई दी। लड़की बारिश में भीग रही थी। उसके हाथ में छाता भी नहीं था। वह लगातार किसी को फोन लगाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन शायद नेटवर्क नहीं था।

निखिल ने बाइक धीमी कर दी। पहले उसने सोचा कि आगे बढ़ जाए। लेकिन फिर उसके कदम रुक गए। उसने बाइक लड़की के पास रोक दी। सब ठीक है। लड़की ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। मेरी कार खराब हो गई है। निखिल ने पीछे देखा। कुछ दूरी पर एक सफेद लग्जरी कार खड़ी थी। उसने समझ लिया कि लड़की किसी बहुत अमीर परिवार से होगी। कहां जाना है? एयर घर कहां है? रॉयल हिल्स। निखिल चौंक गया। रॉयल हिल्स शहर की सबसे महंगी कॉलोनी थी। वहां सिर्फ बड़े उद्योगपतियों और राजनेताओं के बंगले थे।

निखिल ने कहा, “इतनी दूर बाइक पर जाना पड़ेगा। लड़की ने धीरे से कहा, कोई और रास्ता नहीं है। निखिल ने कुछ पल सोचा। फिर बोला, बैठ जाइए। लड़की बाइक पर बैठ गई। बारिश पहले से ज्यादा तेज हो चुकी थी। दोनों चुपचाप आगे बढ़ने लगे। करीब 10 मिनट बाद लड़की ने पूछा, तुम्हारा नाम निखिल और तुम्हारा आने। इसके बाद फिर कुछ देर तक खामोशी रही। लेकिन निखिल को महसूस हुआ कि अवनी बार-बार पीछे मुड़कर देख रही है जैसे उसे किसी से डर लग रहा हो। उसने पूछा कोई परेशानी है क्या? अवनी कुछ सेकंड चुप रही। फिर बोली नहीं लेकिन उसकी आवाज बता रही थी कि बात कुछ और है।

करीब आधे घंटे बाद वे रॉयल हिल्स पहुंच गए। विशाल लोहे का गेट खुला। अंदर एक बेहद खूबसूरत हवेली दिखाई दी। निखिल ने ऐसा घर सिर्फ फिल्मों में देखा था। अवनी नीचे उतरी। निखिल ने बाइक बंद की। ठीक है मैडम। मैं चलता हूं। अवनी कुछ पल उसे देखती रही। फिर बोली अंदर चलो। निखिल चौका क्यों तुम्हारे कपड़े पूरी तरह भीग चुके हैं। कम से कम चाय पीकर चले जाना। नहीं देर हो जाएगी। कृपया निखिल को समझ नहीं आया कि वह मना क्यों नहीं कर पा रहा था। वह उसके पीछे अंदर चला गया।

हवेली के अंदर का नजारा देखकर उसकी आंखें फैल गई। संगमरमर की चमकती हुई फर्श, विशाल झूमर, महंगी पेटिंग्स और हर तरफ शाही माहौल। तभी एक नौकर तेजी से आया। मैडम साहब आपका इंतजार कर रहे हैं। अवनी का चेहरा अचानक बदल गया। उसकी मुस्कान गायब हो गई। उसने गंभीर स्वर में कहा, “मैं अभी आती हूं।” फिर वह निखिल को लेकर ऊपर चली गई। एक बड़े कमरे में पहुंचकर उसने दरवाजा बंद कर दिया।

अब निखिल असहज महसूस करने लगा। देखिए अगर कोई परेशानी है तो मैं चला जाता हूं। लेकिन अवनी अचानक कुर्सी पर बैठ गई और अगले ही पल उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। निखिल घबरा गया। क्या हुआ? अवनी ने जवाब नहीं दिया। कुछ देर बाद उसने कहा, क्या तुम किसी अजनबी की मदद करोगे? निखिल ने हैरानी से पूछा, “कैसी मदद?” अवनी ने सिर झुका लिया। ऐसी मदद जो शायद तुम्हारी जिंदगी बदल दे।” निखिल कुछ समझ नहीं पाया।

तभी कमरे के बाहर भारी कदमों की आवाज आई। फिर दरवाजे पर जोरदार दस्तक हुई। अह आवाज बहुत कठोर थी। अवनी के चेहरे का रंग उड़ गया। पापा बाहर से फिर आवाज आई। दरवाजा खुला। अवनी कांप गई। निखिल पहली बार सचमुच डर गया। कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुला। सामने लगभग 60 साल का एक प्रभावशाली व्यक्ति खड़ा था। उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। यह थे विक्रम सिंह चौहान। शहर के सबसे बड़े उद्योगपति। उनके पीछे कई लोग खड़े थे।

विक्रम सिंह ने निखिल को ऊपर से नीचे तक देखा। फिर बोले, “यह कौन है?” कमरे में सन्नाटा छा गया। निखिल कुछ बोल पाता उससे पहले अवनी ने अचानक कहा, यह वही इंसान है जिससे मैं शादी करना चाहती हूं। कमरे की हवा जैसे थम गई। निखिल के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने अवनी की तरफ देखा। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसने अभी क्या सुना है। विक्रम सिंह की आंखें क्रोध से भर गई। तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है।

अवनी ने पहली बार अपने पिता की आंखों में आंखें डालकर कहा, नहीं तो यह मजाक है। नहीं, तुम जानती भी हो यह कौन है? जानती हूं। निखिल बीच में बोल पड़ा, साहब, आप गलत समझ रहे हैं। मैं तो लेकिन अवनी ने उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे से बोली, कृपया अभी कुछ मत कहना। निखिल पूरी तरह उलझ चुका था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है।

तभी विक्रम सिंह ने गुस्से में कहा, कल तुम्हारी सगाई होने वाली है। पूरे देश के बड़े-बड़े लोग आने वाले हैं। अवनी ने जवाब दिया, “मैं सगाई नहीं करूंगी। तुम्हें करना पड़ेगा? नहीं। कमरे में तनाव बढ़ता जा रहा था। अचानक विक्रम सिंह ने एक ऐसी बात कही जिसने निखिल को और ज्यादा हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, तुम्हें सच बताने की जरूरत नहीं थी अवनी। अवनी की आंखें फैल गई। पापा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

विक्रम सिंह ने ठंडी आवाज में कहा जिस राज को हमने 25 साल छुपा कर रखा आज वह खुद सामने आ गया। निखिल को कुछ समझ नहीं आया लेकिन अवनी का चेहरा देखकर लग रहा था कि वह किसी बहुत बड़े रहस्य की बात कर रहे हैं। अगले ही पल विक्रम सिंह ने निखिल की तरफ देखा और कहा लड़के शायद तुम्हें पता नहीं है कि तुम यहां सहयोग से नहीं पहुंचे हो। निखिल स्तब्ध रह गया। क्या मतलब? विक्रम सिंह कुछ सेकंड तक उसे देखते रहे। फिर बोले क्योंकि तुम्हारा इस घर से रिश्ता आज का नहीं 25 साल पुराना है और यह सुनकर निखिल के हाथ से चाय का कप जमीन पर गिर पड़ा। निखिल को लगा जैसे कमरे की दीवारें उसके चारों तरफ घूमने लगी हो। उसने विक्रम सिंह की तरफ देखा और धीमी आवाज में पूछा। डेरा इस घर से क्या रिश्ता हो सकता है? विक्रम सिंह कुछ पल चुप रहे। अवनी की आंखों में डर था जैसे वह नहीं चाहती थी कि यह सच इस तरह सामने आए।

तभी कमरे में खड़ी एक औरत आगे आई। महंगे कपड़े, तीखा चेहरा और आंखों में घमंड। वह थी रागिनी चौहान। अवनी की सौतेली मां। उसने ताने भरी आवाज में कहा, “यह लड़का रिश्ता पूछ रहा है। इसे तो पहले अपनी औकात देखनी चाहिए। निखिल ने सिर झुका लिया। वह अपमान सहने का आदि था। लेकिन आज पहली बार उसे किसी अनजानी चोट का एहसास हुआ। अवनी तुरंत बोली, मां, इन्हें कुछ मत कहिए।

रागिनी हंस पड़ी। अभी से बचाव शुरू। इसी के लिए तुमने आर्यमान से शादी से इंकार किया। निखिल ने अवनी की तरफ देखा। आर्यमान कौन है? अवनी ने कुछ नहीं कहा। विक्रम सिंह ने गहरी सांस ली। आर्यमान महोत्रा वही आदमी जिसे कल अवनी की सगाई होनी थी। लेकिन अगर मैडम शादी नहीं करना चाहती, तो जबरदस्ती क्यों? इस बार निखिल की आवाज में डर कम और सवाल ज्यादा था।

कमरे में सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे। विक्रम सिंह ने कहा, हर रिश्ता दिल से नहीं। कभी-कभी हालात से बनता है। निखिल ने शांत स्वर में कहा, लेकिन जो रिश्ता किसी की जिंदगी तोड़ दे, वह रिश्ता नहीं सौदा होता है। अवनी ने पहली बार निखिल को अलग नजरों से देखा। उस रात पहली बार उसे लगा कि यह अनजान लड़का डरपोक नहीं है। सादा है लेकिन कमजोर नहीं।

विक्रम सिंह ने नौकरों को बाहर जाने का इशारा किया। कमरे में अब सिर्फ चार लोग रह गए। विक्रम सिंह, रागिनी, अवनी और निखिल विक्रम सिंह खिड़की के पास जाकर खड़े हो गए। बाहर बारिश अब भी हो रही थी। उन्होंने धीमे स्वर में कहना शुरू किया। 25 साल पहले मेरी एक छोटी बहन थी नंदिनी। निखिल चुप हो गया। वह इस घर की सबसे प्यारी बेटी थी। बहुत जिद्दी, बहुत सीधी और बहुत भावुक। उसने एक गरीब स्कूल शिक्षक से प्रेम विवाह कर लिया।

रागिनी ने बीच में कहा और उसी दिन इस घर की इज्जत मिट्टी में मिल गई थी। विक्रम सिंह ने उसे चुप रहने का इशारा किया। मेरे पिता ने नंदिनी को घर से निकाल दिया। मैंने भी उस समय उसका साथ नहीं दिया। मुझे लगता था कि उसने गलत किया है। लेकिन कुछ महीने बाद मुझे पता चला कि वह मां बनने वाली है। निखिल का दिल अचानक तेज धड़कने लगा। उसे पता नहीं क्यों। लेकिन हर शब्द उसके भीतर उतर रहा था। विक्रम सिंह आगे बोले। एक रात मुझे खबर मिली कि नंदिनी और उसके पति का एक्सीडेंट हो गया है। जब मैं अस्पताल पहुंचा तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नंदिनी ने मरने से पहले सिर्फ एक बात कही थी। उनकी यह आवाज भारी हो गई। मेरे बच्चे को बचा लेना। निखिल की सांस रुक गई। अवनी की आंखों में आंसू आ गए।

विक्रम सिंह ने पीछे मुड़कर निखिल को देखा। बच्चा गायब हो चुका था। निखिल ने कांपती आवाज में पूछा। गायब हर अस्पताल के रिकॉर्ड बदल दिए गए। डॉक्टर गायब हो गया और हमें बताया गया कि बच्चा जन्म के तुरंत बाद मर गया। रागिनी अचानक बेचैन हो गई। पुरानी बातें खोदने से क्या मिलेगा। विक्रम सिंह ने पहली बार गुस्से से उसकी तरफ देखा। सच मिलेगा।

कमरे में सन्नाटा छा गया। विक्रम सिंह ने जेब से एक पुरानी चैन निकाली। उस चेन में आधा टूटा हुआ लॉकेट था। यह नंदिनी के पास था। निखिल की आंखें उस लॉकेट पर टिक गई। उसका हाथ अनजाने में अपनी गर्दन की तरफ गया। उसकी कमीज के अंदर भी वैसा ही आधा लॉकेट था। अवनी ने यह देख लिया। निखिल, निखिल ने कांपते हाथों से अपना लॉकेट बाहर निकाला। दोनों टुकड़े बिल्कुल एक जैसे थे। विक्रम सिंह की आंखों में नमी भर आई। उन्होंने धीरे से दोनों टुकड़े जोड़े। लॉकेट पूरा हुआ। उस पर एक नाम लिखा था। नंदेई। निखिल की आंखों के सामने उसकी पूरी जिंदगी घूम गई। उसकी मां नहीं थी। जिसे वह मां कहता था। वह उसे मंदिर की सीढ़ियों पर मिला बच्चा बताती थी। उसके पिता हरिराम ने उसे कभी पराया महसूस नहीं होने दिया। लेकिन सच आज उसके सामने खड़ा था। मतलब बाएं।

विक्रम सिंह ने भारी आवाज में कहा, “तुम मेरी बहन के बेटे हो। निखिल पीछे हट गया। नहीं ऐसा नहीं हो सकता। अवनी उसके पास आई। निखिल यह सच हो सकता है? नहीं। निखिल चीख पड़ा। मेरे पिता हरिराम है। उन्होंने मुझे पाला है। उन्होंने भूखे रहकर मुझे खिलाया है। अगर खून का रिश्ता इतना ही बड़ा होता तो 25 साल तक कोई मुझे ढूंढने क्यों नहीं आया। विक्रम सिंह के पास कोई जवाब नहीं था। उनकी आंखें झुक गई।

निखिल ने दर्द से कहा, गरीब का बच्चा खो जाए तो शायद दुनिया उसे खोया हुआ नहीं। खत्म हुआ मान लेती है। अवनी की आंखों से आंसू बह निकले। रागिनी ने मौका देखकर कहा, बहुत हो गया यह नाटक। एक आधे लॉकेट से कोई वारिस नहीं बन जाता। तभी दरवाजे पर एक आवाज आई। लेकिन सच सिर्फ लॉकेट से साबित नहीं होगा। सबने मुड़कर देखा। दरवाजे पर एक बूढ़ा आदमी खड़ा था। सफेद बाल कांपते हाथ और आंखों में पछतावा। विक्रम सिंह चौंक गए। डॉक्टर सिंह, रागिनी का चेहरा सफेद पड़ गया। डॉक्टर सेन ने अंदर आकर कहा, मैंने 25 साल पहले बहुत बड़ा पाप किया था। निखिल उन्हें देखता रह गया। डॉक्टर सेन ने रागिनी की तरफ इशारा किया। मुझे पैसे देकर बच्चे को हटाने के लिए कहा गया था। अवनी सन्न रह गई। किसने? डॉक्टर सेन ने कांपती आवाज में कहा, रागिनी देवी ने। विक्रम सिंह गरज उठे।

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