भाग 1
मुंबई की रात हमेशा चमकती हुई लगती थी। लेकिन उस चमक के पीछे कितनी अंधेरी कहानियां छिपी होती हैं, यह हर कोई नहीं जानता था।
समुद्र के किनारे बने एक आलीशान होटल की 35वीं मंजे पर उस रात शहर के सबसे बड़े निवेशकों की पार्टी चल रही थी। महंगे सूट, चमचमाते गहने, धीमी अंग्रेजी धुने, हाथों में ग्लास और चेहरों पर बनावटी मुस्काने, सब कुछ इतना परफेक्ट दिख रहा था कि सच कहीं दिखाई ही नहीं दे रहा था।
उसी भीड़ में एक लड़की खड़ी थी। अनन्या कपूर उम्र सिर्फ 28 साल लेकिन आंखों में वह थकान थी जो कई बार उम्र से नहीं जिम्मेदारियों से आती है। उसने गहरे नीले रंग की साड़ी पहनी थी। बाल सलीके से बांधे थे और हाथ में अपनी कंपनी की फाइलें पकड़ी हुई थी। उसकी कंपनी क्वांटम बायोटेक पिछले 3 साल से एक ऐसी मेडिकल नैनो चिप पर काम कर रही थी जो शरीर के अंदर जाकर बीमारी की शुरुआती पहचान कर सकती थी।

यह तकनीक लाखों लोगों की जान बचा सकती थी। लेकिन एक समस्या थी। पैसा कंपनी की लैब गिरवी थी। कर्मचारियों की तनख्वाह 2 महीने से अटकी थी। बैंक ने आखिरी नोटिस भेज दिया था।
अगर आज निवेश नहीं मिला तो अनन्या का सपना खत्म हो सकता था और उसके साथ उसके पिता का अधूरा सपना भी। मिस कपूर पीछे से आई आवाज सुनकर अनन्या पलटी। विक्रम मल्होत्रा उसके सामने खड़ा था। उम्र 55 के करीब चेहरे पर महंगी मुस्कान और आंखों में सस्ती नियत। आपकी प्रस्तुति शानदार थी।
उसने कहा सच कहूं तो आपकी तकनीक में बहुत दम है। अनन्या ने राहत की सांस ली। धन्यवाद सर आपकी कंपनी अगर इस प्रोजेक्ट में निवेश करती है तो हम अगले 8 महीनों में क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर सकते हैं। विक्रम ने मुस्कुराकर सिर हिलाया। निवेश तो होगा अनन्या जी लेकिन बिजनेस में सिर्फ तकनीक नहीं देखी जाती।
भरोसा भी देखा जाता है। आपको किस तरह का भरोसा चाहिए? विक्रम थोड़ा पास आया। थोड़ा निजी भरोसा। अनन्या के चेहरे की मुस्कान हल्की पड़ गई।
मैं समझी नहीं। समझदार लोग हर बात शब्दों में नहीं पूछते। विक्रम ने धीमी आवाज में कहा, “आज रात मेरे साथ थोड़ा समय बिताइए। कल सुबह आपकी कंपनी के खाते में 25 करोड़ होंगे। अनन्या का गला सूख गया।
उसने एक कदम पीछे हटते हुए कहा, “मुझे आपकी शर्त मंजूर नहीं।” विक्रम की मुस्कान गायब हो गई। सोच लो इस शहर में पैसा मेरे इशारे पर चलता है। तुम मेरी बात मानोगी तो कंपनी बचेगी। नहीं मानोगी तो तुम्हारा नाम, तुम्हारा प्रोजेक्ट और तुम्हारी इज्जत सब मिट्टी में मिल जाएगा। अनन्या ने कांपती आवाज में कहा, “मेरे पिता ने मुझे सिखाया था कि हार जाना मंजूर है।
बिक जाना नहीं।” यह कहकर वह वहां से हट गई। लेकिन कहानी यही खत्म नहीं हुई थी।
कुछ देर बाद एक दूसरी कंपनी के प्रतिनिधि ने उसे जूस का गिलास दिया। अनन्या ने बिना सोचे एक घूंट पी लिया। उसके बाद सब कुछ धुंधला होने लगा। रोशनी तैरने लगी। आवाजें दूर जाने लगी।
पैर लड़खड़ाने लगे। आप ठीक हैं? किसी ने पूछा। अनन्या कुछ बोल नहीं पाई।
तभी विक्रम फिर सामने आ गया। लगता है मिस कपूर को आराम की जरूरत है। उसने आसपास खड़े लोगों से कहा। मैं इन्हें होटल के कमरे तक छोड़ देता हूं। अनन्या ने विरोध करना चाहा लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था।
विक्रम ने उसका हाथ पकड़ लिया। छोड़िए अनन्या ने धीमे से कहा, चुप रहो। विक्रम ने दांत भी कर फुसफुसाया। बहुत आदर्श दिखा चुकी हो।
वह उसे होटल से बाहर लेकर आया और पार्किंग के पास खड़ी एक काली टैक्सी का दरवाजा खोला। सबसे नजदीकी होटल। विक्रम ने ड्राइवर से कहा। ड्राइवर ने शीशे में पीछे देखा। उसकी उम्र लगभग 30 साल रही होगी।
साधारण शर्ट, हल्की दाढ़ी, शांत चेहरा और आंखों में अजीब गहराई। उसका नाम था आरव। मैडम ठीक नहीं लग रही। आरव ने कहा, विक्रम भड़क गया। तुम्हें पैसे ड्राइविंग के मिलते हैं?
जांच करने के नहीं। गाड़ी चलाओ। अनन्या ने मुश्किल से आंखें खोली। मदद उसके होठों से टूटी हुई आवाज निकली। आरव के हाथ स्टीयरिंग पर रुक गए।
सर, मैं गाड़ी आगे नहीं ले जा सकता। क्या कहा? मैडम ने मदद मांगी है। विक्रम आगे झुका। तुम जानते हो मैं कौन हूं?
आरव ने शांत स्वर में कहा, इतना जानता हूं कि आदमी वही बड़ा होता है जो बेहोश लड़की की मजबूरी का फायदा ना उठाए। विक्रम ने उसका कॉलर पकड़ लिया। तू एक टैक्सी ड्राइवर है। अपनी औकात में रह। आरव की आंखों में पहली बार ठंडक उतर आई।
औकात सड़क पर गाड़ी चलाने से छोटी नहीं होती। किसी की इज्जत लूटने से छोटी होती है। विक्रम गुस्से में बाहर उतरा। बाहर निकल। अभी बताता हूं तुझे।
आरव भी बाहर उतरा। अगले ही पल विक्रम ने हाथ उठाया। लेकिन उसका हाथ हवा में ही रुक गया। आरव ने उसकी कलाई पकड़ ली थी तो गलत आदमी से भिड़ गए। मल्होत्रा साहब आरव ने धीरे से कहा विक्रम चौका तू मेरा नाम कैसे जानता है?
आरव ने जवाब नहीं दिया। उसने बस विक्रम को जोर से धक्का दिया। विक्रम लड़खड़ा कर जमीन पर गिरा। उसी पल होटल की ओर से कुछ लोग आते दिखे। आरव तुरंत टैक्सी में बैठा और गाड़ी तेजी से आगे बढ़ा दी।
पीछे से विक्रम चिल्लाता रह गया। ए ड्राइवर तू पछताएगा। लेकिन टैक्सी रात के अंधेरे में गायब हो चुकी थी।
कुछ देर बाद अनन्या की आंख खुली। वह एक कमरे में थी। साफ सफेद चादर, साइड टेबल पर पानी, कुर्सी पर उसका बैग और सामने खिड़की से आती सुबह की हल्की रोशनी। उसका दिल जोर से धड़कने लगा। वह घबरा कर उठी।
तभी दरवाजा खुला। आरव नाश्ते की ट्री लेकर अंदर आया। आप उठ गई। मैंने सोचा चाय। बात पूरी होने से पहले अनन्या ने पास रखा फूलदान उठा लिया और उसके कंधे पर दी मारा।
आरव दर्द से पीछे हटा। अरे मैंने क्या किया? कौन हो तुम? मुझे यहां क्यों लाए? मेरे साथ क्या किया तुमने?
आरव ने दोनों हाथ ऊपर कर दिए। कुछ नहीं किया। आप अपने कपड़ों में हैं। आपका बैग वही है। फोन भी वही है।
रात को आपकी हालत खराब थी। इसलिए मैं आपको सुरक्षित होटल में ले आया। रिसेप्शन पर आपकी आईडी से कमरा लिया है। मैं बाहर लॉबी में बैठा था। अनन्या ने जल्दी से खुद को देखा।
सब ठीक था। उसकी आंखों में शर्म और राहत दोनों आ गए। मुझे लगा वह रुक गई। आरव ने अपना कंधा सहलाते हुए कहा, हां, मुझे समझ आ गया। वैसे आपका निशाना अच्छा है।
अनन्या की आंखें भर आई। सई और धन्यवाद। अगर आप नहीं होते तो कल रात आरव ने बात काट दी। जो नहीं हुआ उसके बारे में मत सोचिए। जो बच गया उसे संभालिए।
अनन्या ने पहली बार उसे गौर से देखा। वह साधारण दिखता था। लेकिन बोलता किसी पढ़े लिखे समझदार आदमी की तरह था। आपका नाम आरव आप टैक्सी चलाते हैं। आजकल हां आजकल आरव मुस्कुराया।
कभी-कभी इंसान रास्ते बदलता है ताकि मंजिल साफ दिखे। अनन्या को उसका जवाब अजीब लगा लेकिन उसने ज्यादा नहीं पूछा।
तभी उसे अचानक याद आया। ओह नहीं। आज निवेशक सम्मेलन है। वह जल्दी से उठी। मुझे अभी जाना होगा।
बिल मैं दे दूंगी। आरव ने कहा, “मैं छोड़ देता हूं। नहीं मैं कल रात के बाद अकेले जाना समझदारी नहीं होगी। अनन्या चुप हो गई।
कुछ देर बाद टैक्सी मुंबई की सड़कों पर दौड़ रही थी। अनन्या पीछे बैठी फोन पर लगातार संदेश पढ़ रही थी। उसकी टीम घबराई हुई थी। निवेशक इंतजार कर रहे थे। मीडिया भी पहुंच चुकी थी।
आपकी कंपनी किस चीज की है? आरव ने पूछा मेडिकल टेक्नोलॉजी। अनन्या ने संक्षेप में कहा, क्वार्टम बायोटेक अनन्या हैरान हुई। आप जानते हैं थोड़ा बहुत आपकी नैनो चिप तकनीक अगर सफल हुई तो डायग्नोस्टिक इंडस्ट्री बदल सकती है। अनन्या ने आश्चर्य से उसे देखा।
एक टैक्सी ड्राइवर को यह सब कैसे पता? आरव ने शीशे में उसकी तरफ देखा। टैक्सी ड्राइवर भी अखबार पढ़ते हैं। मैडम अनन्या हल्का मुस्कुराई। ठीक है।
लेकिन यह सिर्फ तकनीक नहीं है। यह मेरे पिता का सपना है। उन्होंने कैंसर की शुरुआती जांच के लिए इस रिसर्च की शुरुआत की थी। जब तक उनकी बीमारी पता चले। बहुत देर हो चुकी थी।
उसकी आवाज भर्रा गई। मैं चाहती हूं कि किसी और बेटी को अपने पिता को ऐसे खोना ना पड़े। आरव चुप हो गया। उसने गाड़ी की रफ्तार धीमी की। फिर तो यह सिर्फ बिजनेस नहीं मिशन है।
अनन्या ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा, “हां लेकिन मिशन भी पैसों के बिना मर जाता है। अगर निवेशक ना मिले तो मिलेनिय मुझे मिलाने ही होंगे और अगर गलत निवेशक मिले।” अनन्या ने उसकी तरफ देखा तो मैं भूखी रह लूंगी। पर कंपनी किसी गंदे हाथ में नहीं दूंगी। आरव के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई। अच्छा है।
अभी भी दुनिया में कुछ लोग बचे हैं। सम्मेलन हॉल पहुंचते ही अनन्या ने जल्दी से उतरते हुए कहा कल रात के लिए फिर से धन्यवाद। आरा और फूलदान के लिए। अनन्या पहली बार खुलकर मुस्कुराई। उसके लिए माफ कीजिए।
ठीक है। लेकिन अगली बार कब इस्तेमाल कीजिएगा। फूलदान महंगे होते हैं। अनन्या हंस पड़ी। कई दिनों बाद वह हंसी थी।
लेकिन उसे नहीं पता था कि कुछ मिनट बाद वही हंसी फिर छीनने वाली है। सम्मेलन हॉल में बड़े-बड़े उद्योगपति बैठे थे। मंच पर उसकी कंपनी का लोगो चमक रहा था। क्वांटम बायोटेक होस्ट ने घोषणा की देवियों और सज्जनों आज हम स्वागत करते हैं उस युवा उद्यमी का जिसने भारतीय मेडिकल टेक्नोलॉजी को नई दिशा देने का सपना देखा है। मिस अनन्या कपूर तालियां बजी।
अनन्या मंच पर गई। उसने प्रस्तुति शुरू की। हमारी नैनो चिप शरीर के अंदर जाकर कोशिकाओं के स्तर पर बदलाव पहचान सकती है। इसका उद्देश्य गंभीर बीमारियों को शुरुआती अवस्था में पकड़ना है। लोग ध्यान से सुन रहे थे।
कुछ निवेशकों ने नोच लिए। सब कुछ ठीक चल रहा था।
तभी हॉल का दरवाजा खुला। विक्रम मल्होत्रा अंदर आया। उसके चेहरे पर वही जहरीली मुस्कान थी। अनन्या का गला सूख गया। विक्रम ने ताली बजाते हुए कहा, वाह!
बहुत सुंदर प्रस्तुति। लेकिन क्या आप निवेशकों को यह भी बताएंगी कि आपकी कंपनी वित्तीय रूप से डूब चुकी है। हॉल में सन्नाटा छा गया। अनन्या ने खुद को संभाला। हर स्टार्टअप को फंडिंग की जरूरत होती है।
यह कोई छिपी बात नहीं है। विक्रम आगे बढ़ा और यह भी कोई छिपी बात नहीं कि आपकी लैब गिरवी है। कर्मचारियों की तनख्वाह रुकी है और आपकी तकनीक अभी तक प्रमाणित नहीं हुई। एक निवेशक ने पूछा, क्या यह सच है? अनन्या ने कहा हमारी तकनीक परीक्षण चरण में है लेकिन परिणाम मजबूत हैं।
विक्रम हंसा मजबूत या झूठे अनन्या कांप गई। आप क्या कहना चाहते हैं? विक्रम ने एक पेन ड्राइव निकाली। मेरे पास रिपोर्ट है कि आपकी रिसर्च टीम ने डाटा में छेड़छाड़ की है। हॉल में हलचल मच गई।