Crime Story

जिस टैक्सी ड्राइवर ने बचाई उसकी इज्जत, वही निकला अरबों का मालिक—फिर खुला …

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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

अपनी डूबती कंपनी को बचाने के लिए निवेशकों की पार्टी में पहुंची अनन्या एक ताकतवर उद्योगपति की गंदी साजिश में फंस जाती है। तभी एक साधारण टैक्सी ड्राइवर आरव उसकी जान और इज्जत बचाता है। लेकिन अगले दिन जब आरव की असली पहचान सामने आती है, तो अनन्या के पिता की मौत, चोरी हुई मेडिकल रिसर्च और वर्षों पुरानी एक खतरनाक साजिश के तार खुलने लगते हैं। क्या आरव और अनन्या असली गुनहगार तक पहुंच पाएंगे, या सच जानने से पहले ही उन्हें हमेशा के लिए चुप करा दिया जाएगा?

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आप भाग 2 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 30 मिनट

भाग 2

यह झूठ है। अनन्या चिल्लाई। विक्रम ने धीमे स्वर में कहा, झूठ साबित कर दो। लेकिन तब तक कोई निवेशक तुम्हें एक नहीं देगा। अनन्या की आंखों में आंसू आ गए लेकिन उसने उन्हें गिरने नहीं दिया।

विक्रम उसके पास आया और धीमे से बोला कल रात मेरी बात मान लेती तो आज यह सब नहीं होता। अनन्या ने घृणा से उसकी तरफ देखा। तुम बहुत नीचे गिर चुके हो और तुम अभी गिरोगी।

उसी समय पीछे से आवाज आई। गिराने वाले अक्सर भूल जाते हैं कि जमीन सबकी होती है। कभी खुद भी गिर सकते हैं। सब ने मुड़कर देखा। दरवाजे पर आरव खड़ा था।

साधारण शर्ट, साधारण चेहरा लेकिन आंखों में तूफान। विक्रम जोर से हंसा। अरे वाह, टैक्सी ड्राइवर भी आ गया। अब क्या तुम निवेश करोगे? हॉल में कुछ लोग हंस पड़े।

अनन्या ने हैरानी से कहा, आरव, तुम यहां क्यों आए? आरव धीरे-धीरे आगे बढ़ा क्योंकि कुछ लोगों को लगता है कि पैसे से सच खरीदा जा सकता है। विक्रम गुस्से से बोला, सिक्योरिटी। इस आदमी को बाहर निकालो। दो गार्ड आगे बढ़े।

आरव ने शांत स्वर में कहा, छूने से पहले सोच लो। नौकरी बची रहे तो अच्छा है। गार्ड रुक गए। विक्रम चिल्लाया। तुम जानते नहीं हो मैं कौन हूं।

आरव ने पहली बार तेज आवाज में कहा, “मैं अच्छी तरह जानता हूं।” विक्रम मल्होत्रा, तुम वही आदमी हो जिसने अपनी तीन कंपनियां दूसरों की रिसर्च चुराकर खड़ी की। वही आदमी जिसने पिछले साल एक छोटे वैज्ञानिक को फर्जी केस में फंसाया और वही आदमी जिसने कल रात एक महिला के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। हॉल में सन्नाटा छा गया। विक्रम का चेहरा पीला पड़ गया। सबूत है तुम्हारे पास।

आरव ने अपनी जेब से फोन निकाला। पूरा वीडियो विक्रम के माथे पर पसीना आ गया। अनन्या ने अविश्वास से आरव को देखा। तुमने रिकॉर्ड किया सुरक्षा के लिए। आरव ने कहा विक्रम ने खुद को संभाला।

एक टैक्सी ड्राइवर की बात पर कोई यकीन नहीं करेगा। आरव मुस्कुराया। सही कहा। टैक्सी ड्राइवर की बात पर शायद नहीं।

तभी हॉल के बाहर से कई लोग अंदर आए। काले सूट पहने सुरक्षा अधिकारी उनके बीच एक महिला थी क्लोई मेहरा वह सीधा आरव के पास आई और झुक कर बोली सर आपकी टीम बाहर तैयार है पूरा हॉल स्तब्ध रह गया अनन्या के होंठ खुल गए सर विक्रम पीछे हट गया यह क्या नाटक है क्लोई ने मंच की स्क्रीन पर एक दस्तावेज खुलवाया उसमें लिखा था सिंघानिया ग्लोबल होल्डिंग्स चेयरमैन है आरव राज सिंघानिया हॉल में बैठे कई बड़े उद्योगपति अपनी सीटों से खड़े हो गए किसी ने फुसफुसाकर कहा यह आरव सिंघानिया है। दूसरी ने कहा वही जो पिछले 5 साल से मीडिया से गाया था।

तीसरे ने कहा सिंघानिया ग्लोबल का मालिक अनन्या का दिल धड़कना भूल गया। वह जिसे टैक्सी ड्राइवर समझ रही थी। वह देश के सबसे बड़े व्यापारिक साम्राज्य का मालिक था। विक्रम की आवाज कांप गई। तुम जिंदा हो।

आरव की आंखें ठंडी हो गई। हां विक्रम और अब लौट आया हूं।

यह सुनते ही हॉल में खामोशी फैल गई क्योंकि यह सिर्फ एक निवेशक सम्मेलन नहीं था। यह उस जंग की शुरुआत थी जिसे आरव 5 साल से छिप कर तैयार कर रहा था और अनन्या को अभी पता भी नहीं था कि उसके पिता की मौत, उसकी कंपनी पर हमला और आरव का गायब होना इन सबके तार एक ही आदमी से जुड़े थे। विक्रम मल्होत्रा से मुंबई के उस विशाल कॉन्फ्रेंस हॉल में ऐसा सन्नाटा छा गया था मानो समय ही रुक गया हो। कुछ मिनट पहले तक लोग जिस आदमी को एक साधारण टैक्सी ड्राइवर समझ रहे थे, अचानक वही देश के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक सिंघानिया ग्लोबल का मालिक निकला था। अनन्या अभी तक स्तब्ध खड़ी थी।

उसकी आंखें बार-बार आरव पर जा रही थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि जिस इंसान ने सुबह उसके लिए नाश्ता खरीदा था, वहीं अरबों की संपत्ति का मालिक हो सकता है।

उधर विक्रम मल्होत्रा का चेहरा पीला पड़ चुका था। उसने धीरे-धीरे पीछे हटना शुरू किया। लेकिन आरव की निगाहें उस पर जमी थी। इतनी जल्दी जाने की क्या जरूरत है? विक्रम।

आरव ने शांत स्वर में कहा, हमारी मुलाकात तो अभी शुरू हुई है। विक्रम ने खुद को संभालने की कोशिश की। मुझे नहीं पता तुम क्या साबित करना चाहते हो। सच कौन सा सच? आरव मुस्कुराया।

वही सच जिसे तुमने 5 साल तक दफनाने की कोशिश की। पूरा हॉल खामोश था। अनन्या को लग रहा था जैसे वह किसी फिल्म का हिस्सा बन गई हो। लेकिन यह फिल्म नहीं थी। यह उसकी जिंदगी थी और शायद उसके पिता की मौत से भी जुड़ी हुई थी।

कॉन्फ्रेंस के बाद मीडिया में हड़कंप मच गया। हर चैनल पर एक ही खबर चल रही थी। सिंघानिया ग्लोबल के रहस्यमई मालिक की वापसी। विक्रम मल्होत्रा पर गंभीर आरोप। क्वांटम बायोटिक विवाद के पीछे कौन?

उसी शाम आरव ने अनन्या को अपने ऑफिस बुलाया। ऑफिस क्या था? पूरा एक साम्राज्य था। 50 मंजिला कांच की इमारत अंदर सैकड़ों कर्मचारी उच्च सुरक्षा स्वचालित सिस्टम और हर जगह सिंघानिया ग्लोबल का लोगो अनन्या अंदर पहुंची तो उसे महसूस हुआ कि वह किसी दूसरी दुनिया में आ गई है। क्लोई उसे ऊपर ले गई।

सर आपका इंतजार कर रहे हैं। सर अनन्या बुदबुदाई। अभी भी उसे आरव को सर कहना अजीब लग रहा था।

कमरे का दरवाजा खुला। आरव खिड़की के सामने खड़ा समुद्र को देख रहा था। आज उसने साधारण टैक्सी ड्राइवर वाले कपड़े नहीं पहने थे। काला सूट, सफेद शर्ट, साफ सुथरा व्यक्तित्व। वह बिल्कुल अलग इंसान लग रहा था।

फिर भी उसकी आंखें वही थी। शायद गहरी और रहस्यमय। बैठा। आरव ने कुर्सी की तरफ इशारा किया। कुछ सेकंड तक दोनों चुप रहे।

फिर अनन्या बोली, तुमने झूठ क्यों बोला? किस बारे में? तुम टैक्सी ड्राइवर नहीं थे। आरव हल्का मुस्कुराया। मैं टैक्सी चला रहा था।

लेकिन तुम अरबपति हो। दोनों बातें सच हैं। मजाक मत करो। आरव की मुस्कान गायब हो गई। मैं मजाक नहीं कर रहा।

उसने कुछ देर बाद कहा कभी-कभी सच जानने के लिए आदमी को ऊपर नहीं नीचे जाना पड़ता है। अनन्या समझ नहीं पाई। मतलब आरव ने खिड़की से बाहर देखा। 5 साल पहले मेरे पिता की हत्या हुई थी। अनन्या चौंक गई।

क्या आधिकारिक रिकॉर्ड में उसे दुर्घटना कहा गया? लेकिन वह दुर्घटना नहीं थी। कमरे में खामोशी छा गई और मुझे शक था कि उसके पीछे कुछ बड़े लोग हैं। विक्रम आरव ने धीरे से सिर हिलाया।

शायद उस रात पहली बार आरव ने अपने अतीत की कहानी सुनाई। उसके पिता देश के सबसे ईमानदार उद्योगपतियों में गिने जाते थे। लेकिन वे एक ऐसे मेडिकल प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे जो अरबों का बाजार बदल सकता था। उसी दौरान उनकी मौत हो गई। कई सबूत गायब हो गए।

गवाह गायब हो गए। फाइलें गायब हो गई और मामला हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। लेकिन आरव ने हार नहीं मानी। उसने अपनी पहचान छिपा ली। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को सामने रखकर खुद पर्दे के पीछे चला गया।

5 साल तक वह अलग-अलग शहरों में घूमता रहा। लोगों को समझता रहा। जानकारी जुटाता रहा और उसी दौरान उसकी नजर विक्रम मल्होत्रा पर गई। अनन्या चुपचाप सुनती रही। फिर उसने पूछा लेकिन इसका मेरी कंपनी से क्या संबंध है?

आरव ने मेज पर एक फाइल रखी। यही तो मुझे पता लगाना है। क्या मतलब तुम्हारे पिता कौन थे? अनन्या की आंखें भर आई। क्या रवि कपूर आरव ने फाइल उसकी तरफ बढ़ा दी?

इसे खोलो। अनन्या ने फाइल खोली। अंदर कुछ पुराने दस्तावेज थे और एक तस्वीर तस्वीर देखते ही उसके हाथ कांप गए। उसमें उसके पिता खड़े थे। लेकिन अकेले नहीं।

उनके साथ आरव के पिता भी थे। या दोनों पार्टनर थे। अनन्या की सांस रुक गई। क्या तुम्हारे पिता और मेरे पिता एक ही प्रोजेक्ट पर साथ काम कर रहे थे? लेकिन पापा ने कभी नहीं बताया क्योंकि शायद उन्हें मौका नहीं मिला।

अनन्या की आंखों से आंसू निकल पड़े। उसकी पूरी दुनिया बदल रही थी। उसे लग रहा था जैसे उसके पिता की जिंदगी का आधा हिस्सा उससे छिपा लिया गया हो।

उधर विक्रम मल्होत्रा अपने पेंट हाउस में बैठा था। उसके सामने टीवी पर खबरें चल रही थी। हर चैनल उसका नाम ले रहा था। वह गुस्से में ग्लास तोड़ बैठा। आरव सिंहानिया उसने दांत पीसे तुझे मर जाना चाहिए था।

तभी उसका निजी सहायक अंदर आया। सर क्या है? एक और समस्या है। अब क्या क्वांटम बायोटक की टीम ने नया प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। विक्रम का चेहरा सख्त हो गया।

नहीं यह उसे बाजार तक नहीं पहुंचना चाहिए। अगले दिन अनन्या अपनी लैब पहुंची। कर्मचारियों में नया उत्साह था। सिंघानिया ग्लोबल का समर्थन मिलने के बाद उम्मीद वापस लौट आई थी। सब खुश थे लेकिन खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।

दोपहर में अचानक अलार्म बजने लगा। लैब के सर्वर रूम से धुआं निकल रहा था। लोग भागने लगे। अनन्या दौड़ती हुई अंदर पहुंची। मुख्य सर्वर जल चुका था।

कई हार्ड डिस्क नष्ट हो चुकी थी। उसका चेहरा सफेद पड़ गया। नहीं उसकी आवाज कांप गई। नहीं वर्षों का शोध हजारों घंटे की मेहनत, करोड़ों का डाटा सब खत्म हो चुका था।

उसी समय आरव को फोन आया। वह तुरंत वहां पहुंचा। अनन्या जमीन पर बैठी रो रही थी। सब खत्म हो गया। आरव उसके पास बैठ गया।

शांत हो जाओ। तुम समझ नहीं रहे। मैं समझ रहा हूं। नहीं समझ रहे। उसकी आवाज टूट गई।

यह सिर्फ कंपनी नहीं थी। यह मेरे पापा का सपना था। अब कुछ नहीं बचा। कुछ सेकंड तक आरव चुप रहा। फिर उसने कहा, “अगर मैं कहूं कि सब बचा हुआ है।” अनन्या ने उसकी तरफ देखा।

क्या? आरव मुस्कुराया। मैं हमेशा बैकअप रखता हूं।

1 घंटे बाद सिंघानिया ग्लोबल का साइबर सिक्योरिटी विभाग सक्रिय हो चुका था। उन्होंने जांच शुरू की और सिर्फ 4 घंटे में उन्हें सच्चाई मिल गई। आग दुर्घटना नहीं थी। सर्वर को पहले हैक किया गया था। डाटा चुराया गया।

फिर सबूत मिटाने के लिए आग लगाई गई। किसने किया? अनन्या ने पूछा। विशेषज्ञ बोला हमें अभी नाम नहीं मिला है। लेकिन हम ट्रैक कर रहे हैं।

तभी स्क्रीन पर एक लोकेशन दिखाई दी। सबकी आंखें फैल गई। सिग्नल सीधे विक्रम मल्होत्रा के एक सहयोगी की कंपनी तक पहुंच रहा था।

उधर विक्रम को भी खबर मिल चुकी थी। उसने तुरंत आदेश दिया सभी डिजिटल रिकॉर्ड मिटा दो। लेकिन सर अगर यह और एक बात सर अब सिर्फ डाटा चोरी से काम नहीं चलेगा तो विक्रम की आंखें खतरनाक हो गई। अनन्या कपूर को खत्म करना होगा।

उसी रात अनन्या अपनी कार से घर लौट रही थी। सड़क सुनसान थी। अचानक पीछे से एक ट्रक तेजी से आया। उसने कार को टक्कर मारने की कोशिश की। अनन्या घबरा गई।