Crime Story

जिस टैक्सी ड्राइवर ने बचाई उसकी इज्जत, वही निकला अरबों का मालिक—फिर खुला …

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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

अपनी डूबती कंपनी को बचाने के लिए निवेशकों की पार्टी में पहुंची अनन्या एक ताकतवर उद्योगपति की गंदी साजिश में फंस जाती है। तभी एक साधारण टैक्सी ड्राइवर आरव उसकी जान और इज्जत बचाता है। लेकिन अगले दिन जब आरव की असली पहचान सामने आती है, तो अनन्या के पिता की मौत, चोरी हुई मेडिकल रिसर्च और वर्षों पुरानी एक खतरनाक साजिश के तार खुलने लगते हैं। क्या आरव और अनन्या असली गुनहगार तक पहुंच पाएंगे, या सच जानने से पहले ही उन्हें हमेशा के लिए चुप करा दिया जाएगा?

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आप भाग 3 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 30 मिनट

भाग 3

उसने गाड़ी मोड़ दी। ट्रक फिर पीछे आ गया। तब साफ था यह दुर्घटना नहीं थी। कोई उसे मारना चाहता था। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

फोन हाथ से गिर गया। कार नियंत्रण खोने लगी।

तभी सामने से एक काली एसयूवी आई। वह सीधे ट्रक के सामने आ गई। ट्रक ड्राइवर घबरा गया। गाड़ी बेकाबू हुई और सड़क किनारे जाकर पलट गई। अनन्या ने ब्रेक लगाए।

कुछ सेकंड बाद एसयूवी का दरवाजा खुला। आरव बाहर निकला। वह तेजी से उसकी कार तक पहुंचा। तुम ठीक हो? अनन्या की आंखों में आंसू आ गए।

तमर मैंने कहा था ना क्या आरव ने हल्की मुस्कान दी। अब तुम अकेली नहीं हो।

लेकिन दोनों नहीं जानते थे कि असली तूफान अभी बाकी था क्योंकि उसी समय एक अज्ञात व्यक्ति विक्रम को फोन कर रहा था। विक्रम ने कॉल उठाई। काम क्यों नहीं हुआ। दूसरी तरफ से आवाज आई। आरव बीच में आ गया।

कुछ सेकंड खामोशी रही। फिर वह रहस्यमय आवाज बोली, कोई बात नहीं प्लान भी शुरू करो। विक्रम ने पूछा, लेकिन सर अगर आरव को सच्चाई पता चल गई तो खून पर मौजूद व्यक्ति हंसा। धीरे ठंडे स्वर में उसे अभी तक यह भी नहीं पता कि उसके पिता की मौत के पीछे असली इंसान कौन था। विक्रम की आंखें फैल गई।

आप कहना क्या चाहते हैं? दूसरी तरफ से जवाब आया, मैं कहना चाहता हूं कि तुम सिर्फ मोहरा हो। विक्रम खेल कोई और खेल रहा है और अगले ही पल कॉल कट गया। विक्रम के हाथ कांपने लगे क्योंकि पहली बार उसे भी एहसास हुआ कि वह जिस इंसान के लिए वर्षों से काम कर रहा था, उसने कभी उसका चेहरा तक नहीं देखा था।

मुंबई की रात फिर एक बार जाग रही थी। लेकिन इस बार सिर्फ शहर नहीं जाग रहा था। आरव सिंघानिया भी जाग रहा था और उसके साथ जाग रही थी वह सच्चाई जिसका पीछा वह पिछले 5 सालों से कर रहा था। अपने पेंट हाउस की ऊंची खिड़की के सामने खड़ा वह समुद्र की तरफ देख रहा था। उसकी आंखों में नींद नहीं थी।

सिर्फ सवाल थे। उसके पिता की मौत अनन्या के पिता का रहस्य विक्रम मल्होत्रा और वह ज्ञात आदमी जिसने फोन पर कहा था विक्रम सिर्फ एक मोहरा है। अगर विक्रम मोहरा था तो खिलाड़ी कौन था?

उसी समय क्लोई कमरे में दाखिल हुई। उसके हाथ में एक फाइल थी। सर आरव पलटा कुछ मिला। क्लोई ने फाइल टेबल पर रखी। हमने विक्रम के पिछले 10 साल के सभी ट्रांजैक्शन ट्रैक किए हैं और हर बड़ी डील के बाद पैसा एक ही शेयर कंपनी में गया है।

किसकी? ब्लैक स्टोन बायो रिसर्च आरव का माथा सिकुड़ गया। मैंने कभी यह नाम नहीं सुना। किसी ने नहीं सुना। क्लोई बोली क्योंकि यह कंपनी सिर्फ कागजों में मौजूद है।

मालिक नहीं मिला। डायरेक्टर नहीं मिला। ऑफिस नहीं मिला तो मिला क्या? क्लोई ने गहरी सांस ली। सिर्फ एक नाम।

आरव की नजर उसके चेहरे पर टिक गई। कार्ल क्लोई ने धीरे से कहा राजवीर सिंघानिया कमरे में सन्नाटा छा गया। आरव के हाथ से कॉफी का कप छूट गया। राजवीर सिंघानिया यह नाम उसके लिए किसी तूफान से कम नहीं था क्योंकि राजवीर उसका चाचा था। उसके पिता का छोटा भाई वही इंसान जिसने उसके पिता की मौत के बाद परिवार और बिजनेस संभाला था।

वही इंसान जिसने उसे बचपन में गोद में खिलाया था। वही इंसान जिसे वह अपना दूसरा पिता मानता था। नहीं आरव बुदबुदाया। यह नहीं हो सकता। लेकिन क्लोई की आंखों में संदेह नहीं था।

हमें भी विश्वास नहीं हुआ था। लेकिन सारे रिकॉर्ड उसी की तरफ इशारा कर रहे हैं। आरव कुर्सी पर बैठ गया। उसका दिमाग सुन्न हो गया था। 5 सालों से वह बाहर दुश्मन ढूंढ रहा था और शायद दुश्मन हमेशा उसके घर के अंदर था।

उधर अनन्या भी चैन से नहीं बैठी थी। उसे लग रहा था कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई।

उस रात उसने अपने पिता की पुरानी डायरी खोल ली। वर्षों से वह उसे संभाल कर रखे हुए थी। पन्ने पलटते पलटते अचानक एक कागज नीचे गिरा। वह पीला पड़ चुका था। शायद बहुत पुराना था।

अनन्या ने उसे उठाया और पढ़ते ही उसकी सांस अटक गई। उस पर लिखा था अगर मेरे साथ कुछ हो जाए तो आर एस पर भरोसा मत करना। नीचे उसके पिता के हस्ताक्षर थे। आर एस राजवीर सिंघानिया।

अगली सुबह अनन्या सीधे आरव के ऑफिस पहुंची। जैसे ही उसने वह कागज दिखाया, आरव का चेहरा बदल गया। अब संदेह लगभग यकीन में बदल चुका था। हमें उससे मिलना होगा। आरव ने कहा तभी उस शाम दोनों राजवीर सिंघानिया के फार्म हाउस पहुंचे।

वह जगह किसी महल से कम नहीं थी। सैकड़ों एकड़ जमीन, सुरक्षा गार्ड, प्राइवेट हेलीकॉप्टर और हर तरफ आलीशान सजावट राजवीर ने दोनों का स्वागत मुस्कुरा कर किया। आओ बच्चों इतने दिनों बाद याद आई मेरी लेकिन उसकी मुस्कान देखकर भी आरव को पहली बार अजीब महसूस हुआ कुछ गलत था बहुत गलत डिनर के दौरान राजवीर सामान्य बातें करता रहा लेकिन अचानक आरव ने पूछा पापा की मौत वाली रात आप कहां थे टेबल पर सन्नाटा छा गया राजवीर की मुस्कान हल्की पड़ गई अचानक यह सवाल क्यों क्योंकि मुझे जवाब चाहिए राजवीर ने पानी का गिलास उठाया पुरानी बातें भूल जाओ मैं नहीं भूल सकता तुम मत भूलो। राजवीर की आवाज पहली बार कठोर हुई। लेकिन कब्रें खोदना बंद कर दो।

अनन्या ने पहली बार देखा कि दोनों की आंखों में सीधी टक्कर हो रही थी। कुछ सेकंड बाद राजवीर उठ खड़ा हुआ। विनय खत्म हुआ। अब जा लेकिन जैसे ही वह मुड़ा एक कागज उसकी जीभ से नीचे गिर गया। अनन्या ने उसे उठा लिया और पढ़ते ही उसका चेहरा सफेद पड़ गया।

वह दस्तावेज क्वार्टम बायोटक के चोरी हुए शोध का था। अब कोई शक नहीं बचा था। राजवीर ही मास्टरमाइंड था लेकिन असली झटका अभी बाकी था।

जैसे ही वे बाहर निकले अचानक चारों तरफ हथियार बंद लोग आ गए। अनन्या चीख उठी। आरव तुरंत उसके सामने खड़ा हो गया और उसी समय पीछे से ताली बजने की आवाज आई। राजवीर धीरे-धीरे बाहर आया। अब उसके चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं थी।

मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम इतनी जल्दी सच तक पहुंच जाओगे। आरव की मुट्ठियां भी गई। क्यों? राजवीर हंसा। पैसा सिर्फ पैसे के लिए सिर्फ पैसे नहीं उसकी आंखों में पागलपन उतर आया।

तुम्हारे पिता हमेशा मुझसे बेहतर थे। सब लोग उनकी तारीफ करते थे। मैं हमेशा उनकी परछाई बनकर रह गया। तो मैंने तय किया कि एक दिन सब कुछ मेरा होगा। आरव की आंखें लाल हो गई।

तुमने अपने भाई को मरवा दिया। ख राजवीर मुस्कुराया और सिर्फ उसे नहीं। वह अनन्या की तरफ मुड़ा। तुम्हारे पिता को भी अनन्या का दिल जैसे रुक गया। झुर वह चीखी लेकिन राजवीर हंस पड़ा।

उन्होंने सच्चाई जान ली थी। इसलिए उन्हें भी हटाना पड़ा। अनन्या की आंखों से आंसू बहने लगे। सालों से जिस दर्द के साथ वह जी रही थी। आज उसका अपराधी सामने खड़ा था उन्हें पकड़ लो।

राजवीर ने आदेश दिया तुरंत दर्जनों लोग आगे बढ़े। इसके बाद जो हुआ वह किसी फिल्म जैसा था। आरव ने एक आदमी को मुक्का मारा। दूसरे को धक्का दिया। तीसरे का हथियार छीन लिया।

लेकिन दुश्मन बहुत ज्यादा थे। कुछ ही मिनटों में दोनों को पकड़ लिया गया।

उन्हें फार्म हाउस के अंदर एक कमरे में बंद कर दिया गया। हाथ बांध दिए गए। दरवाजा बंद हो गया।

कुछ देर तक दोनों चुप रहे। फिर अनन्या रो पड़ी। मैंने पापा से वादा किया था कि उनका सपना पूरा करूंगी। लेकिन सब खत्म हो गया। आरव ने उसकी तरफ देखा।

नहीं सब खत्म नहीं हुआ। कैसे? क्योंकि हमने सच ढूंढ लिया।

तभी आरव मुस्कुराया। अनन्या हैरान हुई। तुम मुस्कुरा क्यों रहे हो? क्योंकि यह वही कमरा है जिसकी मुझे उम्मीद थी। क्या मतलब?

आरव ने अपनी घड़ी दिखाई। उसमें एक छोटा लाल बटन था। मैं अंदर आने से पहले यह दबा चुका हूं।

उसी समय बाहर सायरन बजने लगे। पूरे फार्म हाउस में अफरातफरी मच गई। क्लोई पुलिस आर्थिक अपराध शाखा और साइबर सेल के साथ पहुंच चुकी थी। राजवीर घबरा गया। नहीं लेकिन अब देर हो चुकी थी।

उसके सारे बैंक रिकॉर्ड मिल चुके थे। डाटा चोरी के सबूत मिल चुके थे। हत्या के गवाह सामने आ चुके थे और सबसे बड़ा सबूत विक्रम मल्होत्रा सरकारी गवाह बन चुका था।

कुछ घंटों बाद राजवीर गिरफ्तार हो गया। लेकिन कहानी का सबसे भावनात्मक हिस्सा अभी बाकी था।

3 महीने बाद मुंबई हाईकोर्ट अदालत खचाखच भरी हुई थी। जज ने फैसला सुनाया। राजवीर सिंघानिया को आजीवन कारावास विक्रम मल्होत्रा को 20 वर्ष की सजा। सभी अवैध संपत्तियां जब्त फैसला सुनते ही अनन्या की आंखों से आंसू निकल आए। वर्षों बाद उसे लगा कि उसके पिता को न्याय मिला है।

6 महीने बाद क्वांटम बायोटक का नया रिसर्च सेंटर खुला। इस बार निवेश की कमी नहीं थी। सिंघानिया ग्लोबल उसके साथ खड़ा था। मंच पर अनन्या खड़ी थी। उसके पीछे उसके पिता की तस्वीर लगी थी।

यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है। उसने कहा, यह उन सभी लोगों की जीत है जो सच और ईमानदारी पर विश्वास करते हैं। तालियों की गुंज पूरे हॉल में फैल गई।

कार्यक्रम खत्म होने के बाद वह बाहर आई। समुद्र के किनारे सूरज डूब रहा था। वहां आरव खड़ा था। उसी तरह जैसे पहली बार टैक्सी के पास खड़ा था। एक बात पूछूं।

अनन्या ने कहा, हम अगर उस रात तुम वह टैक्सी नहीं चला रहे होते तो आरव मुस्कुराया तो शायद मैं तुम्हें कभी नहीं मिल पाता। कुछ सेकंड दोनों चुप रहे। फिर आरव ने जेब से एक छोटा डिब्बा निकाला। अनन्या की आंखें फैल गई। यह क्या है?

एक नीलेश नीलेश था मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निवेश। उसने डिब्बा खोला। अंदर एक अंगूठी थी। अनन्या कपूर क्या तुम मेरी पार्टनर बनोगी? अनन्या हंसते-हंसते रो पड़ी।

बिजनेस पार्टनर आरव मुस्कुराया। उम्मीद तो उससे थोड़ी ज्यादा की है और अगले ही पल अनन्या ने उसे गले लगा लिया। समुद्र की लहरें किनारे से टका रही थी। सूरज धीरे-धीरे डूब रहा था और दो अधूरी कहानियां आखिरकार एक हो चुकी थी।

तो दोस्तों आज की कहानी यहीं समाप्त होती है। उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आई होगी और इस कहानी से आपको कुछ ना कुछ सीखने को जरूर मिला होगा।

अगर आपको कहानी अच्छी लगी हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताइए कि कहानी का कौन सा हिस्सा आपको सबसे ज्यादा पसंद आया। और अगर आप चाहते हैं कि हम ऐसी ही दिलचस्प, भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानियां आपके लिए लाते रहे तो वीडियो को लाइक जरूर कीजिए।

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