Poor Man Found to be Rich

बारिश में मिली अमीर लड़की ने गरीब मैकेनिक को बताया अपना होने वाला पति

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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

तूफानी रात में निखिल एक अनजान लड़की की मदद करके उसे उसकी हवेली तक छोड़ने जाता है। लेकिन वहां पहुंचते ही लड़की सबके सामने उसे अपना होने वाला पति घोषित कर देती है। निखिल कुछ समझ पाता, उससे पहले एक टूटा हुआ लॉकेट उसकी असली पहचान और चौहान परिवार के 25 साल पुराने खौफनाक राज का पर्दाफाश कर देता है। आखिर एक गरीब मैकेनिक का इस अरबपति परिवार से क्या संबंध था?

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आप भाग 1 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 24 मिनट

भाग 1

बरसात उस रात कुछ ज्यादा ही बेरहम थी। आसमान में बादल ऐसे गरज रहे थे मानो वर्षों का गुस्सा एक ही रात में निकाल देना चाहते हो। बिजली की चमक हर कुछ मिनट में पूरे शहर को सफेद रोशनी से भर देती और अगले ही पल चारों तरफ फिर गहरा अंधेरा छा जाता। मध्य प्रदेश के छोटे से शहर देवगढ़ की सड़कें लगभग खाली हो चुकी थी। लोग अपने घरों में दुबक चुके थे। लेकिन शहर की एक पुरानी सड़क पर एक युवक अभी भी अपनी पुरानी मोटरसाइकिल लेकर घूम रहा था। उसका नाम था निखिल। उम्र करीब 27 साल। वह दिन में एक छोटे से गैराज में काम करता था और रात को जरूरत पड़ने पर लोगों की गाड़ियां ठीक करने चला जाता था। उसकी जिंदगी बहुत साधारण थी। एक छोटा सा घर, बीमार मां और ढेर सारी जिम्मेदारियां।

उस रात भी वह एक ग्राहक की गाड़ी ठीक करके लौट रहा था। जेब में सिर्फ ₹700 थे। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष था क्योंकि अगले दिन मां की दवाइयां खरीदनी थी। वह घर की तरफ मुड़ने ही वाला था कि अचानक सड़क किनारे उसे एक लड़की दिखाई दी। लड़की बारिश में भीग रही थी। उसके हाथ में छाता भी नहीं था। वह लगातार किसी को फोन लगाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन शायद नेटवर्क नहीं था।

निखिल ने बाइक धीमी कर दी। पहले उसने सोचा कि आगे बढ़ जाए। लेकिन फिर उसके कदम रुक गए। उसने बाइक लड़की के पास रोक दी। सब ठीक है। लड़की ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। मेरी कार खराब हो गई है। निखिल ने पीछे देखा। कुछ दूरी पर एक सफेद लग्जरी कार खड़ी थी। उसने समझ लिया कि लड़की किसी बहुत अमीर परिवार से होगी। कहां जाना है? एयर घर कहां है? रॉयल हिल्स। निखिल चौंक गया। रॉयल हिल्स शहर की सबसे महंगी कॉलोनी थी। वहां सिर्फ बड़े उद्योगपतियों और राजनेताओं के बंगले थे।

निखिल ने कहा, “इतनी दूर बाइक पर जाना पड़ेगा। लड़की ने धीरे से कहा, कोई और रास्ता नहीं है। निखिल ने कुछ पल सोचा। फिर बोला, बैठ जाइए। लड़की बाइक पर बैठ गई। बारिश पहले से ज्यादा तेज हो चुकी थी। दोनों चुपचाप आगे बढ़ने लगे। करीब 10 मिनट बाद लड़की ने पूछा, तुम्हारा नाम निखिल और तुम्हारा आने। इसके बाद फिर कुछ देर तक खामोशी रही। लेकिन निखिल को महसूस हुआ कि अवनी बार-बार पीछे मुड़कर देख रही है जैसे उसे किसी से डर लग रहा हो। उसने पूछा कोई परेशानी है क्या? अवनी कुछ सेकंड चुप रही। फिर बोली नहीं लेकिन उसकी आवाज बता रही थी कि बात कुछ और है।

करीब आधे घंटे बाद वे रॉयल हिल्स पहुंच गए। विशाल लोहे का गेट खुला। अंदर एक बेहद खूबसूरत हवेली दिखाई दी। निखिल ने ऐसा घर सिर्फ फिल्मों में देखा था। अवनी नीचे उतरी। निखिल ने बाइक बंद की। ठीक है मैडम। मैं चलता हूं। अवनी कुछ पल उसे देखती रही। फिर बोली अंदर चलो। निखिल चौका क्यों तुम्हारे कपड़े पूरी तरह भीग चुके हैं। कम से कम चाय पीकर चले जाना। नहीं देर हो जाएगी। कृपया निखिल को समझ नहीं आया कि वह मना क्यों नहीं कर पा रहा था। वह उसके पीछे अंदर चला गया।

हवेली के अंदर का नजारा देखकर उसकी आंखें फैल गई। संगमरमर की चमकती हुई फर्श, विशाल झूमर, महंगी पेटिंग्स और हर तरफ शाही माहौल। तभी एक नौकर तेजी से आया। मैडम साहब आपका इंतजार कर रहे हैं। अवनी का चेहरा अचानक बदल गया। उसकी मुस्कान गायब हो गई। उसने गंभीर स्वर में कहा, “मैं अभी आती हूं।” फिर वह निखिल को लेकर ऊपर चली गई। एक बड़े कमरे में पहुंचकर उसने दरवाजा बंद कर दिया।

अब निखिल असहज महसूस करने लगा। देखिए अगर कोई परेशानी है तो मैं चला जाता हूं। लेकिन अवनी अचानक कुर्सी पर बैठ गई और अगले ही पल उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। निखिल घबरा गया। क्या हुआ? अवनी ने जवाब नहीं दिया। कुछ देर बाद उसने कहा, क्या तुम किसी अजनबी की मदद करोगे? निखिल ने हैरानी से पूछा, “कैसी मदद?” अवनी ने सिर झुका लिया। ऐसी मदद जो शायद तुम्हारी जिंदगी बदल दे।” निखिल कुछ समझ नहीं पाया।

तभी कमरे के बाहर भारी कदमों की आवाज आई। फिर दरवाजे पर जोरदार दस्तक हुई। अह आवाज बहुत कठोर थी। अवनी के चेहरे का रंग उड़ गया। पापा बाहर से फिर आवाज आई। दरवाजा खुला। अवनी कांप गई। निखिल पहली बार सचमुच डर गया। कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुला। सामने लगभग 60 साल का एक प्रभावशाली व्यक्ति खड़ा था। उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। यह थे विक्रम सिंह चौहान। शहर के सबसे बड़े उद्योगपति। उनके पीछे कई लोग खड़े थे।

विक्रम सिंह ने निखिल को ऊपर से नीचे तक देखा। फिर बोले, “यह कौन है?” कमरे में सन्नाटा छा गया। निखिल कुछ बोल पाता उससे पहले अवनी ने अचानक कहा, यह वही इंसान है जिससे मैं शादी करना चाहती हूं। कमरे की हवा जैसे थम गई। निखिल के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने अवनी की तरफ देखा। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसने अभी क्या सुना है। विक्रम सिंह की आंखें क्रोध से भर गई। तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है।

अवनी ने पहली बार अपने पिता की आंखों में आंखें डालकर कहा, नहीं तो यह मजाक है। नहीं, तुम जानती भी हो यह कौन है? जानती हूं। निखिल बीच में बोल पड़ा, साहब, आप गलत समझ रहे हैं। मैं तो लेकिन अवनी ने उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे से बोली, कृपया अभी कुछ मत कहना। निखिल पूरी तरह उलझ चुका था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है।

तभी विक्रम सिंह ने गुस्से में कहा, कल तुम्हारी सगाई होने वाली है। पूरे देश के बड़े-बड़े लोग आने वाले हैं। अवनी ने जवाब दिया, “मैं सगाई नहीं करूंगी। तुम्हें करना पड़ेगा? नहीं। कमरे में तनाव बढ़ता जा रहा था। अचानक विक्रम सिंह ने एक ऐसी बात कही जिसने निखिल को और ज्यादा हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, तुम्हें सच बताने की जरूरत नहीं थी अवनी। अवनी की आंखें फैल गई। पापा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

विक्रम सिंह ने ठंडी आवाज में कहा जिस राज को हमने 25 साल छुपा कर रखा आज वह खुद सामने आ गया। निखिल को कुछ समझ नहीं आया लेकिन अवनी का चेहरा देखकर लग रहा था कि वह किसी बहुत बड़े रहस्य की बात कर रहे हैं। अगले ही पल विक्रम सिंह ने निखिल की तरफ देखा और कहा लड़के शायद तुम्हें पता नहीं है कि तुम यहां सहयोग से नहीं पहुंचे हो। निखिल स्तब्ध रह गया। क्या मतलब? विक्रम सिंह कुछ सेकंड तक उसे देखते रहे। फिर बोले क्योंकि तुम्हारा इस घर से रिश्ता आज का नहीं 25 साल पुराना है और यह सुनकर निखिल के हाथ से चाय का कप जमीन पर गिर पड़ा। निखिल को लगा जैसे कमरे की दीवारें उसके चारों तरफ घूमने लगी हो। उसने विक्रम सिंह की तरफ देखा और धीमी आवाज में पूछा। डेरा इस घर से क्या रिश्ता हो सकता है? विक्रम सिंह कुछ पल चुप रहे। अवनी की आंखों में डर था जैसे वह नहीं चाहती थी कि यह सच इस तरह सामने आए।

तभी कमरे में खड़ी एक औरत आगे आई। महंगे कपड़े, तीखा चेहरा और आंखों में घमंड। वह थी रागिनी चौहान। अवनी की सौतेली मां। उसने ताने भरी आवाज में कहा, “यह लड़का रिश्ता पूछ रहा है। इसे तो पहले अपनी औकात देखनी चाहिए। निखिल ने सिर झुका लिया। वह अपमान सहने का आदि था। लेकिन आज पहली बार उसे किसी अनजानी चोट का एहसास हुआ। अवनी तुरंत बोली, मां, इन्हें कुछ मत कहिए।

रागिनी हंस पड़ी। अभी से बचाव शुरू। इसी के लिए तुमने आर्यमान से शादी से इंकार किया। निखिल ने अवनी की तरफ देखा। आर्यमान कौन है? अवनी ने कुछ नहीं कहा। विक्रम सिंह ने गहरी सांस ली। आर्यमान महोत्रा वही आदमी जिसे कल अवनी की सगाई होनी थी। लेकिन अगर मैडम शादी नहीं करना चाहती, तो जबरदस्ती क्यों? इस बार निखिल की आवाज में डर कम और सवाल ज्यादा था।

कमरे में सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे। विक्रम सिंह ने कहा, हर रिश्ता दिल से नहीं। कभी-कभी हालात से बनता है। निखिल ने शांत स्वर में कहा, लेकिन जो रिश्ता किसी की जिंदगी तोड़ दे, वह रिश्ता नहीं सौदा होता है। अवनी ने पहली बार निखिल को अलग नजरों से देखा। उस रात पहली बार उसे लगा कि यह अनजान लड़का डरपोक नहीं है। सादा है लेकिन कमजोर नहीं।

विक्रम सिंह ने नौकरों को बाहर जाने का इशारा किया। कमरे में अब सिर्फ चार लोग रह गए। विक्रम सिंह, रागिनी, अवनी और निखिल विक्रम सिंह खिड़की के पास जाकर खड़े हो गए। बाहर बारिश अब भी हो रही थी। उन्होंने धीमे स्वर में कहना शुरू किया। 25 साल पहले मेरी एक छोटी बहन थी नंदिनी। निखिल चुप हो गया। वह इस घर की सबसे प्यारी बेटी थी। बहुत जिद्दी, बहुत सीधी और बहुत भावुक। उसने एक गरीब स्कूल शिक्षक से प्रेम विवाह कर लिया।

रागिनी ने बीच में कहा और उसी दिन इस घर की इज्जत मिट्टी में मिल गई थी। विक्रम सिंह ने उसे चुप रहने का इशारा किया। मेरे पिता ने नंदिनी को घर से निकाल दिया। मैंने भी उस समय उसका साथ नहीं दिया। मुझे लगता था कि उसने गलत किया है। लेकिन कुछ महीने बाद मुझे पता चला कि वह मां बनने वाली है। निखिल का दिल अचानक तेज धड़कने लगा। उसे पता नहीं क्यों। लेकिन हर शब्द उसके भीतर उतर रहा था। विक्रम सिंह आगे बोले। एक रात मुझे खबर मिली कि नंदिनी और उसके पति का एक्सीडेंट हो गया है। जब मैं अस्पताल पहुंचा तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नंदिनी ने मरने से पहले सिर्फ एक बात कही थी। उनकी यह आवाज भारी हो गई। मेरे बच्चे को बचा लेना। निखिल की सांस रुक गई। अवनी की आंखों में आंसू आ गए।

विक्रम सिंह ने पीछे मुड़कर निखिल को देखा। बच्चा गायब हो चुका था। निखिल ने कांपती आवाज में पूछा। गायब हर अस्पताल के रिकॉर्ड बदल दिए गए। डॉक्टर गायब हो गया और हमें बताया गया कि बच्चा जन्म के तुरंत बाद मर गया। रागिनी अचानक बेचैन हो गई। पुरानी बातें खोदने से क्या मिलेगा। विक्रम सिंह ने पहली बार गुस्से से उसकी तरफ देखा। सच मिलेगा।

कमरे में सन्नाटा छा गया। विक्रम सिंह ने जेब से एक पुरानी चैन निकाली। उस चेन में आधा टूटा हुआ लॉकेट था। यह नंदिनी के पास था। निखिल की आंखें उस लॉकेट पर टिक गई। उसका हाथ अनजाने में अपनी गर्दन की तरफ गया। उसकी कमीज के अंदर भी वैसा ही आधा लॉकेट था। अवनी ने यह देख लिया। निखिल, निखिल ने कांपते हाथों से अपना लॉकेट बाहर निकाला। दोनों टुकड़े बिल्कुल एक जैसे थे। विक्रम सिंह की आंखों में नमी भर आई। उन्होंने धीरे से दोनों टुकड़े जोड़े। लॉकेट पूरा हुआ। उस पर एक नाम लिखा था। नंदेई। निखिल की आंखों के सामने उसकी पूरी जिंदगी घूम गई। उसकी मां नहीं थी। जिसे वह मां कहता था। वह उसे मंदिर की सीढ़ियों पर मिला बच्चा बताती थी। उसके पिता हरिराम ने उसे कभी पराया महसूस नहीं होने दिया। लेकिन सच आज उसके सामने खड़ा था। मतलब बाएं।

विक्रम सिंह ने भारी आवाज में कहा, “तुम मेरी बहन के बेटे हो। निखिल पीछे हट गया। नहीं ऐसा नहीं हो सकता। अवनी उसके पास आई। निखिल यह सच हो सकता है? नहीं। निखिल चीख पड़ा। मेरे पिता हरिराम है। उन्होंने मुझे पाला है। उन्होंने भूखे रहकर मुझे खिलाया है। अगर खून का रिश्ता इतना ही बड़ा होता तो 25 साल तक कोई मुझे ढूंढने क्यों नहीं आया। विक्रम सिंह के पास कोई जवाब नहीं था। उनकी आंखें झुक गई।

निखिल ने दर्द से कहा, गरीब का बच्चा खो जाए तो शायद दुनिया उसे खोया हुआ नहीं। खत्म हुआ मान लेती है। अवनी की आंखों से आंसू बह निकले। रागिनी ने मौका देखकर कहा, बहुत हो गया यह नाटक। एक आधे लॉकेट से कोई वारिस नहीं बन जाता। तभी दरवाजे पर एक आवाज आई। लेकिन सच सिर्फ लॉकेट से साबित नहीं होगा। सबने मुड़कर देखा। दरवाजे पर एक बूढ़ा आदमी खड़ा था। सफेद बाल कांपते हाथ और आंखों में पछतावा। विक्रम सिंह चौंक गए। डॉक्टर सिंह, रागिनी का चेहरा सफेद पड़ गया। डॉक्टर सेन ने अंदर आकर कहा, मैंने 25 साल पहले बहुत बड़ा पाप किया था। निखिल उन्हें देखता रह गया। डॉक्टर सेन ने रागिनी की तरफ इशारा किया। मुझे पैसे देकर बच्चे को हटाने के लिए कहा गया था। अवनी सन्न रह गई। किसने? डॉक्टर सेन ने कांपती आवाज में कहा, रागिनी देवी ने। विक्रम सिंह गरज उठे।

आप भाग 2 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 24 मिनट

भाग 2

रागिनी रागिनी ने घबराकर कहा, झूठ है। सब झूठ है। डॉक्टर सेन रो पड़े। मैंने बच्चे को मारने की हिम्मत नहीं की। इसलिए उसे मंदिर की सीढ़ियों पर छोड़ आया। सोचा कोई भला इंसान उसे अपना लेगा। निखिल की आंखें भर आई। उसे हरिराम याद आए। वही भला इंसान वही गरीब आदमी जिसने किसी और के बच्चे को अपनी जान से बढ़कर पाला। विक्रम सिंह टूटकर कुर्सी पर बैठ गए। मैंने अपनी बहन को खो दिया और उसके बच्चे को भी।

रागिनी अब भी खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी। मैंने जो किया इस घर के लिए यह किया। अगर वह बच्चा आ जाता तो संपत्ति का बंटवारा होता। अवनी का भविष्य खतरे में पड़ता। अवनी ने दर्द से कहा, मेरे भविष्य के नाम पर आपने किसी बच्चे की पूरी जिंदगी छींची। रागिनी चुप हो गई। तभी नीचे से शोर सुनाई दिया। आर्यमान मल्होत्रा अपने पिता के साथ हवेली में पहुंच चुका था। सगाई की तैयारी टूटने वाली थी।

लेकिन असली तूफान अभी बाकी था। आर्यमान ने कमरे में आते ही निखिल को देखा। उसने हंसते हुए कहा तो यही है वह गरीब मैकेनिक जिसके लिए अवनी मुझे ठुकरा रही है। निखिल ने शांत होकर कहा मैं किसी को पाने नहीं आया था। मैं तो सिर्फ बारिश में मदद करने आया था। आर्यमान ने ताली बजाई। वाह! गरीब आदमी की ईमानदारी वाली कहानी। अवनीय आगे बढ़ी। बस कीजिए आर्यमान।

आर्यमान का चेहरा बदल गया। तुम्हें लगता है मैं तुमसे प्यार करता हूं। मुझे तो सिर्फ चौहान ग्रुप चाहिए। तुम बस रास्ता हो। विक्रम सिंह ने पहली बार आर्यमान का असली चेहरा देखा तो यह तुम्हारा सच है। आर्यमान मुस्कुराया। सच यह है कि आपके बिजनेस पर गर्ज है। मेरी कंपनी के बिना आप डूब जाएंगे और अवनी से मेरी शादी नहीं हुई तो कल सुबह तक आपकी सारी डील्स खत्म। विक्रम सिंह चुप रह गए।

निखिल ने समझ लिया कि अवनी किस मजबूरी में थी। उसने धीरे से कहा तो आप लोग इंसानों से नहीं। सौदों से रिश्ते बनाते हैं। आर्यमान ने गुस्से से निखिल का कॉलर पकड़ लिया। तू ज्यादा बोलेगा। निखिल ने उसका हाथ हटाया। हाथ मत लगाइए। आर्यमान ने थप्पड़ उठाया। लेकिन अवनी बीच में आ गई। अगर इन्हें हाथ लगाया तो मैं अभी पुलिस बुलाऊंगी। आर्यमान ने हंसकर कहा, तुम कुछ नहीं कर पाओगी।

तभी निखिल का फोन बजा कॉल उसके पड़ोसी का था। निखिल ने फोन उठाया। दूसरी तरफ से आवाज आई। निखिल बेटा जल्दी आजा। हरेराम काका की तबीयत बहुत बिगड़ गई है। निखिल के हाथ कांप गए। उसने किसी की तरफ नहीं देखा। बस दरवाजे की तरफ भागा। अवनी ने उसे पुकारा। निखिल वह रुका। अवनी ने कहा, “मैं भी चलूंगी।” रागिनी ने ताना मारा। चौहान परिवार की बेटी उस झोपड़ी में जाएगी।

अवनी ने पहली बार दृढ़ आवाज में कहा था क्योंकि वहां इंसानियत रहती है। निखिल ने कुछ नहीं कहा। दोनों बारिश में बाहर निकल गए। हवेली पीछे छूट गई। रात, बारिश और सच तीनों अब उनके साथ थे। जब वे निखिल के छोटे से घर पहुंचे तो हरिराम बिस्तर पर लेटे थे। उनकी सांसे भारी थी। निखिल उनके पैरों के पास बैठ गया। बाबा हरिराम ने आंखें खोली। आगे आ बेटा। निखिल रो पड़ा। बाबा आपने मुझे मंदिर से उठाया था। हरे राम की आंखों में एक पुरानी पीड़ा तैर गई। उन्होंने कांपते हाथ से निखिल का चेहरा छुआ। हां बेटा। लेकिन उस दिन मैंने बच्चा नहीं उठाया था। मैंने अपनी जिंदगी उठा ली थी। निखिल फूट कर रो पड़ा। आप ही मेरे पिता हैं। हरे राम मुस्कुराए। खून से रिश्ता शुरू होता है बेटा। लेकिन पालन से रिश्ता अमर होता है। अवनी दरवाजे पर खड़ी यह सब सुन रही थी। उसके मन में निखिल के लिए सम्मान और गहरा हो गया।

हरिराम ने अवनी की तरफ देखा। बिटिया मेरा बेटा गरीब है। लेकिन इसका दिल बहुत अमीर है। इसे कभी अपने घर की दीवारों में कैद मत करना। अवनीय की आंखें भर आई। मैं वादा करती हूं। तभी निखिल ने अवनीय की तरफ देखा। आपने हवेली में मेरा नाम क्यों लिया था? अवनी कुछ पल चुप रही। फिर बोली क्योंकि मुझे एक झूठ से बचने के लिए एक सच की जरूरत थी और उस रात तुम सबसे सच्चे इंसान लगे।

निखिल ने कहा लेकिन मैं तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा कैसे बन सकता हूं। अवनी ने धीमी आवाज में कहा, शायद जिंदगी ने हमें हिस्सा बनने के लिए नहीं। एक दूसरे को सच तक पहुंचाने के लिए मिलाया है। बाहर बारिश धीरे-धीरे थमने लगी थी। लेकिन निखिल की जिंदगी में उठे सवाल अभी थमे नहीं थे। सुबह होते-होते पूरा शहर जान चुका था कि चौहान हवेली में सगाई टूट गई है और एक गरीब मैकेनिक को चौहान परिवार का खोया हुआ वारिस बताया जा रहा है।

अब हर नजर निखिल पर थी। हर रिश्ता बदलने वाला था और हर दुश्मन जागने वाला था। सुबह का सूरज निकला तो देवगढ़ शहर में सिर्फ एक ही चर्चा थी। चौहान परिवार का खोया हुआ वारिस मिल गया था। अखबारों में खबर छपी। टीवी चैनलों पर बहस होने लगी। सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे। लेकिन जिस इंसान की जिंदगी सबसे ज्यादा बदल गई थी, वह खुद सबसे ज्यादा परेशान था। निखिल कल तक वह एक साधारण मैकेनिक था। आज अचानक लोग उसे करोड़ों की संपत्ति का उत्तराधिकारी बता रहे थे, लेकिन उसे इनमें से किसी बात की खुशी नहीं थी। उसके मन में सिर्फ एक चिंता थी। हरे राम। जिस बूढ़े आदमी ने उसे पाला था, जिसने कभी उसे यह महसूस नहीं होने दिया कि वह उसका सगा बेटा नहीं है। निखिल पूरे दिन उनके पास बैठा रहा।

दोपहर को हरिराम ने उसे पास बुलाया। बेटा एक बात पूछूं। जी बाबा अगर तुझे कल यह सब पता चल जाता और मैं जिंदा नहीं होता तो क्या तू मुझे भूल जाता? निखिल की आंखें भर आई। उसने तुरंत उनका हाथ पकड़ लिया। ऐसी बात मत कीजिए। हरेराम मुस्कुराए। जवाब दे। निखिल ने रोते हुए कहा, “ज आदमी ने मुझे चलना सिखाया, मैं उसे कैसे भूल सकता हूं?” हरिराम की आंखों में संतोष उतर आया। उन्होंने धीरे से कहा, बस यही सुनना था।

उसी समय बाहर कुछ गाड़ियों के रुकने की आवाज आई। विक्रम सिंह आए थे। साथ में उनके वकील और कुछ लोग भी थे। निखिल बाहर निकला। विक्रम सिंह कुछ पल उसे देखते रहे। फिर बोले, क्या मैं अंदर आ सकता हूं? निखिल ने सिर हिला दिया। विक्रम सिंह हरिराम के पास पहुंचे। कुछ क्षण तक दोनों चुप रहे। फिर विक्रम सिंह अचानक उनके पैरों में झुक गए। कमरे में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। मुझे माफ कर दीजिए।

हरिराम घबरा गए। अरे साहब यह क्या कर रहे हैं? विक्रम सिंह की आंखों में आंसू थे। जिस बच्चे को मैं नहीं बचा पाया उसे आपने आदमी बना दिया। हरिराम कुछ नहीं बोले क्योंकि कई बार सम्मान शब्दों से नहीं खामोशी से स्वीकार किया जाता है। कुछ देर बाद वकील ने एक फाइल निकाली। सर दस्तावेज तैयार हैं। निखिल समझ गया। यह संपत्ति के कागज होंगे।

विक्रम सिंह ने फाइल उसकी तरफ बढ़ाई। यह सब तुम्हारा है। निखिल ने फाइल खोली। कई पन्ने थे। कंपनियां, जमीनें, शेयर, होटल, फैक्ट्रियां, अरबों की संपत्ति। उसने फाइल बंद कर दी। मुझे नहीं चाहिए। कमरे में सन्नाटा छा गया। वकील चौंक गया। विक्रम सिंह भी, क्या मतलब? मतलब मुझे यह सब नहीं चाहिए। लेकिन यह तुम्हारा अधिकार है। निखिल ने शांत स्वर में कहा, अधिकार और लालच में फर्क होता है। विक्रम सिंह उसे देखते रह गए। निखिल आगे बोला, “मैं गरीब जरूर हूं, लेकिन भूखा नहीं हूं। मैंने जिंदगी में मेहनत करके खाना सीखा है तो तुम कुछ नहीं लोगे।” लूला क्या?

निखिल ने कहा, अपनी मां की यादें। कमरे में फिर खामोशी छा गई। विक्रम सिंह की आंखें भर आई। उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि उनके सामने खड़ा लड़का सिर्फ खून से नहीं चरित्र से भी उनकी बहन का बेटा है। उधर रागिनी चौहान की मुश्किलें बढ़ती जा रही थी। डॉक्टर सेन का बयान पुलिस तक पहुंच चुका था। पुराने रिकॉर्ड फिर से खोले गए। कई गवाह सामने आने लगे। जिस सच को 25 साल तक दबाया गया था, वह अब बाहर आ चुका था।

रागिनी लगातार खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर झूठ के सामने एक नया सबूत खड़ा हो जाता। कुछ दिनों बाद पुलिस उसे पूछताछ के लिए ले गई। जाते समय उसने अवनी को देखा। मैंने यह सब तुम्हारे लिए नहीं किया था। अवनी की आंखों में दर्द था। नहीं आपने यह सब अपने लिए किया था। रागिनी के पास कोई जवाब नहीं बचा। वह चली गई और पहली बार चौहान हवेली का माहौल हल्का महसूस हुआ।

लेकिन असली खतरा अभी खत्म नहीं हुआ था। आर्यमान मल्होत्रा हार मानने वालों में से नहीं था। सगाई टूटने के बाद उसका गुस्सा और बढ़ गया था। उसने चौहान ग्रुप के खिलाफ अपनी सारी व्यासायिक ताकत लगा दी। बैंक दबाव डालने लगे। निवेशक पीछे हटने लगे। कंपनी के शेयर गिरने लगे। विक्रम सिंह परेशान रहने लगे। एक शाम अवनी हवेली की बालकनी में खड़ी थी।

तभी निखिल वहां आया। अंकल परेशान है। अवनी ने सिर हिलाया। कर्ज कितना है? बहुत ज्यादा। निखिल कुछ देर सोचता रहा। फिर बोला समस्या कर्ज नहीं है। तू क्या है? लोगों का भरोसा। अवनी ने हैरानी से उसकी तरफ देखा। निखिल मुस्कुराया। गैराज में काम करते हुए एक बात सीखी है। मशीन टूटती नहीं। लोग उसे छोड़ देते हैं। अगले दिन निखिल ने विक्रम सिंह से बात की। उसने कंपनी के पुराने कर्मचारियों से मुलाकात की। फैक्ट्री में गया। मजदूरों से बात की। उनकी समस्याएं सुनी। पहली बार किसी मालिक के परिवार का सदस्य उनके बीच बैठा था।

धीरे-धीरे लोग उसके साथ जुड़ने लगे क्योंकि वह आदेश नहीं देता था। सुनता था। यही उसकी ताकत थी। कुछ महीनों में कंपनी की हालत सुधरने लगी। नई योजनाएं शुरू हुई। पुराने कर्मचारी वापस लौटे और सबसे बड़ी बात लोगों का भरोसा वापस आने लगा। आर्यमान की कई चाले असफल होने लगी। एक दिन शहर के बड़े व्यापार सम्मेलन में आर्यमान और निखिल आमने-सामने आ गए।

आर्यमान हंसा तो मैकेनिक साहब अब उद्योगपति बन गए। निखिल मुस्कुराया। नहीं आज भी मैकेनिक हूं। कैसे बस इतना है कि पहले मशीनें ठीक करता था। अब रिश्ते ठीक करता हूं। आसपास खड़े लोग मुस्कुरा दिए। आर्यमान का चेहरा उतर गया। उसे पहली बार समझ आया कि पैसा हमेशा सम्मान नहीं खरीद सकता। समय बीतता गया। हरिराम की तबीयत कभी बेहतर होती, कभी बिगड़ती लेकिन उनके चेहरे पर हमेशा सुकून रहता।

एक शाम उन्होंने निखिल और अवनी दोनों को अपने पास बुलाया। तुम दोनों खुश हो। दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा। फिर मुस्कुरा दिए। हरिराम ने कहा, “मुझे एक बात पहले ही समझ आ गई थी। क्या बाबा? भगवान कुछ लोगों को खून के रिश्ते देने में देर कर देता है ताकि वे पहले दिल के रिश्ते बनाना सीख जाएं। अवनी की आंखें भर आई। निखिल चुप हो गया।

कुछ दिन बाद हरिराम हमेशा के लिए इस दुनिया से चले गए। उनकी अंतिम यात्रा में पूरा शहर शामिल हुआ। गरीब भी, अमीर भी, मजदूर भी, व्यापारी भी क्योंकि उन्होंने जीवन में सिर्फ एक काम किया था। एक अनजान बच्चे को अपना नाम दिया था और कभी बदले में कुछ नहीं मांगा। उनकी चिता के सामने खड़े होकर निखिल ने एक वचन लिया, मैं आपकी अच्छाई को कभी मरने नहीं दूंगा।

एक साल बाद देवगढ़ बदल चुका था। चौहान ग्रुप फिर से मजबूत हो गया था। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव कुछ और था। शहर के बीचोंबीच एक विशाल भवन बना था। उस पर लिखा था हरिराम जीवन केंद्र यह उन बच्चों के लिए था जिनका कोई अपना नहीं था। जिन्हें जिंदगी ने अकेला छोड़ दिया था। निखिल ने अपनी विरासत का बड़ा हिस्सा इसी काम में लगा दिया। उद्घाटन के दिन पूरा शहर मौजूद था। विक्रम सिंह की आंखों में गर्व था। अवनी के चेहरे पर मुस्कान थी और निखिल के दिल में शांति।

कार्यक्रम खत्म होने के बाद अवनीय उसके पास आई। एक बात पूछूं कुछ अगर उस रात बारिश में मेरी कार खराब नहीं होती तो निखिल हंस पड़ा तो शायद मैं आज भी गैराज में होता और मैं शायद किसी ऐसी जिंदगी में होती जो तुम्हारी नहीं थी। दोनों कुछ पल चुप रहे। फिर अवनी ने धीरे से कहा, “मुझे लगता है भगवान ने उस रात सिर्फ कार नहीं रोकी थी।” फिर क्या रुका था? अवनी मुस्कुराई। दो अधूरी जिंदगियों को टकराने से पहले भटकने से रोका था।

निखिल ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में वही सच्चाई थी जो पहली रात थी। लेकिन अब डर नहीं था। सिर्फ भरोसा था। उसी शाम उसी शहर में जहां कभी एक अनजान लड़की बारिश में खड़ी थी। दो लोग एक नई शुरुआत की तरफ बढ़ रहे थे। एक को परिवार मिल गया था। दूसरे को अपना रास्ता और दोनों को वह घर मिल गया था जिसकी तलाश उन्हें हमेशा से थी।

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