Poor Man Found to be Rich

फटे कपड़ों में एयरपोर्ट पहुंचा आदमी, 10 मिनट में रोक दिया पूरा कारोबार

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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

क्या होगा जब आप किसी को उसकी औकात देखकर आंक लेते हैं…
और बाद में पता चलता है कि वही इंसान आपकी पूरी दुनिया बदल सकता है?

यह कहानी है शिवम की — एक ऐसा आदमी जिसे सबने गरीब समझकर ठुकरा दिया,
एयरपोर्ट पर उसका मजाक उड़ाया गया, उसे रोका गया, अपमानित किया गया।

लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि वही इंसान कुछ ही मिनटों में एक पूरी एयरलाइन बंद कर सकता है…
और एक डूबती हुई कंपनी को फिर से खड़ा कर सकता है।

इस कहानी में आपको मिलेगा
इमोशन, धोखा, पावर, बदला और एक ऐसा सच जो आखिरी तक आपको बांधे रखेगा।

अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जो दिल और दिमाग दोनों को छू जाएं,
तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें।

पढ़ना शुरू करें ↓
आप भाग 1 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 22 मिनट

शहर में उस दिन बारिश कुछ ज्यादा ही तेज थी। सड़कों पर पानी की पतली परत चमक रही थी और लोग जल्दी-जल्दी अपने काम में लगे हुए थे। हर किसी को बस अपनी मंजिल तक पहुंचना था। किसी को भी किसी और से मतलब नहीं था। भीड़ के बीच एक आदमी भी था जो बाकी लोगों से बिल्कुल अलग दिख रहा था। उसके कपड़े भीगे हुए थे। पैरों में टूटी चप्पल थी और चेहरे पर थकान के साथ एक अजीब सी बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। वह तेजी से भाग रहा था। जैसे समय उसके हाथ से फिसलता जा रहा हो और अगर वह अभी नहीं पहुंचा तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। उसका नाम शिवम था।

जब वह एयरपोर्ट के गेट तक पहुंचा तो सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत रोक लिया। रुको कहां जा रहे हो? एक गार्ड ने उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा, शिवम ने हांते हुए जवाब दिया, “मेरी उड़ान है। आधे घंटे में मुझे अंदर जाना है। बहुत जरूरी है। गार्ड ने हंसते हुए दूसरे गार्ड की तरफ देखा। फिर शिवम की तरफ मुड़कर बोला तू और उड़ान कभी अपने आप को आईने में देखा है? पास खड़े कुछ लोग भी मुस्कुराने लगे। किसी ने धीरे से कहा आजकल हर कोई कुछ भी बन जाता है। शिवम ने अपने हाथ जोड़ लिए। उसकी आवाज में घबराहट थी लेकिन साथ ही एक सच्चाई भी थी जिसे कोई समझना नहीं चाहता था।

कृपया मुझे जाने दीजिए। मेरा टिकट अंदर है। मेरे मैनेजर के पास है। गार्ड का चेहरा सख्त हो गया। उसने शिवम को हल्का सा धक्का देते हुए कहा, यहां कोई बस अड्डा नहीं है कि कोई भी उठकर अंदर चला जाए। चलो यहां से निकलो। शिवम लड़खड़ा कर पीछे गिर पड़ा। बारिश का पानी उसके कपड़ों से होकर जमीन पर फैल गया। वह उठने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसके आसपास खड़े लोग बस देख रहे थे। किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया। उस पल में उसे साफ महसूस हुआ कि इस शहर में गिरना आसान है। लेकिन उठाना किसी को नहीं आता।

वह फिर से खड़ा हुआ और एक बार फिर कोशिश करने लगा। मेरी बात सुन लीजिए। सिर्फ एक बार मुझे अंदर जाना ही होगा। तभी एक चमकदार काली गाड़ी एयरपोर्ट के सामने आकर रुकी। गाड़ी का दरवाजा खुला और बाहर उतरी एक लड़की उसके चलने का अंदाज ही बता रहा था कि वह इस जगह की आम व्यक्ति नहीं है। वह थी दृष्टि। शहर के सबसे बड़े उद्योगपति परिवार की बेटी। आत्मविश्वास उसके चेहरे पर साफ दिखाई देता था और उसके आसपास खड़े लोग खुद ब खुद रास्ता छोड़ देते थे। उसकी नजर शिवम पर पड़ी। वह एक पल के लिए रुकी जैसे कुछ पहचानने की कोशिश कर रही हो।

लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर सख्ती आ गई। तुम यहां क्या कर रहे हो? उसने सीधा सवाल किया। शिवम ने उसे देखा। जैसे उसे अचानक कोई सहारा मिल गया हो। मुझे अमेरिका जाना है। बहुत जरूरी है। यह लोग मुझे अंदर नहीं जाने दे रहे। दृष्टि ने हल्की सी हंसी छोड़ी। अमेरिका उसने तिरस्कार से कहा, तुम्हें अमेरिका की स्पेलिंग भी आती है। भीड़ में फिर से हंसी गूंजी। शिवम चुप रहा। उसके पास जवाब था। लेकिन वह जवाब देने की स्थिति में नहीं था। वह सिर्फ मदद चाहता था। किसने करवाई तुम्हारी टिकट?

दृष्टि ने फिर पूछा या फिर बस सपना देखिए। शिवम ने धीमी आवाज में कहा। कृपया मेरी मदद कर दो। दृष्टि का चेहरा और ठंडा हो गया। उसने एक कदम पीछे लिया। मुझे छूने की कोशिश मत करना। उसने सख्ती से कहा और यहां कोई तमाशा मत करना। मुझे यहां किसी तरह की परेशानी नहीं चाहिए। उसके शब्द सीधे शिवम के दिल में उतर गए। वह वही लड़की थी जिसे उसने कभी अलग समझा था।

कुछ साल पहले की बात उसके दिमाग में ताजा हो गई। एक अस्पताल का कमरा जहां उसकी मां इलाज के लिए भरती थी। वहीं उसने पहली बार दृष्टि को देखा था। वह रोज आती थी। मरीजों से बात करती थी। उन्हें हिम्मत देती थी। उस दिन उसने उसकी मां का हाथ पकड़ा था और मुस्कुराकर कहा था कि सब ठीक हो जाएगा। उस एक पल ने शिवम को बदल दिया था। उसे लगा था कि यह लड़की बाकी लोगों जैसी नहीं है।

उसने पहली बार किसी अमीर इंसान में इंसानियत देखी थी। लेकिन आज वही लड़की उसके सामने खड़ी थी और उसे पहचानने से भीख इंकार कर रही थी। वह कुछ बोलने ही वाला था कि तभी एक तेज आवाज आई। शिवम साहब सबकी नजर उस दिशा में गई। एक व्यक्ति तेजी से उनकी तरफ आ रहा था। वह था नितिन रायजादा।

उसका नाम शहर में इतना बड़ा था कि लोग उसे देखते ही सम्मान में खड़े हो जाते थे। लेकिन वह सीधे शिवम के पास आकर रुका। आप यहां क्या कर रहे हैं? हम आपको ढूंढ रहे थे। उसने चिंतित होकर कहा, दृष्टि और उसके साथ खड़ा ऋषभ दोनों चौंक गए। उनके चेहरे पर साफ लिखा था कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि यह क्या हो रहा है। नितिन ने बिना समय गवाए शिवम का हाथ पकड़ा और कहा, जल्दी आइले। समय बहुत कम है और वह उसे अंदर ले गया जैसे वह कोई आम आदमी नहीं बल्कि कोई बहुत जरूरी व्यक्ति हो।

दृष्टि वही खड़ी रह गई। उसके दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था कि आखिर यह आदमी है कौन? अंदर पहुंचते ही शिवम तेजी से आगे बढ़ा। उसका प्रबंधक पहले से उसका इंतजार कर रहा था। यह रही आपकी टिकट और आपका फोन। जल्दी गेट नंबर तीन पर पहुंचिए। उसने कहा, शिवम ने बिना कुछ कहे टिकट ली और दौड़ पड़ा। लेकिन जैसे ही वह गेट के पास पहुंचा, अचानक एक आदमी उससे टकरा गया।

अंधा है क्या? सामने वाले ने गुस्से में कहा। शिवम तुरंत संभाला पर बोला मुझसे गलती हो गई। मैं जल्दी में था। आदमी ने उसे घूरते हुए कहा, तुझे पता भी है तू किससे टकराया है। पास खड़े एक आदमी ने धीरे से कहा, “यह उसके एयरलाइन का मालिक है।” शिवम ने तुरंत हाथ जोड़ दिए।

कृपया मुझे जाने दीजिए। मेरी उड़ान छूट जाएगी। उस आदमी ने उसकी टिकट छीन ली और उसे देखते हुए मुस्कुराया। तू उड़ान भरेगा। उसने कहा और अगले ही पर टिकट के टुकड़े कर दिए। कागज के छोटे-छोटे टुकड़े जमीन पर गिरते रहे। कुछ सेकंड के लिए सब शांत हो गया।

शिवम नीचे झुका। उसने उन टुकड़ों को देखा। फिर धीरे-धीरे खड़ा हो गया। उसकी आंखों में अब डर नहीं था। उसने जेब से फोन निकाला और एक नंबर मिलाया। 10 मिनट। उसने बस इतना कहा और फोन काट दिया।

सामने वाला आदमी हंसने लगा। क्या करेगा तू 10 मिनट में? शिवम ने कोई जवाब नहीं दिया।

ठीक 10 मिनट बाद पूरे एयरपोर्ट में घोषणा हुई कि उस एयरलाइन की सभी उड़ाने तुरंत बंद कर दी गई हैं। सामने खड़ा आदमी सन्न रह गया। उसके चेहरे से रंग उड़ गया। यह कैसे हो सकता है? उसने बड़बड़ाते हुए कहा।

शिवम ने उसकी तरफ देखा और शांत आवाज में कहा, “तुमने मेरी टिकट फाड़ी थी। अब मैंने तुम्हारा पूरा कारोबार रोक दिया। उस आदमी के पास कोई जवाब नहीं था। तभी शिवम का फोन बजा। उधर से आवाज आई। अब आपको आने की जरूरत नहीं है। जिस व्यक्ति के लिए आप जा रहे थे। वह अब सुरक्षित है। शिवम ने आंखें बंद की और गहरी सांस ली। उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति आ गई। वह बिना कुछ कहे वहां से वापस मुड़ गया।

उस दिन किसी को समझ नहीं आया कि वह कौन था और उसने यह सब कैसे किया। लेकिन एक बात साफ थी जिसे सब ने एक भिखारी समझकर ठुकरा दिया था। वह कोई साधारण आदमी नहीं था और उसकी असली कहानी अभी शुरू ही हुई थी। एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय शिवम के चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। जैसे जो काम उसे करना था, वह पूरा हो चुका हो। बारिश अब हल्की पड़ चुकी थी, लेकिन उसके अंदर जो तूफान चल रहा था, वह किसी को दिखाई नहीं दे रहा था। वह सीधे अपनी गाड़ी में बैठा और बिना पीछे देखे निकल गया। उधर एयरपोर्ट के बाहर खड़ी दृश्य अब भी वही खड़ी थी। उसने अपनी जिंदगी में बहुत बड़े-बड़े लोगों को देखा था।

उनके साथ काम किया था। लेकिन आज जो हुआ था, उसने उसके सोचने का तरीका ही बदल दिया था। जिस आदमी को उसने कुछ देर पहले अपमानित किया था, वही आदमी कुछ मिनटों में एक पूरी एयरलाइन को बंद करवा सकता था। उसने धीरे से ऋषभ की तरफ देखा। तुमने देखा उसकी आवाज में पहली बार हल्की घबराहट थी।

ऋषभ ने खुद को संभालते हुए कहा, कुछ तो गड़बड़ है। या तो वह आदमी कोई बड़ा खेल खेल रहा है या फिर हम उसे समझ नहीं पाए।

दृष्टि चुप रही। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल घूम रहा था। अगर वह सच में इतना बड़ा आदमी है तो फिर उस हालत में वहां क्यों था? शिवम सीधे नारंग मेंशन पहुंचा।

जैसे ही वह अंदर दाखिल हुआ, घर के नौकरों ने उसे उसी नजर से देखा जैसे हमेशा देखते थे। उनके लिए वह बस एक घर जमाई था जो इस घर में किसी बोझ की तरह रह रहा था। उसने बिना कुछ कहे अपना गीला शर्ट बदला और सीधे रसोई में चला गया। वह दृष्टि के लिए खाना तैयार करने लगा। उसके हाथों की आदतें बहुत पुरानी थी। साधारण जिंदगी ने उसे सिखाया था कि काम करने में कोई शर्म नहीं होती। लेकिन उस काम के पीछे आज कुछ और भी छिपा था जो कोई नहीं देख पा रहा था।

उसी समय शहर के हर बड़े व्यापारिक कार्यालय में एक ही खबर चल रही थी। नारंग इन स्ट्रीज को बड़ा झटका। समाचार में बताया जा रहा था कि कंपनी को जो बड़ा ठेका मिलने वाला था, वह अचानक किसी दूसरी कंपनी को दे दिया गया था। इसके बाद निवेशकों ने भी अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। नारंग इन स्ट्रीज धीरे-धीरे डूबने लगी थी। दृष्टि अपने कार्यालय में बैठी थी। उसके सामने फाइलों का ढेर लगा हुआ था। लेकिन उसकी नजर कहीं और थी। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम बर्बाद हो जाएंगे। उसके सहयोगी मोहित ने कहा, दृष्टि ने सिर झुका लिया। उसकी आंखों में पहली बार डर दिखाई दे रहा था। नहीं, उसने धीरे से कहा, “मैं ऐसा नहीं होने दूंगी।” उसके दादाजी ने इस कंपनी को खड़ा किया था। उसने बचपन से देखा था कि किस तरह मेहनत से यह साम्राज्य बना था। वह इसे खत्म होते हुए नहीं देख सकती थी। लेकिन इस बार समस्या बहुत बड़ी थी और उसके पास कोई रास्ता नहीं था।

उसी समय कार्यालय के बाहर हलचाल हुई। शिवम अंदर आ चुका था। सभी कर्मचारी उसे देखकर हैरान हो गए। किसी को समझ नहीं आया कि वह यहां क्यों आया है। तुम यहां क्या कर रहे हो? एक कर्मचारी ने गुस्से में कहा। शिवम ने बिना किसी जवाब के सीधे बैठक कक्ष की तरफ कदम बढ़ा दिए। अंदर एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी। जैसे ही दरवाजा खुला, सबकी नजरें उसकी तरफ उठ गई। यहां क्या कर रहा है? ऋषभ गुस्से में खड़ा हो गया। इसे बाहर निकालो। उसने सुरक्षाकर्मियों को आदेश दिया लेकिन शिवम वहीं खड़ा रहा। उसने शांत आवाज में कहा, “मुझे दृष्टि से बात करनी है।” तभी दृष्टि ने उसकी तरफ देखा। उसके चेहरे पर गुस्सा था। लेकिन कहीं ना कहीं उसके अंदर एक जिज्ञासा भी थी। यह समय नहीं है। उसने कहा, “मैं बहुत जरूरी बैठक में हूं।” शिवम ने पहली बार थोड़ा जोर देकर कहा, यही सही समय है। कमरे में खामोशी छा गई। ऋषभ ने फिर से चिल्लाकर कहा, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहां आने की? तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति बोले पहले इसकी बात सुन लेते हैं। वह थे राजा काका जो इस कंपनी के पुराने सलाहकार थे। दृष्टि ने कुछ पल सोचा फिर कहा ठीक है बोलो।

आप भाग 2 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 22 मिनट

शिवम ने कमरे में मौजूद सभी लोगों की तरफ देखा। फिर बोला कंपनी को बचाया जा सकता है। सभी लोग एक दूसरे की तरफ देखने लगे। ऋषभ हंस पड़ा। तुम बचाओगे। तुम जानते भी हो यह कंपनी किस हालत में है? शिवम ने उसकी तरफ देखा। लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। उसने सिर्फ इतना कहा मुझे कंपनी के निवेशकों की सूची और हिसाब देखना होगा। कमरे में फिर से शोर मच गया। यह पागल हो गया है। किसी ने कहा इसे बाहर निकालो। ऋषभ ने गुस्से में कहा। लेकिन इस बार दृष्टि ने उसे रोका। शांत रहो। उसने सख्त आवाज में कहा। सब चुप हो गए। दृष्टि ने शिवम की आंखों में देखा। वहां कुछ ऐसा था जो उसने पहले कभी नहीं देखा था। अगर मैं तुम्हें यह सब दिखाऊं तो तुम क्या करोगे? उसने पूछा। शिवम ने बिना झिझक जवाब दिया। मैं इस कंपनी को डूबने से बचा दूंगा। कमरे में बैठे लोग फिर से हंस पड़े। लेकिन पृष्टि ने इस बार हंसी नहीं उड़ाई। उसने लैपटॉप उसकी तरफ बढ़ा दिया। देखो उसने कहा शिवम ने कुछ मिनट तक चुपचाप सब देखा।

उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। लेकिन उसकी आंखें तेजी से हर जानकारी को पड़ रही थी। फिर उसने सिर उठाया। समस्या यहां है। उसने एक जगह इशारा करते हुए कहा। सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे। निवेशक एक पैटर्न में पैसा निकाल रहे हैं। यह सामान्य नहीं है। किसी ने जानबूझकर यह खेल शुरू किया है। कमरे में सन्नाटा छा गया। तुम कहना क्या चाहते हो? दृष्टि ने पूछा। शिवम ने धीरे से कहा। किसी अंदर के आदमी का हाथ है। इसमें ऋषभ का चेहरा एक पल के लिए बदल गया। लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाल लिया। यह बेवकूफ ही है। उसने कहा, तुम्हें कुछ नहीं पता। शिवम ने उसकी तरफ देखा। फिर नजरें हटा ली। कंपनी को बचाने का सिर्फ एक तरीका है। उसने कहा, सभी शेयर वापस खरीदने होंगे।

कमरे में बैठे सभी लोग फिर से हंस पड़े। इतना पैसा कहां से आएगा? मोहित ने पूछा। शिवम ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने सिर्फ फोन निकाला और एक नंबर मिलाया। 500 करोड़ तुरंत ट्रांसफर करो। उसने शांत आवाज में कहा। कमरे में बैठे लोगों के चेहरे जम गए। कुछ ही सेकंड बाद मोहित के लैपटॉप पर नोटिफिकेशन आया। उसने कांपते हुए कहा, “पैसा आ गया है। अब किसी के पास हंसने की हिम्मत नहीं थी। दृष्टि खड़ी रह गई। उसकी आंखों में अब सिर्फ एक सवाल था। तुम हो कौन? शिवम ने उसकी तरफ देखा। लेकिन इस बार भी उसने जवाब नहीं दिया।

उसी रात शिवम अपने कमरे में अकेला बैठा था। उसने अपनी जेब से एक छोटा सहारा पत्थर निकाला। उस पत्थर में हल्की सी चमक थी। उसने उसे अपनी मुट्ठी में बंद किया और आंखें बंद कर ली। कुछ ही सेकंड में पत्थर उसके हाथ में राख बन गया। उसने धीरे से अपनी आंखें खोली। अब समय आ गया है। उसने खुद से कहा लेकिन उसी समय उसका फोन बजा। तुरंत अस्पताल आओ। उधर से आवाज आई। दृष्टि के पिता घायल है और स्थिति बहुत खराब है। शिवम तुरंत उठ खड़ा हुआ। उसकी आंखों में अब शांति नहीं थी। इस बार वहां सिर्फ एक चीज थी। क्रोध और उसे अब रोकना किसी के बस में नहीं था और सब कुछ बदल गया।

रात का समय था। लेकिन शहर के सबसे बड़े अस्पताल के बाहर असामान्य भीड़ लगी हुई थी। एंबुलेंस की आवाजें, भागते हुए लोग और तनाव से भरा माहौल साफ बता रहा था कि अंदर कुछ गंभीर हुआ है। शिवम तेजी से अंदर दाखिल हुआ। उसके कदमों में अब कोई हड़बड़ी नहीं थी। लेकिन हर कदम में एक ठहराव और एक दबा हुआ गुस्सा साफ महसूस हो रहा था। वह सीधे उस कमरे की तरफ बढ़ा जहां दृष्टि के पिता को भर्ती किया गया था। जैसे ही उसने दरवाजा खोला, अंदर का दृश्य देखकर कुछ पल के लिए वह भी शांत खड़ा रह गया। दृष्टि कुर्सी पर बैठी थी। उसकी आंखें सूझी हुई थी। उसकी मां बार-बार रोते हुए कुछ कह रही थी और बिस्तर पर लेटे हुए उसके पिता दर्द से कराह रहे थे। कमरे में एक और व्यक्ति खड़ा था। कर उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। जैसे उसे इस पूरे हालात में भी मजा आ रहा हो। जैसे ही उसने शिवम को अंदर आते देखा, वह हल्का सा हंसा। आ गए तुम भी। उसने तंज कसते हुए कहा, “अब क्या कर लोगे?” शिवम ने कोई जवाब नहीं दिया। वह सीधे बिस्तर के पास गया और दृष्टि के पिता को ध्यान से देखा। चोट कहां लगी है? उसने शांत आवाज में पूछा। दृष्टि ने पहली बार उसकी तरफ देखा। उसके अंदर डर और भरोसा दोनों एक साथ थे। फैक्ट्री में झगड़ा हो गया था। उसने धीमे से कहा, मजदूरों को भड़का दिया गया था।

शिवम ने बिना कुछ कहे सिर हिलाया। वह समझ चुका था कि यह सब किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं था। बल्कि एक सोची समझी चाल थी और यह सब किसने किया। उसने सीधे करण की तरफ देखते हुए पूछा। करण ने ताली बजाई और हंस पड़ा। अब समझ में आ रहा है तुम्हें? उसने कहा, लेकिन थोड़ा देर हो चुकी है। कमरे में खामोशी छा गई। करण आगे बढ़ा और बोला, फैक्ट्री अब खत्म हो चुकी है। मशीनें तोड़ दी गई हैं। काम रुक चुका है और तुम्हारा घर भी अब ज्यादा दिन नहीं बचेगा। दृष्टि की मां घबरा गई। तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? उन्होंने रोते हुए पूछा। करण ने बिना किसी भाव के जवाब दिया क्योंकि अब सब कुछ मेरा होगा। एक ही शर्त है। दृष्टि इस आदमी को छोड़ दे। कमरे में सन्नाटा छा गया। दृष्टि ने शिवम की तरफ देखा। उसकी आंखों में सवाल था, डर था और कहीं ना कहीं एक उम्मीद भी थी। शिवम कुछ सेकंड तक चुप रहा। फिर उसने बहुत शांत आवाज में कहा, “अगर मैं मना कर दूं तो” करण मुस्कुराया तो तुम्हारा पूरा परिवार सड़क पर आ जाएगा। तुम्हारे पिता जीत जाएंगे और तुम लोग कहीं के नहीं रहोगे। उसने आगे बढ़कर शिवम के कंधे पर हाथ रखा। तुम्हारी औकात यही है। उसने धीरे से कहा और इसे स्वीकार कर लो।

अगले ही पल शिवम ने उसका हाथ पकड़ लिया। कमरे में मौजूद सभी लोग सन्न रह गए। करण ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं छुड़ा पाया। शिवम की पकड़ इतनी मजबूत थी कि करण के चेहरे पर दर्द साफ दिखाई देने लगा। तुमने बहुत कुछ कह लिया। शिवम ने शांत लेकिन ठंडी आवाज में कहा। फिर उसने एक झटके में उसका हाथ मोड़ दिया। करण दर्द से चिल्ला उठा। अब मेरी सुनो। शिवम ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, आज के बाद तुम या तुम्हारे परिवार का कोई भी व्यक्ति इस परिवार के पास नहीं आएगा। करण ने गुस्से में उसे धक्का देने की कोशिश की। लेकिन इस बार शिवम ने उसे सीधे जमीन पर गिरा दिया। कमरे में मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया। करण ने जमीन से उठते हुए गुस्से में कहा, तुमने मुझे हाथ लगाया है। अब मैं तुम्हें बर्बाद करके ही छोडूंगा। वह दरवाजा पटकते हुए बाहर निकल गया। कमरे में कुछ पल के लिए कोई कुछ नहीं बोला। दृष्टि की मां ने डरते हुए कहा, “तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी है। अब वह हमें खत्म कर देगा। शिवम ने उनकी तरफ देखा और पहली बार उसकी आवाज में भरोसा साफ सुनाई दिया। अब कुछ भी बुरा नहीं होगा। उसने कहा, दृष्टि ने उसकी आंखों में देखा। इस बार उसे डर नहीं लगा। इस बार उसे भरोसा महसूस हुआ।

अगले दिन सुबह शहर के हर बड़े व्यापारी के पास एक ही खबर थी। नारंग समूह के सभी बड़े ग्राहक एक-एक करके अपने सौदे खत्म कर रहे थे। कंपनी के शेयर तेजी से गिर रहे थे। बैठक कक्ष में अफरातफरी मची हुई थी। यह सब अचानक कैसे हो गया? एक निदेशक चिल्लाया। कोई बहुत बड़ा आदमी हमारे खिलाफ काम कर रहा है। दूसरे ने कहा अमिताभ नारंग जो अब तक खुद को संभाले हुए थे। पहली बार कमजोर दिखाई दिए। पता लगाओ कौन है वह। उन्होंने सख्त आवाज में कहा लेकिन किसी के पास जवाब नहीं था। उसी समय एक फोन आया। रायजादा समूह की तरफ से बात करनी है। सचिव ने कहा कमरे में खामोशी छा गई। फोन को स्पीकर पर रखा गया। एक घंटे में बैठक होगी। उधर से आवाज आई। आपकी कंपनी के अधिग्रह के बारे में बात करनी है। सभी लोग एक दूसरे की तरफ देखने लगे। अमिताभ का चेहरा पीला पड़ गया।

एक घंटे बाद बैठक कक्ष में एक युवक दाखिल हुआ। उसके साथ वकीलों और अधिकारियों की टीम थी। वह सीधे जाकर कुर्सी पर बैठ गया। अब से इस कंपनी का संचालन मैं करूंगा। उसने साफ आवाज में कहा। सब लोग चौंक गए क्योंकि अब इस कंपनी के अधिकतर शेयर हमारे पास है। कमरे में बैठे लोगों के चेहरों से रंग उड़ गया। यह कैसे हो सकता है? किसी ने कहा सब कुछ कागजों में साफ है। उसने जवाब दिया फाइलें सबके सामने रख दी गई। सभी ने देखा कंपनी अब उनके हाथ से निकल चुकी थी। तभी दरवाजा खुला और अंदर आया शिवम कमरे में मौजूद हर व्यक्ति उसकी तरफ देखने लगा। करण जो अब तक गुस्से में था उसे देखकर ठिठक गया। तम उसने कहा, शिवम धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसकी चाल में अब कोई झिझक नहीं थी। उसने सीधे सामने खड़े व्यक्ति से कहा, बाकी काम हो गया। उस व्यक्ति ने तुरंत खड़े होकर सिर झुका दिया। जैसा आपने कहा था, सब वैसा ही हुआ है। कमरे में मौजूद हर व्यक्ति यह देखकर स्तब्ध रह गया। करण के चेहरे पर डर साफ दिखाई देने लगा। यह सब तुमने किया। उसने कांपते हुए पूछा। शिवम उसके सामने जाकर खड़ा हो गया। तुमने सोचा था कि तुम सब कुछ छीन लोगे। उसने शांत आवाज में कहा। लेकिन तुम यह भूल गए कि हर खेल में एक खिलाड़ी ऐसा होता है जो अंत में चाल चलता है। करण कुछ बोल नहीं पाया। शिवम ने कमरे में मौजूद सभी लोगों की तरफ देखा। आज के बाद यह कंपनी उसी तरह चलेगी जैसे चली चाहिए। उसने कहा और कोई भी गलत काम यहां नहीं होगा। उसकी आवाज में ऐसा विश्वास था कि किसी ने विरोध करने की हिम्मत नहीं की।

बैठक खत्म होने के बाद दृष्टि बाहर खड़ी थी। शिवम उसके सामने आकर रुका। कुछ पल दोनों चुप रहे। फिर दृष्टि ने धीरे से पूछा, “तुम हो कौन?” इस बार शिवम ने नजरें नहीं हटाई। मैं वही हूं। उसने कहा जिसे तुमने कभी पहचाना था लेकिन मानने से इंकार कर दिया। दृष्टि की आंखों में आंसू आ गए। उसे अब समझ आ रहा था कि उसने क्या खो दिया था।

कुछ दिन बाद सब कुछ बदल चुका था। नारंग परिवार सुरक्षित था। कंपनी फिर से संभल चुकी थी। करण और उसका परिवार शहर छोड़कर जा चुका था। शाम का समय था। दृष्टि छत पर खड़ी थी। शिवम उसके पास आया। अब क्या सोच रही हो? उसने पूछा। दृष्टि ने हल्की मुस्कान के साथ कहा। सोच रही हूं कि मैं तुम्हें कभी समझ ही नहीं पाई। शिवम ने कुछ नहीं कहा। दृष्टि ने उसकी तरफ देखा। अब समझना चाहती हूं। उसने धीरे से कहा। शिवम ने उसकी आंखों में देखा। अब समय है। उसने कहा और पहली बार दोनों के बीच खामोशी में भी एक सुकून था। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। लेकिन अब से जो भी होगा वह साथ होगा और यही असली जीत थी।

तो दोस्तों, आपको यह कहानी कैसी लगी? क्या आपको इसमें छिपा सच महसूस हुआ? या आपको भी कहीं ना कहीं लगा कि ऐसे फैसले हम अपनी जिंदगी में भी ले बैठते हैं। अपने विचार और सुझाव मुझे कमेंट्स में जरूर बताइए। मैं हर एक कमेंट पढ़ता हूं और आपकी राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है। अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद आती हैं जो सिर्फ सुनने के लिए नहीं बल्कि सोचने पर मजबूर कर दे तो इस चैनल को जरूर सब्सक्राइब करें। आगे भी मैं आपके लिए ऐसी ही दिल को छू जाने वाली और सोच बदल देने वाली कहानियां लेकर आता रहूंगा। मिलते हैं अगली कहानी में। तब तक अपना ख्याल रखिए।

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