Crime Story

जिस बहन को गाली देने से मिलती थी सुंदरता, उसकी तारीफ ने खोल दिया खतरनाक सच

कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

मालिनी बचपन में अपने असली परिवार से बिछड़ गई थी। कई वर्षों बाद जब वह रघुवंशी परिवार की हवेली में लौटी, तो उसे लगा कि अब उसे माता-पिता और भाइयों का प्यार मिलेगा। लेकिन उसके लौटने से सबसे अधिक डर उसकी गोद ली हुई बहन अवनी को लगा।

बचपन में अवनी को एक पुराने मंदिर के शापित दर्पण से रहस्यमयी शक्ति मिली थी। उस शक्ति के अनुसार, मालिनी जब भी उसका अपमान करती, अवनी उसका रूप, स्वास्थ्य और जीवन-शक्ति चुराकर पहले से अधिक सुंदर बन जाती। लेकिन मालिनी द्वारा की गई प्रशंसा अवनी के लिए विष के समान थी, क्योंकि उससे चुराई हुई सारी शक्ति वापस लौटने लगती थी।

लालच में अंधा रघुवंशी परिवार मालिनी को अपनी बेटी नहीं, बल्कि अवनी की सुंदरता बनाए रखने का साधन समझने लगा। यहाँ तक कि अवनी के खराब होते अंगों को बचाने के लिए उन्होंने मालिनी के अंग निकालने की योजना भी बना ली।

पिछले जीवन में मालिनी अपने ही परिवार के हाथों दर्दनाक मृत्यु मर गई। लेकिन भाग्य ने उसे सगाई वाले दिन दोबारा जीवन दे दिया।

इस बार मालिनी ने अवनी का अपमान करने के बजाय सबके सामने उसकी प्रशंसा शुरू कर दी। जैसे-जैसे अवनी की झूठी सुंदरता मिटने लगी, वैसे-वैसे उसके पुराने अपराध, देवांश को बचाने का चुराया हुआ श्रेय, रोशनी की हत्या और रघुवंशी परिवार की अंग तस्करी का भयानक सच पूरी दुनिया के सामने आने लगा।

क्या मालिनी अपने परिवार से अपना जीवन और सम्मान वापस ले पाएगी?
क्या अवनी की रहस्यमयी शक्ति हमेशा के लिए समाप्त होगी?
और जब देवांश को अपनी बहन की हत्या का सच पता चलेगा, तब वह क्या करेगा?

जानने के लिए इस रहस्य, पुनर्जन्म, विश्वासघात और न्याय से भरी पूरी कहानी को अंत तक जरूर सुनिए।

कहानी पसंद आए तो वीडियो को पसंद करें, अपने दोस्तों के साथ साझा करें और ऐसी ही रोमांचक हिन्दी कहानियों के लिए हमारे चैनल को जरूर जुड़ें।

पढ़ना शुरू करें ↓
आप भाग 3 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 47 मिनट

भाग 3

ताबीज से आवाज़ आई—

“मुख्य जीवन-स्रोत द्वारा व्यक्तिगत अपमान।”

“सौन्दर्य स्तर तेजी से बढ़ रहा है।”

अवनी की त्वचा फिर से चमकने लगी।

वह खुशी से हँस पड़ी।

“हाँ, दीदी, और बोलो।”

मालिनी उसके कान के पास झुकी।

“जितनी खुशी अभी हो रही है, बाद में उतना ही दर्द होगा।”

अवनी ने इसे धमकी समझा, लेकिन वह नहीं जानती थी कि मालिनी ने अपने कपड़ों में एक छोटा आवाज़ दर्ज करने वाला यंत्र छिपा रखा था।

कमरे की सारी बातचीत सुरक्षित हो चुकी थी।

सगाई शहर के सबसे बड़े होटल में हो रही थी। बाहर पत्रकार, कैमरे और अवनी के प्रशंसक जमा थे। समारोह का सीधा प्रसारण चल रहा था।

अवनी ने मंच पर जाने से पहले अपना चेहरा देखा। वह फिर से सुंदर हो चुकी थी।

उसने मालिनी की ओर देखते हुए कहा, “दीदी, मंच पर भी यही करना। जितना कठोर बोलोगी, लोग मुझे उतना ही बेचारी समझेंगे।”

मालिनी ने शांत स्वर में पूछा, “और बदले में मुझे क्या मिलेगा?”

“तुम्हें क्या चाहिए?”

“पहले पूरे परिवार को सबके सामने स्वीकार करना होगा कि आज तक मैंने तुम्हें अपनी इच्छा से अपमानित नहीं किया।”

अवनी घबरा गई।

“ऐसा कैसे हो सकता है?”

“तो मैं जा रही हूँ।”

जैसे ही मालिनी मुड़ी, अवनी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

ताबीज से आवाज़ आई—

“सौन्दर्य स्थिरता समाप्त होने में पाँच मिनट।”

अवनी ने माता-पिता की ओर देखा।

“माँ, पापा, मान जाइए। बाद में कह देंगे कि यह सब मजाक था।”

महेंद्र और सविता को अंततः मंच पर जाना पड़ा।

सगाई के संचालक ने अचानक घोषणा की कि रघुवंशी परिवार कुछ कहना चाहता है।

महेंद्र ने मुस्कराने का प्रयास करते हुए कहा, “आज सुबह परिवार में एक गलतफहमी हुई थी। मालिनी ने अवनी को परेशान नहीं किया। हमने ही उस पर दबाव डाला था।”

सविता ने भी कहा, “मालिनी हमारी बेटी है। उससे गलती नहीं हुई।”

दर्शकों में फुसफुसाहट शुरू हो गई।

कुछ ही देर पहले यही परिवार मालिनी को कठोर और ईर्ष्यालु बता रहा था।

मालिनी मंच के पीछे खड़ी सब देख रही थी।

अवनी ने उससे कहा, “अब संतुष्ट हो? चलो, मेरा अपमान करो।”

“अभी नहीं।”

“अब क्या चाहिए?”

मालिनी ने कहा, “पचास करोड़ रुपये।”

अवनी की आँखें फैल गईं।

सविता फुसफुसाई, “तुम पागल हो गई हो?”

“अवनी की पोशाक ही कई करोड़ की है,” मालिनी ने कहा। “उसके पूरे भविष्य के सामने पचास करोड़ बहुत कम हैं।”

ताबीज ने चेतावनी दी—

“सौन्दर्य स्थिरता समाप्त होने में तीन मिनट।”

अवनी ने पिता की ओर देखा।

महेंद्र के लिए परिवार की आर्थिक सहायता और सिंघानिया रिश्ता दाँव पर था। उसने दाँत भींचकर रकम मालिनी के खाते में भेज दी।

मालिनी के हाथ में संदेश आया।

“राशि प्राप्त।”

अवनी ने राहत की साँस ली। “अब चलो।”

मालिनी मंच पर पहुँची।

भीड़ ने उसे देखते ही हूट करना शुरू कर दिया। अवनी के प्रशंसक चिल्ला रहे थे—

“अवनी को परेशान करना बंद करो!”

“ईर्ष्यालु बहन वापस जाओ!”

अवनी मंच पर आई। आँखों में आँसू भरकर उसने कहा, “कृपया मेरी दीदी को कुछ मत कहिए। वह गाँव में बहुत कठिन जीवन जीकर आई हैं। अगर वह मुझसे नाराज़ रहती हैं तो यह उनकी गलती नहीं।”

लोग अवनी की दया देखकर भावुक हो गए।

मालिनी ने उसे देखा।

इतना सुंदर अभिनय।

इसी अभिनय ने पिछले जन्म में उसे पूरी दुनिया की नजरों में खलनायिका बना दिया था।

संचालक ने मालिनी को बोलने के लिए कहा।

अवनी धीरे से फुसफुसाई, “शुरू करो।”

मालिनी ने माइक पकड़ा।

“दोस्तों,” उसने कहा, “आज मैं अपनी छोटी बहन के बारे में कुछ कहना चाहती हूँ।”

भीड़ शांत हो गई।

“अवनी बहुत सुंदर है।”

अवनी का चेहरा तन गया।

ताबीज ने चेतावनी दी—

“मुख्य स्रोत द्वारा सकारात्मक आशीर्वाद।”

“सौन्दर्य स्तर घट रहा है।”

मालिनी ने आगे कहा, “वह इतनी दयालु है कि उसने मेरे लौटने के बाद मेरा कमरा भी अपने पास नहीं रखा। उसने मुझे घर के पीछे पड़े सामान वाले कमरे में रहने दिया।”

कुछ लोगों ने एक-दूसरे की ओर देखा।

“वह इतनी नेक है कि मेरे हिस्से का भोजन, कपड़े और माँ का प्यार तक अपने पास रखती रही, ताकि मुझे इन सब चीजों के बोझ से बचा सके।”

भीड़ में हल्की हँसी सुनाई दी।

अवनी के चेहरे का दाग उभरने लगा।

सविता मंच के पास आकर बोली, “मालिनी, बस करो।”

मालिनी ने आश्चर्य से पूछा, “माँ, मैं तो अवनी की प्रशंसा कर रही हूँ।”

देवांश सिंघानिया, जो पहली पंक्ति में बैठा था, अब ध्यान से सब देख रहा था।

वह लंबा, प्रभावशाली और कठोर स्वभाव का युवक था। उसे अवनी पर पूरा विश्वास था, क्योंकि वह मानता था कि एक दुर्घटना के समय अवनी ने ही उसकी जान बचाई थी।

अवनी ने माइक छीनने की कोशिश की।

मालिनी ने पीछे हटते हुए कहा, “अवनी देश की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्री है। वह रोए तो दुनिया रोती है। मुस्कराए तो लोग उसके झूठ पर भी विश्वास कर लेते हैं।”

ताबीज की चेतावनी तेज हो गई—

“चेहरे की बनावट पूर्व स्थिति में लौट रही है।”

अवनी के चेहरे का श्रृंगार बिगड़ने लगा। उसकी नाक की बनावट बदल गई, आँखों के नीचे सूजन और त्वचा पर पुराने निशान दिखाई देने लगे।

लोगों में हलचल मच गई।

किसी ने कहा, “इसके चेहरे को क्या हो रहा है?”

महेंद्र चिल्लाया, “मालिनी, उसकी प्रशंसा मत करो!”

मालिनी ने तुरंत उसकी ओर देखा।

“क्यों, पिताजी? अपनी बेटी की प्रशंसा करना गलत है?”

अब दर्शकों को भी बात अजीब लगने लगी।

एक महिला बोली, “ये लोग उसे प्रशंसा करने से क्यों रोक रहे हैं?”

मालिनी ने कहा, “आप सब यही सोच रहे हैं न कि यह परिवार अवनी की तारीफ सुनकर इतना क्यों डर रहा है?”

अवनी रोते हुए बोली, “यह मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रही है।”

“तो चलो, केवल एक छोटा सा प्रयोग कर लेते हैं।”

मालिनी ने मंच पर लगे बड़े पर्दे की ओर संकेत किया।

पहले से तैयार आवाज़ की रिकॉर्डिंग चलने लगी।

उसमें अवनी की आवाज़ साफ सुनाई दी—

“दीदी, मुझे बदसूरत कहो। झूठी कहो। लालची कहो। जितना बुरा बोल सकती हो, बोलो।”

फिर महेंद्र की आवाज़ आई—

“अगर तुमने आज अवनी का अपमान नहीं किया तो मुझे पिता मत कहना।”

इसके बाद विक्रम और नीरज की आवाज़ें सुनाई दीं, जो मालिनी को अवनी के बारे में कठोर शब्द कहने के लिए मजबूर कर रहे थे।

पूरा समारोह स्तब्ध रह गया।

मालिनी ने कहा, “अवनी को एक विपरीत जीवन-बंधन मिला है। सामान्य लोगों के शब्द उस पर बहुत हल्का प्रभाव डालते हैं। लेकिन मैं उसके जीवन से बाँधी गई हूँ। मेरे अपमान से वह मेरा रूप, स्वास्थ्य और भाग्य चुरा लेती है। और मेरी प्रशंसा से चुराई हुई शक्ति मुझे वापस मिलने लगती है।”

अवनी चिल्लाई, “झूठ!”

मालिनी ने उसकी ओर देखकर कहा, “अवनी बहुत सुंदर है।”

उसके चेहरे पर एक और पुराना दाग उभर आया।

फिर मालिनी ने कहा, “अवनी बहुत दयालु है।”

उसके बालों की चमक कम हो गई।

“अवनी ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया।”

अवनी अचानक घुटनों के बल बैठ गई। उसके मुँह से खून की हल्की धार निकली।

लोग पीछे हट गए।

मालिनी ने कहा, “इतने वर्षों तक इसने मुझसे केवल सुंदरता नहीं, जीवन-शक्ति भी चुराई। इसका बाहरी चेहरा सुंदर होता गया, लेकिन इसके भीतर के अंग कमजोर होते गए। तब मेरे परिवार ने तय किया कि जब इसके अंग काम करना बंद करेंगे, तो मेरे अंग निकालकर इसे दे दिए जाएँगे।”

सविता रोने का अभिनय करते हुए बोली, “यह मानसिक रूप से बीमार है। इसकी बातों पर विश्वास मत कीजिए।”

मालिनी ने दूसरी रिकॉर्डिंग चला दी।

महेंद्र की आवाज़ गूँजी—

“जब जरूरत पड़ेगी, मालिनी के अंग अवनी को दे दिए जाएँगे।”

पूरा हाल शोर से भर गया।

देवांश अपनी जगह से उठा।

उसने अवनी की ओर देखा। “क्या यह सच है?”

अवनी ने तुरंत उसके पैरों को पकड़ लिया।

“देवांश, मैंने यह सब नहीं किया। मुझसे गलतियाँ हुई होंगी, लेकिन मैंने तुम्हारी जान बचाई थी। कम से कम उस प्रेम की खातिर मुझ पर विश्वास करो।”

देवांश का चेहरा कुछ नरम हुआ।

अवनी जानती थी कि यही उसका सबसे बड़ा हथियार है।

कई वर्ष पहले देवांश एक सड़क दुर्घटना के बाद बेहोश पड़ा था। किसी लड़की ने आपात सेवा को फोन करके उसकी जान बचाई थी। बाद में अवनी ने दावा किया कि वह लड़की वही थी।

देवांश ने उसी कर्ज को प्रेम समझ लिया था।

मालिनी ने धीमे स्वर में कहा, “देवांश सिंघानिया, तुम्हें बचाने वाली अवनी नहीं थी।”

देवांश ने उसकी ओर देखा।

“तुम्हें कैसे पता?”

बड़े पर्दे पर पुरानी आपातकालीन सेवा की आवाज़ चलने लगी।

एक घबराई हुई किशोरी कह रही थी—

“यहाँ एक युवक घायल पड़ा है। स्थान अठारह, प्रभात मार्ग है। कृपया जल्दी एम्बुलेंस भेजिए।”

देवांश का चेहरा बदल गया।

“यह आवाज़…”

मालिनी ने कहा, “मेरी है।”

फिर अस्पताल के प्रवेश द्वार की पुरानी तस्वीर दिखाई गई। उसमें साधारण कपड़े पहने मालिनी घायल देवांश के पास बैठी थी।

“मैंने तुम्हें सड़क पर पाया था। मैंने सहायता बुलाई। अस्पताल तक गई। लेकिन परिवार ने मुझे वहाँ से हटा दिया। अगले दिन अवनी तुम्हारा दिया हुआ स्मृति-चिह्न पहनकर तुम्हारे सामने पहुँची और उसने मेरा श्रेय चुरा लिया।”

देवांश ने अवनी के गले में पड़े पुराने पन्ने के हार को देखा।

“तो यह हार…”

“मेरा था,” मालिनी ने कहा।

देवांश ने काँपते हाथ से हार खींच लिया।

अवनी का चेहरा सफेद पड़ गया।

उसी समय देवांश का सहायक तेजी से मंच पर पहुँचा।

“देवांश जी, हमें आपकी बहन रोशनी की मृत्यु से जुड़ी जाँच में नया प्रमाण मिला है।”

पूरा हाल शांत हो गया।

देवांश की छोटी बहन रोशनी तीन वर्ष पहले गायब हुई थी। कुछ दिनों बाद उसकी मृत्यु का समाचार मिला, लेकिन उसका शरीर कभी नहीं मिला।

देवांश ने पूछा, “क्या प्रमाण?”

सहायक ने मालिनी की ओर देखा।

“प्रमाण का संबंध रघुवंशी परिवार और एक ऐसी लड़की से है जिसे रोशनी अपने अंतिम दिनों में बार-बार मिलने जाती थी।”

देवांश धीरे-धीरे अवनी की ओर मुड़ा।

अवनी काँपने लगी।

मालिनी ने माइक उठाया।

“देवांश, तुम्हारी बहन रोशनी की मृत्यु कोई दुर्घटना नहीं थी।”

उसने अवनी की आँखों में देखते हुए कहा—

“उसकी हत्या की गई थी।”

देवांश की आवाज़ काँप गई। “किसने?”

मालिनी ने बिना पलक झपकाए उत्तर दिया—

“अवनी ने।”

समारोह में ऐसा सन्नाटा छा गया मानो सैकड़ों लोगों से भरे उस विशाल हाल में अचानक कोई मौजूद ही न हो।

देवांश की आँखें मालिनी पर टिकी थीं।

“तुमने क्या कहा?”

मालिनी ने दोहराया, “रोशनी की हत्या अवनी और रघुवंशी परिवार ने मिलकर की थी।”

अवनी ने तुरंत चिल्लाकर कहा, “यह झूठ बोल रही है! यह मुझे तुमसे अलग करना चाहती है।”

देवांश ने कठोर स्वर में मालिनी से पूछा, “तुम्हारे पास क्या प्रमाण है?”

मालिनी ने गहरी साँस ली।

दोस्तों, अब कहानी में वह रहस्य खुलने वाला था जिसने केवल रोशनी का जीवन नहीं लिया था, बल्कि मालिनी के पिछले जन्म की मृत्यु का रास्ता भी तैयार किया था।

तीन वर्ष पहले रोशनी अपने भाई से नाराज़ होकर घर से निकल गई थी। वह स्वतंत्र स्वभाव की लड़की थी। धनवान परिवार से होने के बावजूद उसे सामान्य लोगों के बीच रहना पसंद था।

एक अभिनय कार्यशाला में उसकी मुलाकात अवनी से हुई।

अवनी ने तुरंत पहचान लिया कि रोशनी सिंघानिया परिवार की बेटी है। वह जानती थी कि यदि रोशनी से मित्रता हो गई, तो देवांश तक पहुँचने का रास्ता खुल सकता है।

उस समय अवनी का रूप तेजी से सुंदर हो रहा था, लेकिन उसके गुर्दे कमजोर होने लगे थे।

ताबीज ने उसे चेतावनी दी थी—

“मुख्य स्रोत से प्राप्त शक्ति शरीर की सीमा से अधिक।”

“नए स्वस्थ अंग आवश्यक।”

अवनी को मालिनी के अंग चाहिए थे, लेकिन तब तक मालिनी के नाम की संपत्ति पूरी तरह परिवार के हाथ में नहीं आई थी। उसकी मृत्यु से कानूनी कठिनाइयाँ पैदा हो सकती थीं।

इसी दौरान चिकित्सा जाँच में पता चला कि रोशनी के अंग भी अवनी से मेल खाते थे।

अवनी ने रोशनी से मित्रता बढ़ाई।

वह उसके सामने बेचारी बनती और कहती, “मेरी बड़ी बहन गाँव से लौट रही है। वह मुझसे नफरत करती है। मुझे डर है कि वह मेरा सब कुछ छीन लेगी।”

रोशनी दयालु थी।

अवनी ने उससे कहा कि वह उसे कठोर शब्द कहे ताकि वह मानसिक रूप से मजबूत हो सके।

रोशनी हँसते हुए कभी उसे आलसी, कभी झूठी और कभी मूर्ख कह देती।

सामान्य व्यक्ति होने के कारण रोशनी के शब्दों का प्रभाव बहुत कम था, लेकिन अवनी को उससे थोड़ी ऊर्जा मिलने लगी।

धीरे-धीरे उसने रोशनी को अपने घर बुलाना शुरू किया।

एक रात अवनी ने उसे नशीला पेय दिया।

जब रोशनी की आँख खुली, वह एक गुप्त चिकित्सालय के कमरे में बँधी थी।

उसने अवनी को सामने खड़े देखा।

“यह क्या कर रही हो?”

अवनी ने उसके पेट के बाईं ओर बने लाल जन्मचिह्न को देखा और कहा, “तुम्हारे पास वह चीज है जिसकी मुझे जरूरत है।”

रोशनी ने संघर्ष करते हुए कहा, “तुम्हें पता है मेरा भाई कौन है?”

SHARE THE STORY

यह कहानी किसी अपने के साथ साझा करें

0 बार पढ़ी गई
Whatsapp Telegram
DILFEVER YOUTUBE

ऐसी ही नई कहानियाँ वीडियो में सुनें

@DilFever

Subscribe करें
आपकी राय

अगर आप मुख्य किरदार की जगह होते, तो क्या फैसला लेते?

अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर लिखें।

Leave a Comment