Crime Story

जिस टैक्सी ड्राइवर ने बचाई उसकी इज्जत, वही निकला अरबों का मालिक—फिर खुला …

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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

अपनी डूबती कंपनी को बचाने के लिए निवेशकों की पार्टी में पहुंची अनन्या एक ताकतवर उद्योगपति की गंदी साजिश में फंस जाती है। तभी एक साधारण टैक्सी ड्राइवर आरव उसकी जान और इज्जत बचाता है। लेकिन अगले दिन जब आरव की असली पहचान सामने आती है, तो अनन्या के पिता की मौत, चोरी हुई मेडिकल रिसर्च और वर्षों पुरानी एक खतरनाक साजिश के तार खुलने लगते हैं। क्या आरव और अनन्या असली गुनहगार तक पहुंच पाएंगे, या सच जानने से पहले ही उन्हें हमेशा के लिए चुप करा दिया जाएगा?

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आप भाग 1 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 30 मिनट

भाग 1

मुंबई की रात हमेशा चमकती हुई लगती थी। लेकिन उस चमक के पीछे कितनी अंधेरी कहानियां छिपी होती हैं, यह हर कोई नहीं जानता था।

समुद्र के किनारे बने एक आलीशान होटल की 35वीं मंजे पर उस रात शहर के सबसे बड़े निवेशकों की पार्टी चल रही थी। महंगे सूट, चमचमाते गहने, धीमी अंग्रेजी धुने, हाथों में ग्लास और चेहरों पर बनावटी मुस्काने, सब कुछ इतना परफेक्ट दिख रहा था कि सच कहीं दिखाई ही नहीं दे रहा था।

उसी भीड़ में एक लड़की खड़ी थी। अनन्या कपूर उम्र सिर्फ 28 साल लेकिन आंखों में वह थकान थी जो कई बार उम्र से नहीं जिम्मेदारियों से आती है। उसने गहरे नीले रंग की साड़ी पहनी थी। बाल सलीके से बांधे थे और हाथ में अपनी कंपनी की फाइलें पकड़ी हुई थी। उसकी कंपनी क्वांटम बायोटेक पिछले 3 साल से एक ऐसी मेडिकल नैनो चिप पर काम कर रही थी जो शरीर के अंदर जाकर बीमारी की शुरुआती पहचान कर सकती थी।

यह तकनीक लाखों लोगों की जान बचा सकती थी। लेकिन एक समस्या थी। पैसा कंपनी की लैब गिरवी थी। कर्मचारियों की तनख्वाह 2 महीने से अटकी थी। बैंक ने आखिरी नोटिस भेज दिया था।

अगर आज निवेश नहीं मिला तो अनन्या का सपना खत्म हो सकता था और उसके साथ उसके पिता का अधूरा सपना भी। मिस कपूर पीछे से आई आवाज सुनकर अनन्या पलटी। विक्रम मल्होत्रा उसके सामने खड़ा था। उम्र 55 के करीब चेहरे पर महंगी मुस्कान और आंखों में सस्ती नियत। आपकी प्रस्तुति शानदार थी।

उसने कहा सच कहूं तो आपकी तकनीक में बहुत दम है। अनन्या ने राहत की सांस ली। धन्यवाद सर आपकी कंपनी अगर इस प्रोजेक्ट में निवेश करती है तो हम अगले 8 महीनों में क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर सकते हैं। विक्रम ने मुस्कुराकर सिर हिलाया। निवेश तो होगा अनन्या जी लेकिन बिजनेस में सिर्फ तकनीक नहीं देखी जाती।

भरोसा भी देखा जाता है। आपको किस तरह का भरोसा चाहिए? विक्रम थोड़ा पास आया। थोड़ा निजी भरोसा। अनन्या के चेहरे की मुस्कान हल्की पड़ गई।

मैं समझी नहीं। समझदार लोग हर बात शब्दों में नहीं पूछते। विक्रम ने धीमी आवाज में कहा, “आज रात मेरे साथ थोड़ा समय बिताइए। कल सुबह आपकी कंपनी के खाते में 25 करोड़ होंगे। अनन्या का गला सूख गया।

उसने एक कदम पीछे हटते हुए कहा, “मुझे आपकी शर्त मंजूर नहीं।” विक्रम की मुस्कान गायब हो गई। सोच लो इस शहर में पैसा मेरे इशारे पर चलता है। तुम मेरी बात मानोगी तो कंपनी बचेगी। नहीं मानोगी तो तुम्हारा नाम, तुम्हारा प्रोजेक्ट और तुम्हारी इज्जत सब मिट्टी में मिल जाएगा। अनन्या ने कांपती आवाज में कहा, “मेरे पिता ने मुझे सिखाया था कि हार जाना मंजूर है।

बिक जाना नहीं।” यह कहकर वह वहां से हट गई। लेकिन कहानी यही खत्म नहीं हुई थी।

कुछ देर बाद एक दूसरी कंपनी के प्रतिनिधि ने उसे जूस का गिलास दिया। अनन्या ने बिना सोचे एक घूंट पी लिया। उसके बाद सब कुछ धुंधला होने लगा। रोशनी तैरने लगी। आवाजें दूर जाने लगी।

पैर लड़खड़ाने लगे। आप ठीक हैं? किसी ने पूछा। अनन्या कुछ बोल नहीं पाई।

तभी विक्रम फिर सामने आ गया। लगता है मिस कपूर को आराम की जरूरत है। उसने आसपास खड़े लोगों से कहा। मैं इन्हें होटल के कमरे तक छोड़ देता हूं। अनन्या ने विरोध करना चाहा लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था।

विक्रम ने उसका हाथ पकड़ लिया। छोड़िए अनन्या ने धीमे से कहा, चुप रहो। विक्रम ने दांत भी कर फुसफुसाया। बहुत आदर्श दिखा चुकी हो।

वह उसे होटल से बाहर लेकर आया और पार्किंग के पास खड़ी एक काली टैक्सी का दरवाजा खोला। सबसे नजदीकी होटल। विक्रम ने ड्राइवर से कहा। ड्राइवर ने शीशे में पीछे देखा। उसकी उम्र लगभग 30 साल रही होगी।

साधारण शर्ट, हल्की दाढ़ी, शांत चेहरा और आंखों में अजीब गहराई। उसका नाम था आरव। मैडम ठीक नहीं लग रही। आरव ने कहा, विक्रम भड़क गया। तुम्हें पैसे ड्राइविंग के मिलते हैं?

जांच करने के नहीं। गाड़ी चलाओ। अनन्या ने मुश्किल से आंखें खोली। मदद उसके होठों से टूटी हुई आवाज निकली। आरव के हाथ स्टीयरिंग पर रुक गए।

सर, मैं गाड़ी आगे नहीं ले जा सकता। क्या कहा? मैडम ने मदद मांगी है। विक्रम आगे झुका। तुम जानते हो मैं कौन हूं?

आरव ने शांत स्वर में कहा, इतना जानता हूं कि आदमी वही बड़ा होता है जो बेहोश लड़की की मजबूरी का फायदा ना उठाए। विक्रम ने उसका कॉलर पकड़ लिया। तू एक टैक्सी ड्राइवर है। अपनी औकात में रह। आरव की आंखों में पहली बार ठंडक उतर आई।

औकात सड़क पर गाड़ी चलाने से छोटी नहीं होती। किसी की इज्जत लूटने से छोटी होती है। विक्रम गुस्से में बाहर उतरा। बाहर निकल। अभी बताता हूं तुझे।

आरव भी बाहर उतरा। अगले ही पल विक्रम ने हाथ उठाया। लेकिन उसका हाथ हवा में ही रुक गया। आरव ने उसकी कलाई पकड़ ली थी तो गलत आदमी से भिड़ गए। मल्होत्रा साहब आरव ने धीरे से कहा विक्रम चौका तू मेरा नाम कैसे जानता है?

आरव ने जवाब नहीं दिया। उसने बस विक्रम को जोर से धक्का दिया। विक्रम लड़खड़ा कर जमीन पर गिरा। उसी पल होटल की ओर से कुछ लोग आते दिखे। आरव तुरंत टैक्सी में बैठा और गाड़ी तेजी से आगे बढ़ा दी।

पीछे से विक्रम चिल्लाता रह गया। ए ड्राइवर तू पछताएगा। लेकिन टैक्सी रात के अंधेरे में गायब हो चुकी थी।

कुछ देर बाद अनन्या की आंख खुली। वह एक कमरे में थी। साफ सफेद चादर, साइड टेबल पर पानी, कुर्सी पर उसका बैग और सामने खिड़की से आती सुबह की हल्की रोशनी। उसका दिल जोर से धड़कने लगा। वह घबरा कर उठी।

तभी दरवाजा खुला। आरव नाश्ते की ट्री लेकर अंदर आया। आप उठ गई। मैंने सोचा चाय। बात पूरी होने से पहले अनन्या ने पास रखा फूलदान उठा लिया और उसके कंधे पर दी मारा।

आरव दर्द से पीछे हटा। अरे मैंने क्या किया? कौन हो तुम? मुझे यहां क्यों लाए? मेरे साथ क्या किया तुमने?

आरव ने दोनों हाथ ऊपर कर दिए। कुछ नहीं किया। आप अपने कपड़ों में हैं। आपका बैग वही है। फोन भी वही है।

रात को आपकी हालत खराब थी। इसलिए मैं आपको सुरक्षित होटल में ले आया। रिसेप्शन पर आपकी आईडी से कमरा लिया है। मैं बाहर लॉबी में बैठा था। अनन्या ने जल्दी से खुद को देखा।

सब ठीक था। उसकी आंखों में शर्म और राहत दोनों आ गए। मुझे लगा वह रुक गई। आरव ने अपना कंधा सहलाते हुए कहा, हां, मुझे समझ आ गया। वैसे आपका निशाना अच्छा है।

अनन्या की आंखें भर आई। सई और धन्यवाद। अगर आप नहीं होते तो कल रात आरव ने बात काट दी। जो नहीं हुआ उसके बारे में मत सोचिए। जो बच गया उसे संभालिए।

अनन्या ने पहली बार उसे गौर से देखा। वह साधारण दिखता था। लेकिन बोलता किसी पढ़े लिखे समझदार आदमी की तरह था। आपका नाम आरव आप टैक्सी चलाते हैं। आजकल हां आजकल आरव मुस्कुराया।

कभी-कभी इंसान रास्ते बदलता है ताकि मंजिल साफ दिखे। अनन्या को उसका जवाब अजीब लगा लेकिन उसने ज्यादा नहीं पूछा।

तभी उसे अचानक याद आया। ओह नहीं। आज निवेशक सम्मेलन है। वह जल्दी से उठी। मुझे अभी जाना होगा।

बिल मैं दे दूंगी। आरव ने कहा, “मैं छोड़ देता हूं। नहीं मैं कल रात के बाद अकेले जाना समझदारी नहीं होगी। अनन्या चुप हो गई।

कुछ देर बाद टैक्सी मुंबई की सड़कों पर दौड़ रही थी। अनन्या पीछे बैठी फोन पर लगातार संदेश पढ़ रही थी। उसकी टीम घबराई हुई थी। निवेशक इंतजार कर रहे थे। मीडिया भी पहुंच चुकी थी।

आपकी कंपनी किस चीज की है? आरव ने पूछा मेडिकल टेक्नोलॉजी। अनन्या ने संक्षेप में कहा, क्वार्टम बायोटेक अनन्या हैरान हुई। आप जानते हैं थोड़ा बहुत आपकी नैनो चिप तकनीक अगर सफल हुई तो डायग्नोस्टिक इंडस्ट्री बदल सकती है। अनन्या ने आश्चर्य से उसे देखा।

एक टैक्सी ड्राइवर को यह सब कैसे पता? आरव ने शीशे में उसकी तरफ देखा। टैक्सी ड्राइवर भी अखबार पढ़ते हैं। मैडम अनन्या हल्का मुस्कुराई। ठीक है।

लेकिन यह सिर्फ तकनीक नहीं है। यह मेरे पिता का सपना है। उन्होंने कैंसर की शुरुआती जांच के लिए इस रिसर्च की शुरुआत की थी। जब तक उनकी बीमारी पता चले। बहुत देर हो चुकी थी।

उसकी आवाज भर्रा गई। मैं चाहती हूं कि किसी और बेटी को अपने पिता को ऐसे खोना ना पड़े। आरव चुप हो गया। उसने गाड़ी की रफ्तार धीमी की। फिर तो यह सिर्फ बिजनेस नहीं मिशन है।

अनन्या ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा, “हां लेकिन मिशन भी पैसों के बिना मर जाता है। अगर निवेशक ना मिले तो मिलेनिय मुझे मिलाने ही होंगे और अगर गलत निवेशक मिले।” अनन्या ने उसकी तरफ देखा तो मैं भूखी रह लूंगी। पर कंपनी किसी गंदे हाथ में नहीं दूंगी। आरव के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई। अच्छा है।

अभी भी दुनिया में कुछ लोग बचे हैं। सम्मेलन हॉल पहुंचते ही अनन्या ने जल्दी से उतरते हुए कहा कल रात के लिए फिर से धन्यवाद। आरा और फूलदान के लिए। अनन्या पहली बार खुलकर मुस्कुराई। उसके लिए माफ कीजिए।

ठीक है। लेकिन अगली बार कब इस्तेमाल कीजिएगा। फूलदान महंगे होते हैं। अनन्या हंस पड़ी। कई दिनों बाद वह हंसी थी।

लेकिन उसे नहीं पता था कि कुछ मिनट बाद वही हंसी फिर छीनने वाली है। सम्मेलन हॉल में बड़े-बड़े उद्योगपति बैठे थे। मंच पर उसकी कंपनी का लोगो चमक रहा था। क्वांटम बायोटेक होस्ट ने घोषणा की देवियों और सज्जनों आज हम स्वागत करते हैं उस युवा उद्यमी का जिसने भारतीय मेडिकल टेक्नोलॉजी को नई दिशा देने का सपना देखा है। मिस अनन्या कपूर तालियां बजी।

अनन्या मंच पर गई। उसने प्रस्तुति शुरू की। हमारी नैनो चिप शरीर के अंदर जाकर कोशिकाओं के स्तर पर बदलाव पहचान सकती है। इसका उद्देश्य गंभीर बीमारियों को शुरुआती अवस्था में पकड़ना है। लोग ध्यान से सुन रहे थे।

कुछ निवेशकों ने नोच लिए। सब कुछ ठीक चल रहा था।

तभी हॉल का दरवाजा खुला। विक्रम मल्होत्रा अंदर आया। उसके चेहरे पर वही जहरीली मुस्कान थी। अनन्या का गला सूख गया। विक्रम ने ताली बजाते हुए कहा, वाह!

बहुत सुंदर प्रस्तुति। लेकिन क्या आप निवेशकों को यह भी बताएंगी कि आपकी कंपनी वित्तीय रूप से डूब चुकी है। हॉल में सन्नाटा छा गया। अनन्या ने खुद को संभाला। हर स्टार्टअप को फंडिंग की जरूरत होती है।

यह कोई छिपी बात नहीं है। विक्रम आगे बढ़ा और यह भी कोई छिपी बात नहीं कि आपकी लैब गिरवी है। कर्मचारियों की तनख्वाह रुकी है और आपकी तकनीक अभी तक प्रमाणित नहीं हुई। एक निवेशक ने पूछा, क्या यह सच है? अनन्या ने कहा हमारी तकनीक परीक्षण चरण में है लेकिन परिणाम मजबूत हैं।

विक्रम हंसा मजबूत या झूठे अनन्या कांप गई। आप क्या कहना चाहते हैं? विक्रम ने एक पेन ड्राइव निकाली। मेरे पास रिपोर्ट है कि आपकी रिसर्च टीम ने डाटा में छेड़छाड़ की है। हॉल में हलचल मच गई।

आप भाग 2 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 30 मिनट

भाग 2

यह झूठ है। अनन्या चिल्लाई। विक्रम ने धीमे स्वर में कहा, झूठ साबित कर दो। लेकिन तब तक कोई निवेशक तुम्हें एक नहीं देगा। अनन्या की आंखों में आंसू आ गए लेकिन उसने उन्हें गिरने नहीं दिया।

विक्रम उसके पास आया और धीमे से बोला कल रात मेरी बात मान लेती तो आज यह सब नहीं होता। अनन्या ने घृणा से उसकी तरफ देखा। तुम बहुत नीचे गिर चुके हो और तुम अभी गिरोगी।

उसी समय पीछे से आवाज आई। गिराने वाले अक्सर भूल जाते हैं कि जमीन सबकी होती है। कभी खुद भी गिर सकते हैं। सब ने मुड़कर देखा। दरवाजे पर आरव खड़ा था।

साधारण शर्ट, साधारण चेहरा लेकिन आंखों में तूफान। विक्रम जोर से हंसा। अरे वाह, टैक्सी ड्राइवर भी आ गया। अब क्या तुम निवेश करोगे? हॉल में कुछ लोग हंस पड़े।

अनन्या ने हैरानी से कहा, आरव, तुम यहां क्यों आए? आरव धीरे-धीरे आगे बढ़ा क्योंकि कुछ लोगों को लगता है कि पैसे से सच खरीदा जा सकता है। विक्रम गुस्से से बोला, सिक्योरिटी। इस आदमी को बाहर निकालो। दो गार्ड आगे बढ़े।

आरव ने शांत स्वर में कहा, छूने से पहले सोच लो। नौकरी बची रहे तो अच्छा है। गार्ड रुक गए। विक्रम चिल्लाया। तुम जानते नहीं हो मैं कौन हूं।

आरव ने पहली बार तेज आवाज में कहा, “मैं अच्छी तरह जानता हूं।” विक्रम मल्होत्रा, तुम वही आदमी हो जिसने अपनी तीन कंपनियां दूसरों की रिसर्च चुराकर खड़ी की। वही आदमी जिसने पिछले साल एक छोटे वैज्ञानिक को फर्जी केस में फंसाया और वही आदमी जिसने कल रात एक महिला के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। हॉल में सन्नाटा छा गया। विक्रम का चेहरा पीला पड़ गया। सबूत है तुम्हारे पास।

आरव ने अपनी जेब से फोन निकाला। पूरा वीडियो विक्रम के माथे पर पसीना आ गया। अनन्या ने अविश्वास से आरव को देखा। तुमने रिकॉर्ड किया सुरक्षा के लिए। आरव ने कहा विक्रम ने खुद को संभाला।

एक टैक्सी ड्राइवर की बात पर कोई यकीन नहीं करेगा। आरव मुस्कुराया। सही कहा। टैक्सी ड्राइवर की बात पर शायद नहीं।

तभी हॉल के बाहर से कई लोग अंदर आए। काले सूट पहने सुरक्षा अधिकारी उनके बीच एक महिला थी क्लोई मेहरा वह सीधा आरव के पास आई और झुक कर बोली सर आपकी टीम बाहर तैयार है पूरा हॉल स्तब्ध रह गया अनन्या के होंठ खुल गए सर विक्रम पीछे हट गया यह क्या नाटक है क्लोई ने मंच की स्क्रीन पर एक दस्तावेज खुलवाया उसमें लिखा था सिंघानिया ग्लोबल होल्डिंग्स चेयरमैन है आरव राज सिंघानिया हॉल में बैठे कई बड़े उद्योगपति अपनी सीटों से खड़े हो गए किसी ने फुसफुसाकर कहा यह आरव सिंघानिया है। दूसरी ने कहा वही जो पिछले 5 साल से मीडिया से गाया था।

तीसरे ने कहा सिंघानिया ग्लोबल का मालिक अनन्या का दिल धड़कना भूल गया। वह जिसे टैक्सी ड्राइवर समझ रही थी। वह देश के सबसे बड़े व्यापारिक साम्राज्य का मालिक था। विक्रम की आवाज कांप गई। तुम जिंदा हो।

आरव की आंखें ठंडी हो गई। हां विक्रम और अब लौट आया हूं।

यह सुनते ही हॉल में खामोशी फैल गई क्योंकि यह सिर्फ एक निवेशक सम्मेलन नहीं था। यह उस जंग की शुरुआत थी जिसे आरव 5 साल से छिप कर तैयार कर रहा था और अनन्या को अभी पता भी नहीं था कि उसके पिता की मौत, उसकी कंपनी पर हमला और आरव का गायब होना इन सबके तार एक ही आदमी से जुड़े थे। विक्रम मल्होत्रा से मुंबई के उस विशाल कॉन्फ्रेंस हॉल में ऐसा सन्नाटा छा गया था मानो समय ही रुक गया हो। कुछ मिनट पहले तक लोग जिस आदमी को एक साधारण टैक्सी ड्राइवर समझ रहे थे, अचानक वही देश के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक सिंघानिया ग्लोबल का मालिक निकला था। अनन्या अभी तक स्तब्ध खड़ी थी।

उसकी आंखें बार-बार आरव पर जा रही थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि जिस इंसान ने सुबह उसके लिए नाश्ता खरीदा था, वहीं अरबों की संपत्ति का मालिक हो सकता है।

उधर विक्रम मल्होत्रा का चेहरा पीला पड़ चुका था। उसने धीरे-धीरे पीछे हटना शुरू किया। लेकिन आरव की निगाहें उस पर जमी थी। इतनी जल्दी जाने की क्या जरूरत है? विक्रम।

आरव ने शांत स्वर में कहा, हमारी मुलाकात तो अभी शुरू हुई है। विक्रम ने खुद को संभालने की कोशिश की। मुझे नहीं पता तुम क्या साबित करना चाहते हो। सच कौन सा सच? आरव मुस्कुराया।

वही सच जिसे तुमने 5 साल तक दफनाने की कोशिश की। पूरा हॉल खामोश था। अनन्या को लग रहा था जैसे वह किसी फिल्म का हिस्सा बन गई हो। लेकिन यह फिल्म नहीं थी। यह उसकी जिंदगी थी और शायद उसके पिता की मौत से भी जुड़ी हुई थी।

कॉन्फ्रेंस के बाद मीडिया में हड़कंप मच गया। हर चैनल पर एक ही खबर चल रही थी। सिंघानिया ग्लोबल के रहस्यमई मालिक की वापसी। विक्रम मल्होत्रा पर गंभीर आरोप। क्वांटम बायोटिक विवाद के पीछे कौन?

उसी शाम आरव ने अनन्या को अपने ऑफिस बुलाया। ऑफिस क्या था? पूरा एक साम्राज्य था। 50 मंजिला कांच की इमारत अंदर सैकड़ों कर्मचारी उच्च सुरक्षा स्वचालित सिस्टम और हर जगह सिंघानिया ग्लोबल का लोगो अनन्या अंदर पहुंची तो उसे महसूस हुआ कि वह किसी दूसरी दुनिया में आ गई है। क्लोई उसे ऊपर ले गई।

सर आपका इंतजार कर रहे हैं। सर अनन्या बुदबुदाई। अभी भी उसे आरव को सर कहना अजीब लग रहा था।

कमरे का दरवाजा खुला। आरव खिड़की के सामने खड़ा समुद्र को देख रहा था। आज उसने साधारण टैक्सी ड्राइवर वाले कपड़े नहीं पहने थे। काला सूट, सफेद शर्ट, साफ सुथरा व्यक्तित्व। वह बिल्कुल अलग इंसान लग रहा था।

फिर भी उसकी आंखें वही थी। शायद गहरी और रहस्यमय। बैठा। आरव ने कुर्सी की तरफ इशारा किया। कुछ सेकंड तक दोनों चुप रहे।

फिर अनन्या बोली, तुमने झूठ क्यों बोला? किस बारे में? तुम टैक्सी ड्राइवर नहीं थे। आरव हल्का मुस्कुराया। मैं टैक्सी चला रहा था।

लेकिन तुम अरबपति हो। दोनों बातें सच हैं। मजाक मत करो। आरव की मुस्कान गायब हो गई। मैं मजाक नहीं कर रहा।

उसने कुछ देर बाद कहा कभी-कभी सच जानने के लिए आदमी को ऊपर नहीं नीचे जाना पड़ता है। अनन्या समझ नहीं पाई। मतलब आरव ने खिड़की से बाहर देखा। 5 साल पहले मेरे पिता की हत्या हुई थी। अनन्या चौंक गई।

क्या आधिकारिक रिकॉर्ड में उसे दुर्घटना कहा गया? लेकिन वह दुर्घटना नहीं थी। कमरे में खामोशी छा गई और मुझे शक था कि उसके पीछे कुछ बड़े लोग हैं। विक्रम आरव ने धीरे से सिर हिलाया।

शायद उस रात पहली बार आरव ने अपने अतीत की कहानी सुनाई। उसके पिता देश के सबसे ईमानदार उद्योगपतियों में गिने जाते थे। लेकिन वे एक ऐसे मेडिकल प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे जो अरबों का बाजार बदल सकता था। उसी दौरान उनकी मौत हो गई। कई सबूत गायब हो गए।

गवाह गायब हो गए। फाइलें गायब हो गई और मामला हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। लेकिन आरव ने हार नहीं मानी। उसने अपनी पहचान छिपा ली। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को सामने रखकर खुद पर्दे के पीछे चला गया।

5 साल तक वह अलग-अलग शहरों में घूमता रहा। लोगों को समझता रहा। जानकारी जुटाता रहा और उसी दौरान उसकी नजर विक्रम मल्होत्रा पर गई। अनन्या चुपचाप सुनती रही। फिर उसने पूछा लेकिन इसका मेरी कंपनी से क्या संबंध है?

आरव ने मेज पर एक फाइल रखी। यही तो मुझे पता लगाना है। क्या मतलब तुम्हारे पिता कौन थे? अनन्या की आंखें भर आई। क्या रवि कपूर आरव ने फाइल उसकी तरफ बढ़ा दी?

इसे खोलो। अनन्या ने फाइल खोली। अंदर कुछ पुराने दस्तावेज थे और एक तस्वीर तस्वीर देखते ही उसके हाथ कांप गए। उसमें उसके पिता खड़े थे। लेकिन अकेले नहीं।

उनके साथ आरव के पिता भी थे। या दोनों पार्टनर थे। अनन्या की सांस रुक गई। क्या तुम्हारे पिता और मेरे पिता एक ही प्रोजेक्ट पर साथ काम कर रहे थे? लेकिन पापा ने कभी नहीं बताया क्योंकि शायद उन्हें मौका नहीं मिला।

अनन्या की आंखों से आंसू निकल पड़े। उसकी पूरी दुनिया बदल रही थी। उसे लग रहा था जैसे उसके पिता की जिंदगी का आधा हिस्सा उससे छिपा लिया गया हो।

उधर विक्रम मल्होत्रा अपने पेंट हाउस में बैठा था। उसके सामने टीवी पर खबरें चल रही थी। हर चैनल उसका नाम ले रहा था। वह गुस्से में ग्लास तोड़ बैठा। आरव सिंहानिया उसने दांत पीसे तुझे मर जाना चाहिए था।

तभी उसका निजी सहायक अंदर आया। सर क्या है? एक और समस्या है। अब क्या क्वांटम बायोटक की टीम ने नया प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। विक्रम का चेहरा सख्त हो गया।

नहीं यह उसे बाजार तक नहीं पहुंचना चाहिए। अगले दिन अनन्या अपनी लैब पहुंची। कर्मचारियों में नया उत्साह था। सिंघानिया ग्लोबल का समर्थन मिलने के बाद उम्मीद वापस लौट आई थी। सब खुश थे लेकिन खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।

दोपहर में अचानक अलार्म बजने लगा। लैब के सर्वर रूम से धुआं निकल रहा था। लोग भागने लगे। अनन्या दौड़ती हुई अंदर पहुंची। मुख्य सर्वर जल चुका था।

कई हार्ड डिस्क नष्ट हो चुकी थी। उसका चेहरा सफेद पड़ गया। नहीं उसकी आवाज कांप गई। नहीं वर्षों का शोध हजारों घंटे की मेहनत, करोड़ों का डाटा सब खत्म हो चुका था।

उसी समय आरव को फोन आया। वह तुरंत वहां पहुंचा। अनन्या जमीन पर बैठी रो रही थी। सब खत्म हो गया। आरव उसके पास बैठ गया।

शांत हो जाओ। तुम समझ नहीं रहे। मैं समझ रहा हूं। नहीं समझ रहे। उसकी आवाज टूट गई।

यह सिर्फ कंपनी नहीं थी। यह मेरे पापा का सपना था। अब कुछ नहीं बचा। कुछ सेकंड तक आरव चुप रहा। फिर उसने कहा, “अगर मैं कहूं कि सब बचा हुआ है।” अनन्या ने उसकी तरफ देखा।

क्या? आरव मुस्कुराया। मैं हमेशा बैकअप रखता हूं।

1 घंटे बाद सिंघानिया ग्लोबल का साइबर सिक्योरिटी विभाग सक्रिय हो चुका था। उन्होंने जांच शुरू की और सिर्फ 4 घंटे में उन्हें सच्चाई मिल गई। आग दुर्घटना नहीं थी। सर्वर को पहले हैक किया गया था। डाटा चुराया गया।

फिर सबूत मिटाने के लिए आग लगाई गई। किसने किया? अनन्या ने पूछा। विशेषज्ञ बोला हमें अभी नाम नहीं मिला है। लेकिन हम ट्रैक कर रहे हैं।

तभी स्क्रीन पर एक लोकेशन दिखाई दी। सबकी आंखें फैल गई। सिग्नल सीधे विक्रम मल्होत्रा के एक सहयोगी की कंपनी तक पहुंच रहा था।

उधर विक्रम को भी खबर मिल चुकी थी। उसने तुरंत आदेश दिया सभी डिजिटल रिकॉर्ड मिटा दो। लेकिन सर अगर यह और एक बात सर अब सिर्फ डाटा चोरी से काम नहीं चलेगा तो विक्रम की आंखें खतरनाक हो गई। अनन्या कपूर को खत्म करना होगा।

उसी रात अनन्या अपनी कार से घर लौट रही थी। सड़क सुनसान थी। अचानक पीछे से एक ट्रक तेजी से आया। उसने कार को टक्कर मारने की कोशिश की। अनन्या घबरा गई।

आप भाग 3 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 30 मिनट

भाग 3

उसने गाड़ी मोड़ दी। ट्रक फिर पीछे आ गया। तब साफ था यह दुर्घटना नहीं थी। कोई उसे मारना चाहता था। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

फोन हाथ से गिर गया। कार नियंत्रण खोने लगी।

तभी सामने से एक काली एसयूवी आई। वह सीधे ट्रक के सामने आ गई। ट्रक ड्राइवर घबरा गया। गाड़ी बेकाबू हुई और सड़क किनारे जाकर पलट गई। अनन्या ने ब्रेक लगाए।

कुछ सेकंड बाद एसयूवी का दरवाजा खुला। आरव बाहर निकला। वह तेजी से उसकी कार तक पहुंचा। तुम ठीक हो? अनन्या की आंखों में आंसू आ गए।

तमर मैंने कहा था ना क्या आरव ने हल्की मुस्कान दी। अब तुम अकेली नहीं हो।

लेकिन दोनों नहीं जानते थे कि असली तूफान अभी बाकी था क्योंकि उसी समय एक अज्ञात व्यक्ति विक्रम को फोन कर रहा था। विक्रम ने कॉल उठाई। काम क्यों नहीं हुआ। दूसरी तरफ से आवाज आई। आरव बीच में आ गया।

कुछ सेकंड खामोशी रही। फिर वह रहस्यमय आवाज बोली, कोई बात नहीं प्लान भी शुरू करो। विक्रम ने पूछा, लेकिन सर अगर आरव को सच्चाई पता चल गई तो खून पर मौजूद व्यक्ति हंसा। धीरे ठंडे स्वर में उसे अभी तक यह भी नहीं पता कि उसके पिता की मौत के पीछे असली इंसान कौन था। विक्रम की आंखें फैल गई।

आप कहना क्या चाहते हैं? दूसरी तरफ से जवाब आया, मैं कहना चाहता हूं कि तुम सिर्फ मोहरा हो। विक्रम खेल कोई और खेल रहा है और अगले ही पल कॉल कट गया। विक्रम के हाथ कांपने लगे क्योंकि पहली बार उसे भी एहसास हुआ कि वह जिस इंसान के लिए वर्षों से काम कर रहा था, उसने कभी उसका चेहरा तक नहीं देखा था।

मुंबई की रात फिर एक बार जाग रही थी। लेकिन इस बार सिर्फ शहर नहीं जाग रहा था। आरव सिंघानिया भी जाग रहा था और उसके साथ जाग रही थी वह सच्चाई जिसका पीछा वह पिछले 5 सालों से कर रहा था। अपने पेंट हाउस की ऊंची खिड़की के सामने खड़ा वह समुद्र की तरफ देख रहा था। उसकी आंखों में नींद नहीं थी।

सिर्फ सवाल थे। उसके पिता की मौत अनन्या के पिता का रहस्य विक्रम मल्होत्रा और वह ज्ञात आदमी जिसने फोन पर कहा था विक्रम सिर्फ एक मोहरा है। अगर विक्रम मोहरा था तो खिलाड़ी कौन था?

उसी समय क्लोई कमरे में दाखिल हुई। उसके हाथ में एक फाइल थी। सर आरव पलटा कुछ मिला। क्लोई ने फाइल टेबल पर रखी। हमने विक्रम के पिछले 10 साल के सभी ट्रांजैक्शन ट्रैक किए हैं और हर बड़ी डील के बाद पैसा एक ही शेयर कंपनी में गया है।

किसकी? ब्लैक स्टोन बायो रिसर्च आरव का माथा सिकुड़ गया। मैंने कभी यह नाम नहीं सुना। किसी ने नहीं सुना। क्लोई बोली क्योंकि यह कंपनी सिर्फ कागजों में मौजूद है।

मालिक नहीं मिला। डायरेक्टर नहीं मिला। ऑफिस नहीं मिला तो मिला क्या? क्लोई ने गहरी सांस ली। सिर्फ एक नाम।

आरव की नजर उसके चेहरे पर टिक गई। कार्ल क्लोई ने धीरे से कहा राजवीर सिंघानिया कमरे में सन्नाटा छा गया। आरव के हाथ से कॉफी का कप छूट गया। राजवीर सिंघानिया यह नाम उसके लिए किसी तूफान से कम नहीं था क्योंकि राजवीर उसका चाचा था। उसके पिता का छोटा भाई वही इंसान जिसने उसके पिता की मौत के बाद परिवार और बिजनेस संभाला था।

वही इंसान जिसने उसे बचपन में गोद में खिलाया था। वही इंसान जिसे वह अपना दूसरा पिता मानता था। नहीं आरव बुदबुदाया। यह नहीं हो सकता। लेकिन क्लोई की आंखों में संदेह नहीं था।

हमें भी विश्वास नहीं हुआ था। लेकिन सारे रिकॉर्ड उसी की तरफ इशारा कर रहे हैं। आरव कुर्सी पर बैठ गया। उसका दिमाग सुन्न हो गया था। 5 सालों से वह बाहर दुश्मन ढूंढ रहा था और शायद दुश्मन हमेशा उसके घर के अंदर था।

उधर अनन्या भी चैन से नहीं बैठी थी। उसे लग रहा था कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई।

उस रात उसने अपने पिता की पुरानी डायरी खोल ली। वर्षों से वह उसे संभाल कर रखे हुए थी। पन्ने पलटते पलटते अचानक एक कागज नीचे गिरा। वह पीला पड़ चुका था। शायद बहुत पुराना था।

अनन्या ने उसे उठाया और पढ़ते ही उसकी सांस अटक गई। उस पर लिखा था अगर मेरे साथ कुछ हो जाए तो आर एस पर भरोसा मत करना। नीचे उसके पिता के हस्ताक्षर थे। आर एस राजवीर सिंघानिया।

अगली सुबह अनन्या सीधे आरव के ऑफिस पहुंची। जैसे ही उसने वह कागज दिखाया, आरव का चेहरा बदल गया। अब संदेह लगभग यकीन में बदल चुका था। हमें उससे मिलना होगा। आरव ने कहा तभी उस शाम दोनों राजवीर सिंघानिया के फार्म हाउस पहुंचे।

वह जगह किसी महल से कम नहीं थी। सैकड़ों एकड़ जमीन, सुरक्षा गार्ड, प्राइवेट हेलीकॉप्टर और हर तरफ आलीशान सजावट राजवीर ने दोनों का स्वागत मुस्कुरा कर किया। आओ बच्चों इतने दिनों बाद याद आई मेरी लेकिन उसकी मुस्कान देखकर भी आरव को पहली बार अजीब महसूस हुआ कुछ गलत था बहुत गलत डिनर के दौरान राजवीर सामान्य बातें करता रहा लेकिन अचानक आरव ने पूछा पापा की मौत वाली रात आप कहां थे टेबल पर सन्नाटा छा गया राजवीर की मुस्कान हल्की पड़ गई अचानक यह सवाल क्यों क्योंकि मुझे जवाब चाहिए राजवीर ने पानी का गिलास उठाया पुरानी बातें भूल जाओ मैं नहीं भूल सकता तुम मत भूलो। राजवीर की आवाज पहली बार कठोर हुई। लेकिन कब्रें खोदना बंद कर दो।

अनन्या ने पहली बार देखा कि दोनों की आंखों में सीधी टक्कर हो रही थी। कुछ सेकंड बाद राजवीर उठ खड़ा हुआ। विनय खत्म हुआ। अब जा लेकिन जैसे ही वह मुड़ा एक कागज उसकी जीभ से नीचे गिर गया। अनन्या ने उसे उठा लिया और पढ़ते ही उसका चेहरा सफेद पड़ गया।

वह दस्तावेज क्वार्टम बायोटक के चोरी हुए शोध का था। अब कोई शक नहीं बचा था। राजवीर ही मास्टरमाइंड था लेकिन असली झटका अभी बाकी था।

जैसे ही वे बाहर निकले अचानक चारों तरफ हथियार बंद लोग आ गए। अनन्या चीख उठी। आरव तुरंत उसके सामने खड़ा हो गया और उसी समय पीछे से ताली बजने की आवाज आई। राजवीर धीरे-धीरे बाहर आया। अब उसके चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं थी।

मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम इतनी जल्दी सच तक पहुंच जाओगे। आरव की मुट्ठियां भी गई। क्यों? राजवीर हंसा। पैसा सिर्फ पैसे के लिए सिर्फ पैसे नहीं उसकी आंखों में पागलपन उतर आया।

तुम्हारे पिता हमेशा मुझसे बेहतर थे। सब लोग उनकी तारीफ करते थे। मैं हमेशा उनकी परछाई बनकर रह गया। तो मैंने तय किया कि एक दिन सब कुछ मेरा होगा। आरव की आंखें लाल हो गई।

तुमने अपने भाई को मरवा दिया। ख राजवीर मुस्कुराया और सिर्फ उसे नहीं। वह अनन्या की तरफ मुड़ा। तुम्हारे पिता को भी अनन्या का दिल जैसे रुक गया। झुर वह चीखी लेकिन राजवीर हंस पड़ा।

उन्होंने सच्चाई जान ली थी। इसलिए उन्हें भी हटाना पड़ा। अनन्या की आंखों से आंसू बहने लगे। सालों से जिस दर्द के साथ वह जी रही थी। आज उसका अपराधी सामने खड़ा था उन्हें पकड़ लो।

राजवीर ने आदेश दिया तुरंत दर्जनों लोग आगे बढ़े। इसके बाद जो हुआ वह किसी फिल्म जैसा था। आरव ने एक आदमी को मुक्का मारा। दूसरे को धक्का दिया। तीसरे का हथियार छीन लिया।

लेकिन दुश्मन बहुत ज्यादा थे। कुछ ही मिनटों में दोनों को पकड़ लिया गया।

उन्हें फार्म हाउस के अंदर एक कमरे में बंद कर दिया गया। हाथ बांध दिए गए। दरवाजा बंद हो गया।

कुछ देर तक दोनों चुप रहे। फिर अनन्या रो पड़ी। मैंने पापा से वादा किया था कि उनका सपना पूरा करूंगी। लेकिन सब खत्म हो गया। आरव ने उसकी तरफ देखा।

नहीं सब खत्म नहीं हुआ। कैसे? क्योंकि हमने सच ढूंढ लिया।

तभी आरव मुस्कुराया। अनन्या हैरान हुई। तुम मुस्कुरा क्यों रहे हो? क्योंकि यह वही कमरा है जिसकी मुझे उम्मीद थी। क्या मतलब?

आरव ने अपनी घड़ी दिखाई। उसमें एक छोटा लाल बटन था। मैं अंदर आने से पहले यह दबा चुका हूं।

उसी समय बाहर सायरन बजने लगे। पूरे फार्म हाउस में अफरातफरी मच गई। क्लोई पुलिस आर्थिक अपराध शाखा और साइबर सेल के साथ पहुंच चुकी थी। राजवीर घबरा गया। नहीं लेकिन अब देर हो चुकी थी।

उसके सारे बैंक रिकॉर्ड मिल चुके थे। डाटा चोरी के सबूत मिल चुके थे। हत्या के गवाह सामने आ चुके थे और सबसे बड़ा सबूत विक्रम मल्होत्रा सरकारी गवाह बन चुका था।

कुछ घंटों बाद राजवीर गिरफ्तार हो गया। लेकिन कहानी का सबसे भावनात्मक हिस्सा अभी बाकी था।

3 महीने बाद मुंबई हाईकोर्ट अदालत खचाखच भरी हुई थी। जज ने फैसला सुनाया। राजवीर सिंघानिया को आजीवन कारावास विक्रम मल्होत्रा को 20 वर्ष की सजा। सभी अवैध संपत्तियां जब्त फैसला सुनते ही अनन्या की आंखों से आंसू निकल आए। वर्षों बाद उसे लगा कि उसके पिता को न्याय मिला है।

6 महीने बाद क्वांटम बायोटक का नया रिसर्च सेंटर खुला। इस बार निवेश की कमी नहीं थी। सिंघानिया ग्लोबल उसके साथ खड़ा था। मंच पर अनन्या खड़ी थी। उसके पीछे उसके पिता की तस्वीर लगी थी।

यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है। उसने कहा, यह उन सभी लोगों की जीत है जो सच और ईमानदारी पर विश्वास करते हैं। तालियों की गुंज पूरे हॉल में फैल गई।

कार्यक्रम खत्म होने के बाद वह बाहर आई। समुद्र के किनारे सूरज डूब रहा था। वहां आरव खड़ा था। उसी तरह जैसे पहली बार टैक्सी के पास खड़ा था। एक बात पूछूं।

अनन्या ने कहा, हम अगर उस रात तुम वह टैक्सी नहीं चला रहे होते तो आरव मुस्कुराया तो शायद मैं तुम्हें कभी नहीं मिल पाता। कुछ सेकंड दोनों चुप रहे। फिर आरव ने जेब से एक छोटा डिब्बा निकाला। अनन्या की आंखें फैल गई। यह क्या है?

एक नीलेश नीलेश था मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निवेश। उसने डिब्बा खोला। अंदर एक अंगूठी थी। अनन्या कपूर क्या तुम मेरी पार्टनर बनोगी? अनन्या हंसते-हंसते रो पड़ी।

बिजनेस पार्टनर आरव मुस्कुराया। उम्मीद तो उससे थोड़ी ज्यादा की है और अगले ही पल अनन्या ने उसे गले लगा लिया। समुद्र की लहरें किनारे से टका रही थी। सूरज धीरे-धीरे डूब रहा था और दो अधूरी कहानियां आखिरकार एक हो चुकी थी।

तो दोस्तों आज की कहानी यहीं समाप्त होती है। उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आई होगी और इस कहानी से आपको कुछ ना कुछ सीखने को जरूर मिला होगा।

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