Crime Story

जिस पत्नी को अरबपति ने अपनी पूरी कंपनी सौंपनी चाही, वही निकली सबसे बड़ी धोखेबाज़

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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

आरव सिंघानिया एक सफल अरबपति था, जिसके पास दौलत, प्रतिष्ठा और एक विशाल व्यापारिक साम्राज्य था। लेकिन उसके लिए इन सबसे अधिक कीमती थी उसकी पत्नी मेहर, जिससे वह अपनी जिंदगी से भी ज्यादा प्यार करता था।

मेहर के प्रेम पर भरोसा करते हुए आरव अपनी कंपनी के बड़े हिस्से के अधिकार उसके नाम करने वाला था। मगर हस्ताक्षर से कुछ दिन पहले एक दुर्घटना के कारण उसकी मुलाकात एक अनजान व्यक्ति से हुई। उस व्यक्ति की कलाई पर आरव ने वही विशेष घड़ी देखी, जो मेहर ने उसे यह कहकर दी थी कि दुनिया में ऐसी दूसरी घड़ी नहीं है।

घड़ी के पीछे लिखा संदेश भी बिल्कुल वही था।

यहीं से आरव की खूबसूरत प्रेम कहानी एक दर्दनाक रहस्य में बदल जाती है। सच की तलाश में उसे पता चलता है कि मेहर विवाह से पहले ही किसी और से प्रेम करती थी और उसने आरव से शादी केवल उसकी दौलत तथा कंपनी पर अधिकार पाने के लिए की थी।

लेकिन दोस्तों, कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। जिस प्रेमी के लिए मेहर ने अपने पति को धोखा दिया, वह भी उसके लिए एक ऐसी योजना बना चुका था, जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की थी।

क्या आरव अपनी कंपनी और सम्मान बचा पाएगा?
क्या वह मेहर को क्षमा करेगा?
और जन्मदिन के समारोह में रखे गए कागजों में आखिर ऐसा क्या था, जिसने पूरी साजिश पलट दी?

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आप भाग 4 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 54 मिनट

भाग 4

उस छोटी बच्ची के परिवार के खाते में समारोह के कुछ दिन बाद एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा धन भेजा गया था। वही धन रिषभ से जुड़े एक खाते से आया था।

आरव देर तक उस जानकारी को देखता रहा।

उसकी प्रेम कहानी का पहला दृश्य भी झूठ था।

जिस घटना को उसने भाग्य माना था, वह एक योजना थी।

उसने देव से कहा, “मुझे सभी संदेश, सभी खाते और सभी पुराने संपर्क चाहिए।”

जाँच आगे बढ़ी।

कुछ दिनों बाद उन्हें एक पुरानी ध्वनि रिकॉर्डिंग मिली। रिषभ अपनी सुरक्षा के लिए कई वार्ताएँ रिकॉर्ड करता था।

उस रिकॉर्डिंग में मेहर की आवाज थी।

वह कह रही थी, “वह मुझसे बहुत जुड़ गया है। कभी-कभी मुझे डर लगता है।”

रिषभ ने पूछा, “डर किस बात का?”

“अगर उसे सच पता चला, तो वह टूट जाएगा।”

रिषभ हँसा।

“वह तुमसे प्रेम नहीं करता। वह केवल इस भावना से प्रेम करता है कि किसी ने आखिरकार उसे चुना है।”

मेहर ने बहुत धीमे स्वर में कहा, “शायद।”

रिकॉर्डिंग समाप्त हो गई।

आरव ने उसे दोबारा चलाया।

फिर तीसरी बार।

हर बार वही वाक्य उसके भीतर उतरता गया।

“वह केवल इस भावना से प्रेम करता है कि किसी ने आखिरकार उसे चुना है।”

क्या उसका प्रेम इतना कमजोर था?

क्या मेहर ने उसके अकेलेपन को पहचाना और उसी का उपयोग किया?

आरव उस रात फिर अपनी माँ के पुराने घर गया।

वहाँ बैठकर उसने पहली बार जोर से कहा, “माँ, मैंने गलत व्यक्ति को अपना घर दे दिया।”

कमरा शांत रहा।

आरव ने आँखें बंद कर लीं।

उसे लगा जैसे माँ कह रही हों—घर देने में गलती नहीं थी, बेटे। गलती उस व्यक्ति की थी, जिसने घर को लूटने की जगह समझ लिया।

जाँच में एक और रहस्य सामने आया।

रिषभ ने विदेश में एक गुप्त कंपनी बनाई थी। योजना यह थी कि मेहर को मिलने वाले कंपनी के अधिकार धीरे-धीरे उस गुप्त कंपनी के नियंत्रण में चले जाएँ।

लेकिन उन दस्तावेजों में मेहर का नाम कहीं नहीं था।

सभी अधिकार केवल रिषभ के पास जाने वाले थे।

यानी रिषभ मेहर को भी धोखा दे रहा था।

कंपनी पर नियंत्रण मिलते ही वह मेहर को छोड़कर धन लेकर भागना चाहता था।

देव ने कहा, “तुम मेहर को यह बता सकते हो। शायद वह हमारे पक्ष में आ जाए।”

आरव ने कुछ देर सोचा।

फिर बोला, “वह मेरा पक्ष तब चुनती, जब उसके पास अवसर था। अब अगर वह रिषभ के विरुद्ध आती है, तो वह केवल स्वयं को बचाने के लिए आएगी।”

“तो तुम क्या करोगे?”

आरव ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा, “मैं दोनों को वह दूँगा, जिसके वे हकदार हैं।”

उधर मेहर और रिषभ के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था।

रिषभ चाहता था कि मेहर किसी भी तरह आरव पर दबाव डाले। मेहर अब डरने लगी थी।

वह समझ चुकी थी कि आरव को कुछ पता चल गया है।

एक रात उसने आरव को पुस्तकालय में अकेले बैठे देखा।

वह उसके पास गई।

“तुम मुझसे दूर क्यों हो गए हो?”

आरव ने पुस्तक बंद की।

“क्या तुम सच में जानना चाहती हो?”

“हाँ।”

“क्या तुम्हें हमारे विवाह का पहला वर्ष याद है?”

“हाँ।”

“जब मैं माँ की बरसी पर टूट गया था, तब तुमने मुझे पूरी रात संभाला था।”

मेहर की आँखें झुक गईं।

आरव ने पूछा, “क्या वह सच था?”

मेहर ने तुरंत कहा, “हाँ।”

“जब तुमने कहा कि तुम्हें मेरी दौलत से कोई फर्क नहीं पड़ता, वह सच था?”

“हाँ।”

“जब तुमने कहा कि तुमने मुझसे पहले किसी से प्रेम नहीं किया, वह भी सच था?”

मेहर ने कोई उत्तर नहीं दिया।

आरव की आवाज भर्रा गई।

“मुझे केवल यह जानना है कि क्या हमारे बीच कोई एक पल ऐसा था, जिसमें तुम अभिनय नहीं कर रही थीं?”

मेहर की आँखों से आँसू निकल आए।

शायद पहली बार वे आँसू पूरी तरह झूठे नहीं थे।

लेकिन वह फिर भी सच बोलने का साहस नहीं जुटा सकी।

उसने कहा, “तुम्हें आराम करना चाहिए। काम का तनाव तुम्हें बहुत प्रभावित कर रहा है।”

आरव उसे देखता रह गया।

अब उसे रिषभ और मेहर की अगली योजना समझ आ गई थी।

वे उसे मानसिक रूप से अस्थिर घोषित करना चाहते थे।

कुछ दिनों बाद आरव ने घोषणा की कि मेहर के जन्मदिन पर एक भव्य समारोह होगा। उसी समारोह में कंपनी के अधिकारों से जुड़े कागजों पर हस्ताक्षर किए जाएँगे।

मेहर ने राहत की साँस ली।

उसने तुरंत रिषभ को सूचना दी।

रिषभ ने कहा, “देखा? मैंने कहा था वह कुछ नहीं जानता।”

मेहर ने पूछा, “और हस्ताक्षर के बाद?”

“हम कुछ सप्ताह प्रतीक्षा करेंगे। फिर उसके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रश्न उठाएँगे। चिकित्सकीय प्रमाण तैयार हैं।”

“और उसके बाद?”

“तुम अध्यक्ष बनोगी। मैं तुम्हारा सलाहकार।”

“फिर हम साथ रहेंगे?”

रिषभ कुछ क्षण चुप रहा।

“हाँ। हमेशा।”

लेकिन उसी समय वह अपने सामने रखे उन दस्तावेजों को देख रहा था, जिनमें मेहर का भविष्य भी पहले ही उससे छीन लिया गया था।

दोस्तों, अब कहानी में हर व्यक्ति किसी न किसी भ्रम में जी रहा था।

आरव कभी मेहर के प्रेम के भ्रम में था, लेकिन अब जाग चुका था।

मेहर अब भी रिषभ के प्रेम के भ्रम में थी।

और रिषभ को भ्रम था कि वह आरव सिंघानिया से अधिक चतुर है।

जन्मदिन का समारोह केवल उत्सव नहीं था।

वह एक ऐसा मंच बनने वाला था, जहाँ प्रेम, लालच और धोखे का पूरा खेल सबके सामने खुलने वाला था।

मेहर के जन्मदिन का दिन आ गया।

सिंघानिया समूह के मुख्य सभागार को भव्य रूप से सजाया गया था। ऊँची छत से सफेद और सुनहरे फूलों की लंबी सजावट लटक रही थी। मंच के पीछे विशाल पर्दे पर मेहर और आरव की मुस्कुराती हुई तस्वीर दिखाई दे रही थी।

समाचार माध्यमों को बताया गया था कि आरव सिंघानिया इस अवसर पर कंपनी से जुड़ी बड़ी घोषणा करने वाला है।

देश के प्रमुख उद्योगपति, कंपनी के निदेशक, वरिष्ठ कर्मचारी, कानूनी सलाहकार और निवेशक वहाँ उपस्थित थे।

मेहर ने गहरे लाल रंग की सुंदर साड़ी पहन रखी थी। उसके गले में वही हीरों का हार था, जो आरव ने उनकी पहली वर्षगाँठ पर दिया था।

आईने के सामने खड़ी मेहर स्वयं को देख रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर खुशी से ज्यादा चिंता थी।

उसने कई बार रिषभ को संदेश भेजा।

“तुम पहुँच गए?”

कुछ देर बाद उत्तर आया—

“हाँ। सभा में पीछे बैठा हूँ।”

मेहर ने पूछा—

“सब ठीक रहेगा न?”

रिषभ ने लिखा—

“आज के बाद हमें किसी से डरने की जरूरत नहीं होगी।”

मेहर ने गहरी साँस ली।

उसी समय आरव कमरे में आया।

उसने काले रंग का बंदगला पहना था। उसके चेहरे पर गहरी शांति थी।

मेहर उसकी ओर मुड़ी।

“मैं कैसी लग रही हूँ?”

आरव कुछ क्षण उसे देखता रहा।

एक समय था, जब वह उसे देखकर शब्द भूल जाता था।

आज भी वह सुंदर थी।

लेकिन अब उस सुंदरता के पीछे उसे झूठ की परतें दिखाई दे रही थीं।

फिर भी उसने कहा, “बहुत सुंदर।”

मेहर उसके पास आई।

“आरव, क्या हम आज से सब कुछ फिर से शुरू कर सकते हैं?”

आरव ने पूछा, “क्या समाप्त हुआ है?”

“पिछले कुछ दिनों से हमारे बीच दूरी है।”

“दूरी अचानक नहीं आती, मेहर। वह उन बातों से बनती है, जो लोग एक-दूसरे से छिपाते हैं।”

मेहर की आँखें झुक गईं।

आरव ने जेब से एक छोटा डिब्बा निकाला।

मेहर ने सोचा, शायद कोई नया आभूषण है।

आरव ने डिब्बा खोला।

उसमें वही घड़ी रखी थी, जो मेहर ने उसे दी थी।

“आज इसे पहनोगे नहीं?” उसने पूछा।

आरव ने कहा, “आज इसकी जरूरत मंच पर पड़ेगी।”

मेहर का चेहरा पीला पड़ गया।

“क्या मतलब?”

“समारोह शुरू होने वाला है।”

आरव बाहर चला गया।

सभागार में तालियों के बीच दोनों मंच पर पहुँचे। आरव ने मेहर के जन्मदिन पर उसके सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की। उसने कहा कि मेहर के आने के बाद उसके जीवन में बहुत परिवर्तन आया।

उसकी आवाज में इतना अपनापन था कि मेहर को एक क्षण के लिए लगा, शायद सब ठीक है।

आरव ने कहा, “किसी भी मनुष्य के जीवन में विश्वास सबसे बड़ी पूँजी होता है। हम धन खोकर फिर कमा सकते हैं। व्यापार खोकर फिर बना सकते हैं। लेकिन विश्वास टूट जाए, तो कभी-कभी पूरी जिंदगी भी उसे वापस लाने के लिए कम पड़ जाती है।”

सभा में बैठे लोग ध्यान से सुन रहे थे।

मेहर की उँगलियाँ ठंडी होने लगीं।

आरव ने आगे कहा, “मैंने अपने जीवन में बहुत कम लोगों पर भरोसा किया। क्योंकि मुझे बचपन से सिखाया गया था कि विश्वास कमजोरी है। फिर एक व्यक्ति मेरी जिंदगी में आया और उसने मुझे विश्वास दिलाया कि किसी को अपना सब कुछ सौंप देना भी प्रेम हो सकता है।”

उसने मेहर की ओर देखा।

उसकी आँखों में आँसू थे।

सभा को वे आँसू प्रेम के दिखाई दिए।

मेहर जानती थी कि वे किसी और कारण से थे।

“आज,” आरव ने कहा, “मैं कंपनी के भविष्य से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने जा रहा हूँ।”

तालियाँ गूँज उठीं।

देव कागज लेकर मंच पर आया।

उसने उन्हें मेहर के सामने रखा।

मेहर ने जल्दी से पन्ने देखे। कानूनी भाषा कठिन थी। कुछ अनुच्छेद बदले हुए लग रहे थे, लेकिन रिषभ ने उससे कहा था कि आरव के सामने अधिक प्रश्न न करना।

आरव ने कलम उसकी ओर बढ़ा दी।

“पढ़ना चाहोगी?”

मेहर ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे तुम पर भरोसा है।”

आरव की आँखों में दर्द उभरा।

“ठीक वही भरोसा, जो मुझे तुम पर था?”

मेहर का हाथ काँप गया।

सभा में बैठे लोगों को लगा कि यह पति-पत्नी के बीच कोई भावुक बात है।

मेहर ने हस्ताक्षर कर दिए।

आरव ने भी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

रिषभ पीछे बैठा मुस्कुरा रहा था।

उसे लगा योजना सफल हो गई।

आरव ने देव को संकेत किया।

मंच के पीछे लगी विशाल पट्टिका पर नई जानकारी दिखाई दी।

“सिंघानिया कर्मचारी न्यास।”

सभा में फुसफुसाहट शुरू हो गई।

आरव ने कहा, “आज से सिंघानिया समूह के चालीस प्रतिशत मतदान अधिकार किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों के न्यास को सौंपे जा रहे हैं, जिन्होंने वर्षों की मेहनत से इस कंपनी को बनाया है।”

मेहर ने चौंककर आरव की ओर देखा।

“यह क्या है?”

आरव ने शांत स्वर में कहा, “वही दस्तावेज, जिन पर तुमने मुझ पर भरोसा करके हस्ताक्षर किए।”

मेहर की साँस तेज हो गई।

रिषभ अपनी सीट पर सीधा बैठ गया।

आरव ने आगे कहा, “कंपनी के शेष नियंत्रक अधिकार मेरे पास रहेंगे। कोई भी व्यक्ति निजी संबंध, दबाव या धोखे के माध्यम से इस समूह पर अधिकार नहीं कर सकेगा।”

अब सभा में पूर्ण खामोशी थी।

मेहर ने धीमे स्वर में कहा, “आरव, यह सब क्या हो रहा है?”

आरव ने मंच पर रखा छोटा डिब्बा खोला।

उसने अपनी घड़ी बाहर निकाली।

फिर देव ने दूसरा डिब्बा खोला।

उसमें रिषभ की घड़ी थी, जिसे जाँच दल ने कानूनी प्रमाण के रूप में प्राप्त किया था।

दोनों घड़ियाँ एक-दूसरे के पास रखी गईं।

सभा में बैठे रिषभ का चेहरा उतर गया।

आरव ने कहा, “कुछ उपहार केवल समय नहीं बताते। वे यह भी बताते हैं कि हमारा समय किस झूठ में बीत रहा था।”

मेहर की आँखों से आँसू बहने लगे।

“आरव, मेरी बात सुनो।”

“तीन साल तक मैंने केवल तुम्हारी बात सुनी, मेहर। आज तुम मेरी सुनोगी।”

उसके संकेत पर पर्दे पर वित्तीय दस्तावेज दिखाई देने लगे।

रिषभ से जुड़े गुप्त खाते।

मेहर के नाम से तैयार किए गए अधिकार हस्तांतरण के मसौदे।

आरव को मानसिक रूप से अस्थिर घोषित करने के लिए तैयार नकली चिकित्सकीय कागज।

विदेशी कंपनी का विवरण।

सभा में लोग स्तब्ध रह गए।

सुरक्षा कर्मचारियों ने दरवाजे बंद कर दिए।

रिषभ उठकर बाहर जाने लगा, लेकिन दो अधिकारी उसके सामने आ गए।

आरव ने कहा, “रिषभ खन्ना, अगर आप जा रहे हैं, तो कम से कम अपनी योजना का अंतिम भाग तो सुनते जाइए।”

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